जनगणना कर्मियों का इंतजार खत्म! ₹25,000 मानदेय भुगतान को लेकर आया नया अपडेट
जनगणना कार्य में लगे प्रगणकों (Enumerators) और पर्यवेक्षकों (Supervisors) के लिए मानदेय भुगतान को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है। जनगणना ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों को उनके द्वारा किए गए कार्य के चरण पूरे होने के बाद मानदेय का भुगतान किया जाता है। इसमें मकान सूचीकरण और जनसंख्या गणना दोनों चरण शामिल होते हैं।
जनगणना कार्य काफी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी वाला काम होता है। इसमें कर्मचारियों को घर-घर जाकर जानकारी जुटानी होती है और तय प्रक्रिया के अनुसार आंकड़े तैयार करने होते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में लगे कर्मचारियों को उनके कार्य के बदले मानदेय दिया जाता है।
दो चरणों में मिलेगा ₹25,000 का मानदेय
जनगणना कर्मियों को मिलने वाला कुल मानदेय ₹25,000 तक होता है। यह भुगतान दो अलग-अलग चरणों में किया जाता है।
पहले चरण में मकान सूचीकरण और उससे जुड़े कार्य पूरे करने के बाद ₹9,000 का भुगतान किया जाता है। इसके बाद दूसरे चरण यानी जनसंख्या गणना का कार्य सफलतापूर्वक पूरा होने पर ₹16,000 का भुगतान किया जाता है।
इस तरह दोनों चरण पूरे होने के बाद प्रगणक और पर्यवेक्षक को कुल ₹25,000 का मानदेय प्राप्त होता है।
सत्यापन के बाद तय होती है भुगतान प्रक्रिया
मानदेय भुगतान की प्रक्रिया कार्य पूरा होने और उसके सत्यापन के बाद आगे बढ़ती है। केंद्र स्तर से राज्यों को बजट उपलब्ध कराया जाता है, लेकिन कर्मचारियों को भुगतान की अंतिम प्रक्रिया संबंधित जिले के चार्ज अधिकारी और जिला सांख्यिकी कार्यालय द्वारा कार्य की जांच के बाद पूरी की जाती है।
कर्मचारियों को भुगतान मिलने की तारीख हर जिले में कार्य की प्रगति और सत्यापन प्रक्रिया के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। इसलिए सभी कर्मचारियों को अपने संबंधित कार्यालय से जानकारी प्राप्त करनी होगी।
प्रशिक्षण भत्ते का भी प्रावधान
जनगणना कार्य से पहले कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण अवधि के दौरान प्रतिदिन के हिसाब से भत्ता भी दिया जाता है। यह राशि लगभग ₹600 प्रतिदिन के आसपास बताई जाती है।
जनगणना ड्यूटी में लगे कर्मचारियों के लिए यह भुगतान उनके अतिरिक्त कार्य और जिम्मेदारी को देखते हुए दिया जाता है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि कार्य पूरा होने के बाद भुगतान प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी, जिससे उन्हें समय पर मानदेय मिल सके।