40 की उम्र से पहले शुरू करें ये प्लान, वरना रिटायरमेंट में हो सकती है बड़ी परेशानी!
आज के दौर में लोग बिजनेस, नौकरी, स्टॉक मार्केट और रोजाना के मुनाफे का हिसाब तो रखते हैं, लेकिन अपनी रिटायरमेंट प्लानिंग को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। जबकि विशेषज्ञों का मानना है कि रिटायरमेंट जीवन का अंत नहीं, बल्कि दूसरी पारी की शुरुआत होती है। ऐसे में समय रहते सही योजना बनाना बेहद जरूरी है।
एक अनुभवी चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा तैयार किए गए इस खास रिटायरमेंट फॉर्मूले में बताया गया है कि किस उम्र में निवेश शुरू करना चाहिए, कितना फंड तैयार करना चाहिए और किस तरह निवेश को अलग-अलग हिस्सों में बांटना चाहिए।
समय पर शुरुआत करना क्यों जरूरी?
विशेषज्ञों के अनुसार रिटायरमेंट प्लानिंग में सबसे बड़ा रोल “कंपाउंडिंग” निभाती है। यानी समय के साथ पैसा खुद पैसा बनाता है।
30 से 35 साल की उम्र
यह वह समय माना गया है जब व्यक्ति अपने करियर में स्थिर होने लगता है। इसी उम्र में रिटायरमेंट प्लानिंग की समझ विकसित करनी चाहिए और निवेश के विकल्पों को समझना शुरू कर देना चाहिए।
40 साल की उम्र है अंतिम सीमा
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी स्थिति में 40 साल की उम्र तक रिटायरमेंट निवेश शुरू हो जाना चाहिए। इसके बाद की देरी भविष्य की आर्थिक सुरक्षा पर असर डाल सकती है।
महंगाई का असर और 3X फॉर्मूला
आज यदि किसी परिवार का खर्च ₹50,000 प्रति माह है, तो आने वाले 20 वर्षों में यही खर्च बढ़कर लगभग ₹1.5 लाख तक पहुंच सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक औसतन 6 से 7 प्रतिशत महंगाई दर हर दशक में खर्चों को काफी बढ़ा देती है। इसी वजह से “3X फॉर्मूला” को अहम माना जा रहा है।
हालांकि रिटायरमेंट के बाद कुछ खर्च कम भी हो जाते हैं, जैसे:
- बच्चों की स्कूल फीस
- होम लोन EMI
- रोजाना ऑफिस आने-जाने का खर्च
ऐसे में सही प्लानिंग के साथ तैयार किया गया फंड आरामदायक जीवन देने में मदद कर सकता है।
रिटायरमेंट फंड का 40-20-20-20 फॉर्मूला
विशेषज्ञों ने रिटायरमेंट निवेश को चार हिस्सों में बांटने की सलाह दी है।
| निवेश का माध्यम | प्रतिशत |
| Equity / Mutual Fund | 40% |
| PPF | 20% |
| NPS | 20% |
| Insurance | 20% |
Equity में 40% निवेश क्यों जरूरी?
यह पोर्टफोलियो का सबसे मजबूत हिस्सा माना जाता है। शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड लंबे समय में वेल्थ बनाने और महंगाई को मात देने में मदद करते हैं।
PPF देगा सुरक्षा और स्थिरता
PPF को सुरक्षित और टैक्स फ्री निवेश माना जाता है। बाजार में उतार-चढ़ाव के समय यह निवेश आर्थिक मजबूती देता है।
NPS से मिलेगी नियमित पेंशन
NPS यानी नेशनल पेंशन सिस्टम बुढ़ापे में नियमित आय सुनिश्चित करने का एक अनुशासित माध्यम माना जाता है।
Insurance को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
विशेषज्ञों के मुताबिक मजबूत हेल्थ और टर्म इंश्योरेंस बेहद जरूरी है, ताकि किसी बीमारी या मेडिकल इमरजेंसी में रिटायरमेंट फंड प्रभावित न हो।
रिटायरमेंट फंड को दूसरे काम में न लगाएं
विशेषज्ञों ने साफ सलाह दी है कि रिटायरमेंट के लिए जमा किए गए पैसों को बच्चों की पढ़ाई, शादी या अन्य खर्चों में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
इन जरूरतों के लिए अलग से Real Estate, Gold या अन्य निवेश विकल्पों में योजना बनाना बेहतर माना जाता है।
रिटायरमेंट के बाद कैसे करें पैसों का इस्तेमाल?
60 साल की उम्र के बाद निवेश को सही तरीके से इस्तेमाल करना भी उतना ही जरूरी है।
फंड कंसोलिडेशन
सभी रिटायरमेंट निवेश को एक जगह व्यवस्थित करना चाहिए।
NPS पेंशन
NPS से मिलने वाली नियमित पेंशन रोजमर्रा के खर्चों में मदद करती है।
SWP का इस्तेमाल
बाकी फंड को SWP (Systematic Withdrawal Plan) में डालकर हर महीने नियमित आय प्राप्त की जा सकती है। इससे मूल निवेश सुरक्षित रखने में भी मदद मिलती है।