यूपी के प्राइमरी स्कूल शिक्षकों के लिए बड़ा मौका, हर ब्लॉक में चुने जाएंगे 6 एआरपी, मिलेगा ₹4500 यात्रा भत्ता

यूपी के प्राइमरी स्कूल शिक्षकों के लिए बड़ा मौका, हर ब्लॉक में चुने जाएंगे 6 एआरपी, मिलेगा ₹4500 यात्रा भत्ता

उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर सामने आया है। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शैक्षिक गुणवत्ता को बेहतर बनाने के उद्देश्य से अकादमिक रिसोर्स पर्सन (एआरपी) के पदों पर शिक्षकों का चयन किया जाएगा। इस व्यवस्था के तहत प्रदेश के हर ब्लॉक में छह-छह एआरपी नियुक्त किए जाएंगे। कुल मिलाकर पूरे उत्तर प्रदेश में 4956 एआरपी की जिम्मेदारी तय की जाएगी।

 

एआरपी का मुख्य कार्य अपने क्षेत्र के परिषदीय विद्यालयों में पढ़ाई की गुणवत्ता को सुधारने में सहयोग करना होगा। ये शिक्षक अपने अनुभव और शैक्षणिक समझ के आधार पर दूसरे शिक्षकों को बेहतर शिक्षण कार्य में मदद करेंगे। इसके अलावा विद्यालयों में चल रही शैक्षणिक गतिविधियों की निगरानी, पाठ्यक्रम की प्रगति और योजनाओं के प्रभावी संचालन में भी इनकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

पांच साल की सेवा पूरी करने वाले शिक्षक कर सकेंगे आवेदन

उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक एआरपी चयन प्रक्रिया के लिए ऐसे शिक्षक आवेदन कर सकेंगे, जिन्होंने अपनी सेवा के कम से कम पांच वर्ष पूरे कर लिए हैं। इसके साथ ही ऐसे शिक्षक जिनकी सेवानिवृत्ति में न्यूनतम पांच वर्ष का समय बाकी है, वे भी आवेदन के पात्र होंगे।

एआरपी पद पर चयन शुरुआत में एक वर्ष के लिए किया जाएगा। इसके बाद शिक्षक के कार्य प्रदर्शन को देखते हुए उनकी सेवा अवधि को तीन वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। हालांकि, जो शिक्षक पहले ही तीन वर्ष तक एआरपी के रूप में कार्य कर चुके हैं, उन्हें दोबारा आवेदन करने का मौका नहीं मिलेगा।

परीक्षा और साक्षात्कार के आधार पर होगा चयन

एआरपी चयन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए परीक्षा और साक्षात्कार का प्रावधान रखा गया है। आवेदन करने वाले शिक्षकों का कुल 100 अंकों के आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा। इसमें 70 अंक लिखित परीक्षा के होंगे, जबकि 30 अंक साक्षात्कार के लिए निर्धारित किए जाएंगे।

चयनित एआरपी अपने ब्लॉक के लगभग 30 यूनिक विद्यालयों का भ्रमण करेंगे। वे विद्यालयों में शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार पढ़ाई पूरी होने की स्थिति, बच्चों की सीखने की क्षमता और शिक्षण व्यवस्था की समीक्षा करेंगे। इसके साथ ही शिक्षकों को आवश्यक शैक्षणिक सहयोग भी उपलब्ध कराएंगे।

एआरपी को अपनी मासिक कार्ययोजना के अनुसार रिपोर्ट तैयार करनी होगी और हर महीने की पांच तारीख तक इसे जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में भेजना होगा। इससे विद्यालयों में हो रहे शैक्षणिक कार्यों की नियमित समीक्षा हो सकेगी।

एआरपी को मिलेगा यात्रा भत्ता और टीएलएम ग्रांट

चयनित एआरपी और एसआरजी को हर महीने 4500 रुपये यात्रा भत्ता दिया जाएगा। वहीं डायट मेंटर को 2000 रुपये प्रति माह यात्रा भत्ता मिलेगा। इसके अलावा शिक्षण सामग्री को बेहतर बनाने के लिए 500 रुपये प्रतिमाह टीएलएम ग्रांट का प्रावधान भी रखा गया है।

एआरपी चयन के लिए प्रत्येक जिले में एक पांच सदस्यीय कमेटी बनाई जाएगी। इस कमेटी की अध्यक्षता मुख्य विकास अधिकारी करेंगे। इसमें डायट प्राचार्य, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी और वरिष्ठतम खंड शिक्षा अधिकारी सदस्य होंगे। वहीं जिला समन्वयक (प्रशिक्षण) सदस्य सचिव की भूमिका निभाएंगे।

निपुण तालिका से बच्चों की पढ़ाई का होगा आकलन

उत्तर प्रदेश के सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों की सीखने की क्षमता को मजबूत करने के लिए निपुण तालिका तैयार करना भी जरूरी किया गया है। निपुण भारत मिशन के तहत कक्षा एक से तीन तक के विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति का नियमित मूल्यांकन किया जाएगा।

इस तालिका में बच्चों की पढ़ने, लिखने, समझने और गणितीय क्षमताओं की जानकारी दर्ज की जाएगी। इससे शिक्षकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि कौन से बच्चे निर्धारित स्तर तक पहुंच चुके हैं और किन विद्यार्थियों को अतिरिक्त सहायता की जरूरत है।

निपुण तालिका का लाभ अभिभावकों को भी मिलेगा, क्योंकि वे अपने बच्चों की वास्तविक पढ़ाई की स्थिति को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे। इससे शिक्षक, अभिभावक और विद्यालय मिलकर बच्चों की शिक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में काम कर सकेंगे।

शिक्षा व्यवस्था सुधारने में अहम भूमिका निभाएंगे एआरपी

यूपी प्राइमरी स्कूल शिक्षक एआरपी चयन 2026 की यह प्रक्रिया शिक्षकों के लिए एक नई जिम्मेदारी और अवसर लेकर आई है। अनुभवी शिक्षक यदि इस भूमिका में आते हैं तो वे अपने अनुभव से विद्यालयों में पढ़ाई के स्तर को बेहतर बनाने में योगदान दे सकते हैं।

शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए केवल संसाधन ही नहीं, बल्कि सही मार्गदर्शन और सहयोग भी जरूरी होता है। एआरपी व्यवस्था इसी दिशा में एक कदम है, जिससे सरकारी स्कूलों में बच्चों की सीखने की क्षमता बढ़ाने और शिक्षकों को बेहतर सहयोग देने में मदद मिल सकती है।

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