भीषण गर्मी के बीच खुले परिषदीय विद्यालय, सुविधाओं की कमी पर उठे सवाल

भीषण गर्मी के बीच खुले परिषदीय विद्यालय, सुविधाओं की कमी पर उठे सवाल

लखनऊ, 16 जून 2026। उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी और 45 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान के बीच परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के खुलने के बाद शिक्षकों, अभिभावकों और शिक्षा जगत में चिंता बढ़ गई है। सोमवार से विद्यालयों का संचालन शुरू हुआ, लेकिन कई जगहों पर गर्मी और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

जहां कई राज्यों में अभी भी गर्मी की छुट्टियां चल रही हैं और निजी विद्यालय भीषण तापमान को देखते हुए बंद हैं, वहीं सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छोटे बच्चों को गर्मी के बीच विद्यालय पहुंचना पड़ रहा है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए परिस्थितियों पर विचार किया जाना चाहिए।

बिजली-पानी और बैठने की व्यवस्था को लेकर चिंता

 

ग्रामीण क्षेत्रों के कई परिषदीय विद्यालयों में आज भी पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। कई स्कूलों में बिजली की समस्या, खराब पंखे, पेयजल की कमी और बैठने की उचित व्यवस्था नहीं होने की शिकायतें सामने आती रहती हैं।

कई जगहों पर बच्चे बेंच-डेस्क के अभाव में फर्श पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। ऐसे में तेज गर्मी के दौरान गर्म फर्श पर बैठकर पढ़ना छोटे बच्चों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।

डिजिटल शिक्षा और स्मार्ट क्लास जैसी योजनाओं के बीच कई प्राथमिक विद्यालयों की जमीनी स्थिति अलग दिखाई देती है। विद्यालयों में जरूरी संसाधनों की कमी को लेकर शिक्षक और अभिभावक लगातार अपनी चिंताएं व्यक्त कर रहे हैं।

अभिभावक और शिक्षक दोनों परेशान

अभिभावकों का कहना है कि जब तापमान इतना अधिक है तो बच्चों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उनका कहना है कि पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध होने के बाद ही नियमित पढ़ाई का माहौल बेहतर बनाया जा सकता है।

 

वहीं शिक्षकों का भी मानना है कि अत्यधिक गर्मी में छोटे बच्चों के साथ विद्यालय संचालन आसान नहीं है। कई शिक्षक भीषण गर्मी में बच्चों की सुरक्षा और उनकी उपस्थिति को लेकर चिंतित हैं।

 

इसके अलावा शिक्षकों की जनगणना ड्यूटी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। कई शिक्षक अन्य सरकारी कार्यों में लगे हुए हैं, जिससे विद्यालयों में नियमित शैक्षणिक गतिविधियों पर प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

 

बच्चों के स्वास्थ्य पर बढ़ा खतरा

 

विशेषज्ञों के अनुसार, ज्यादा तापमान में छोटे बच्चों को लंबे समय तक गर्म वातावरण में रहने से लू, डिहाइड्रेशन और गर्मी से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। बच्चों के लिए पर्याप्त पानी, पंखे और ठंडे वातावरण की व्यवस्था जरूरी मानी जाती है।

 

शिक्षक संगठनों और अभिभावकों की मांग है कि विद्यालयों में बिजली, पानी, पंखे और बैठने जैसी मूलभूत सुविधाओं को पहले मजबूत किया जाए। उनका कहना है कि पढ़ाई के साथ बच्चों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

भीषण गर्मी के बीच विद्यालय संचालन को लेकर उठ रहे सवालों के बाद अब शिक्षा जगत में चर्चा तेज हो गई है कि बच्चों के हित को ध्यान में रखते हुए परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लिया जाना चाहिए।

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