5 KG सिलेंडर ₹813 और 14 KG सिर्फ ₹913! आखिर गैस कंपनियों का ये कैसा खेल?
देशभर में लगातार बढ़ती महंगाई के बीच अब एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों ने आम लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। खासतौर पर 5 किलो वाले छोटू सिलेंडर की कीमत ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर कम गैस होने के बावजूद इसकी कीमत इतनी ज्यादा क्यों है।
हाल ही में तेल कंपनियों ने गैस सिलेंडरों के दामों में बड़ा बदलाव किया है। कमर्शियल सिलेंडर के साथ-साथ 5 किलो वाले छोटू सिलेंडर की कीमतों में भी भारी बढ़ोतरी देखने को मिली है। इसके बाद लोगों के मन में यह सवाल उठने लगा है कि आखिर गैस सिलेंडर की कीमतें किस आधार पर तय की जाती हैं।
5 किलो वाले छोटू सिलेंडर की कीमत में बड़ा इजाफा
1 मई को तेल कंपनियों ने 5 किलो वाले FTL गैस सिलेंडर की कीमत में करीब ₹261 की बढ़ोतरी कर दी। इसके बाद इसकी कीमत लगभग ₹552 से बढ़कर ₹813 तक पहुंच गई।
वहीं दूसरी ओर 14.2 किलो वाला घरेलू एलपीजी सिलेंडर दिल्ली में करीब ₹913 के आसपास बना हुआ है। यानी तीन गुना ज्यादा गैस मिलने के बावजूद घरेलू सिलेंडर सिर्फ लगभग ₹100 महंगा है।
वजन कम लेकिन कीमत लगभग बराबर!
अगर दोनों सिलेंडरों की तुलना करें तो बड़ा अंतर साफ दिखाई देता है।
| सिलेंडर | गैस मात्रा | कीमत |
| छोटू सिलेंडर | 5 KG | ₹813 |
| घरेलू LPG सिलेंडर | 14.2 KG | ₹913 |
यानी घरेलू सिलेंडर में गैस करीब तीन गुना ज्यादा है, लेकिन कीमत में अंतर बहुत कम है।
प्रति किलो गैस का हिसाब चौंकाने वाला
अगर प्रति किलो गैस की कीमत निकाली जाए तो फर्क और ज्यादा साफ हो जाता है।
- 14.2 KG घरेलू सिलेंडर में प्रति किलो गैस की कीमत लगभग ₹63 बैठती है।
- जबकि 5 KG छोटू सिलेंडर में प्रति किलो गैस की कीमत करीब ₹163 तक पहुंच जाती है।
इस हिसाब से छोटू सिलेंडर सबसे महंगा साबित हो रहा है।
सबसे ज्यादा असर किन लोगों पर?
5 किलो वाला छोटू सिलेंडर मुख्य रूप से:
- छात्रों
- प्रवासी मजदूरों
- किराए के मकानों में रहने वालों
- छोटी दुकानों और चाय स्टॉल वालों
द्वारा इस्तेमाल किया जाता है। क्योंकि यह आसानी से उपलब्ध हो जाता है और इसे लेने के लिए कई बार ज्यादा दस्तावेजों की जरूरत नहीं पड़ती।
अब कीमत बढ़ने से सबसे ज्यादा बोझ इन्हीं लोगों पर पड़ने वाला है।
आखिर कैसे तय होते हैं गैस सिलेंडर के दाम?
भारत में एलपीजी गैस की कीमतें तेल कंपनियां कई अंतरराष्ट्रीय कारकों को ध्यान में रखकर तय करती हैं। इसमें मुख्य रूप से:
- कच्चे तेल (Crude Oil) की अंतरराष्ट्रीय कीमत
- डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति
- आयात लागत
- ट्रांसपोर्ट और वितरण खर्च
शामिल होते हैं।
तेल कंपनियां आमतौर पर “Import Parity Price (IPP)” फॉर्मूले के आधार पर गैस की कीमतें तय करती हैं। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ते हैं या रुपया कमजोर होता है, तब गैस सिलेंडर महंगे हो जाते हैं।