यूपी के सरकारी स्कूलों में बनेगी विद्यालय प्रबंध (एसएमसी) समिति, 75 प्रतिशत सदस्य होंगे अभिभावक
उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। अब राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में विद्यालय प्रबंध समिति (एसएमसी) का गठन किया जाएगा। इस समिति में विद्यार्थियों के अभिभावकों को सबसे ज्यादा भागीदारी दी जाएगी। इसका उद्देश्य स्कूलों की व्यवस्था, विद्यार्थियों की पढ़ाई और अन्य जरूरी कार्यों में अभिभावकों की सीधी भूमिका बढ़ाना है।
शिक्षा से जुड़े फैसलों में जब अभिभावक भी शामिल होते हैं तो स्कूल और परिवार के बीच बेहतर तालमेल बनता है। इसी सोच के साथ उत्तर प्रदेश के सभी राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में इस शैक्षणिक सत्र से विद्यालय प्रबंध समिति बनाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। समिति में कुल सदस्यों का 75 प्रतिशत हिस्सा विद्यार्थियों के माता-पिता या संरक्षकों का होगा।
स्कूलों के विकास में अभिभावकों की बढ़ेगी भूमिका
विद्यालय प्रबंध समिति का मुख्य काम स्कूल की जरूरतों को समझना और उनके समाधान के लिए बेहतर प्रयास करना होगा। अभिभावक अब केवल बच्चों की पढ़ाई तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि विद्यालय के विकास, विद्यार्थियों की उपस्थिति और शिक्षा की गुणवत्ता से जुड़े विषयों पर भी अपनी राय रख सकेंगे।
शिक्षा मंत्रालय की ओर से निर्देश दिए गए थे कि शैक्षणिक सत्र शुरू होने के एक महीने के अंदर एसएमसी का गठन कर लिया जाए। हालांकि अभी तक कई विद्यालयों में यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई थी। अब एक जुलाई से राजकीय माध्यमिक विद्यालय खुलने के बाद समिति गठन का काम तेजी से पूरा किया जाएगा।
विद्यालय प्रबंध समिति के गठन के लिए विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर सदस्यों की संख्या तय की जाएगी। जिन स्कूलों में 100 तक विद्यार्थी होंगे, वहां 15 सदस्यीय समिति बनाई जाएगी। 101 से 500 विद्यार्थियों वाले विद्यालयों में 20 सदस्य होंगे, जबकि 500 से अधिक विद्यार्थियों वाले स्कूलों में 25 सदस्यीय समिति का गठन किया जाएगा।
महिलाओं को भी मिलेगा विशेष प्रतिनिधित्व
नई व्यवस्था के तहत समिति में महिलाओं की भागीदारी को भी प्राथमिकता दी गई है। कुल सदस्यों में कम से कम 50 प्रतिशत सदस्य महिलाएं होंगी। समिति का अध्यक्ष किसी अभिभावक को बनाया जाएगा, जिससे अभिभावकों की भागीदारी और मजबूत होगी। समिति का कार्यकाल दो साल का रखा गया है।
अभिभावकों के अलावा समिति में स्थानीय निकाय के प्रतिनिधि, शिक्षाविद, विषय विशेषज्ञ, विद्यालय के पूर्व विद्यार्थी और वंचित वर्ग के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा। कुल सदस्यों में इनकी हिस्सेदारी 25 प्रतिशत होगी। इससे समिति में अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों की राय भी शामिल हो सकेगी।
विद्यालय प्रबंध समिति के अंतर्गत भवन निर्माण उप समिति और शैक्षणिक उप समिति का भी गठन किया जाएगा। इन समितियों में भी अभिभावकों को शामिल किया जाएगा ताकि स्कूल से जुड़े निर्माण कार्यों और पढ़ाई की गुणवत्ता पर बेहतर निगरानी हो सके।
विद्यार्थियों की पढ़ाई और स्कूल व्यवस्था में आएगा सुधार
अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी से स्कूलों में कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। बच्चों की नियमित उपस्थिति, पढ़ाई का स्तर, स्कूल की सुविधाएं और विद्यार्थियों की समस्याओं पर समय रहते ध्यान दिया जा सकेगा।
कई बार अभिभावक बच्चों की समस्याओं को बेहतर तरीके से समझते हैं। जब उन्हें स्कूल की व्यवस्था से जुड़ने का अवसर मिलेगा तो शिक्षक, अभिभावक और विद्यार्थी के बीच संवाद और मजबूत होगा। इससे शिक्षा का माहौल बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
उत्तर प्रदेश में विद्यालय प्रबंध समिति का गठन सरकारी स्कूलों की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि समिति सही तरीके से काम करती है तो इसका सीधा लाभ विद्यार्थियों को मिलेगा और सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता को नई मजबूती मिल सकती है।
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