मुख्यालय का मोह छोड़ मूल तैनाती स्थल पर लौटें शिक्षक-कर्मचारी, आदेश न मानने पर रुकेगा वेतन
शिक्षा विभाग में लंबे समय से चल रही अटैचमेंट व्यवस्था को लेकर अब सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। कई जिलों में ऐसे शिक्षक और कर्मचारी हैं जो वर्षों से अपने मूल विद्यालय या कार्यालय में कार्य करने के बजाय जिला मुख्यालय या शिक्षा अधिकारी कार्यालयों में संबद्ध होकर सेवाएं दे रहे हैं। इससे एक ओर जहां दूरस्थ क्षेत्रों के स्कूलों में शिक्षकों की कमी बनी रहती है, वहीं दूसरी ओर विद्यार्थियों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है। अब विभाग ने इस व्यवस्था को समाप्त करने का फैसला किया है और सभी संबद्ध शिक्षकों एवं कर्मचारियों को उनके मूल तैनाती स्थल पर वापस भेजने की प्रक्रिया तेज कर दी है।
चमोली जिले में इस दिशा में कार्रवाई शुरू हो चुकी है। मुख्य शिक्षा अधिकारी आकाश सारस्वत ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि माध्यमिक और बेसिक शिक्षा विभाग में चल रहे सभी अटैचमेंट तत्काल प्रभाव से समाप्त किए जाएं। संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सभी शिक्षक और कर्मचारी अपने मूल विद्यालयों तथा कार्यालयों में जाकर कार्यभार ग्रहण करें। विभाग का कहना है कि सरकारी व्यवस्था को प्रभावी बनाने और विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था मजबूत करने के लिए यह कदम बेहद जरूरी है।
शिक्षा विभाग के अनुसार वर्षों से कई कर्मचारी जिला मुख्यालय और शिक्षा अधिकारी कार्यालयों में कार्यरत हैं, जबकि उनकी वास्तविक नियुक्ति किसी अन्य विद्यालय या कार्यालय में है। इस कारण कई स्कूलों में शिक्षकों की संख्या कम हो गई है और छात्रों को नियमित पढ़ाई का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है, जहां पहले से ही संसाधनों की कमी रहती है। ऐसे में यदि नियुक्त शिक्षक भी अपने मूल विद्यालय में उपस्थित नहीं रहते तो शिक्षा व्यवस्था पर सीधा असर पड़ता है।
मुख्य शिक्षा अधिकारी ने साफ शब्दों में कहा है कि जारी आदेशों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। सभी संबंधित कर्मचारियों और शिक्षकों को निर्धारित समय के भीतर अपने मूल तैनाती स्थल पर पहुंचकर कार्यभार ग्रहण करना होगा। यदि कोई कर्मचारी या शिक्षक ऐसा नहीं करता है तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। इतना ही नहीं, आवश्यकता पड़ने पर उसका वेतन भी रोका जा सकता है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि आदेशों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए लगातार निगरानी की जाएगी।
इस पूरे मामले की समीक्षा 25 जुलाई को की जाएगी। समीक्षा बैठक में यह देखा जाएगा कि कितने कर्मचारियों और शिक्षकों ने अपने मूल विद्यालय या कार्यालय में कार्यभार ग्रहण किया है और कितने अब भी पुराने स्थान पर कार्य कर रहे हैं। यदि समीक्षा में यह पाया गया कि किसी कर्मचारी ने आदेशों का पालन नहीं किया है तो उसके खिलाफ नियमों के अनुसार सख्त कदम उठाए जाएंगे। विभाग का उद्देश्य केवल आदेश जारी करना नहीं बल्कि उन्हें पूरी तरह लागू कराना भी है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार कई कर्मचारियों ने पहले ही आदेशों का पालन करते हुए अपने मूल तैनाती स्थल पर कार्यभार संभाल लिया है। इससे यह संदेश भी गया है कि विभाग इस बार अपने निर्णय को गंभीरता से लागू करने के पक्ष में है। मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के रूप में कार्यरत संतन रावत अपने मूल तैनाती स्थल जीआईसी बूरा पहुंच चुके हैं। इसी प्रकार प्रधान सहायक जितेंद्र बिष्ट को कार्यमुक्त कर जीआईसी सितेल भेजा गया, जबकि प्रधान सहायक रोशन गुसांई ने भी जीजीआईसी थराली में अपना कार्यभार ग्रहण कर लिया है। इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि विभागीय आदेशों का पालन करने वाले कर्मचारियों की संख्या बढ़ रही है।
हालांकि विभाग को अभी भी ऐसी जानकारी मिल रही है कि कुछ शिक्षक और कर्मचारी अटैचमेंट के आधार पर माध्यमिक और बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालयों में कार्य कर रहे हैं। ऐसे मामलों पर विशेष नजर रखी जा रही है। संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट तैयार करें और यदि कोई कर्मचारी आदेशों का उल्लंघन करता पाया जाए तो उसकी जानकारी तत्काल उच्च अधिकारियों को उपलब्ध कराई जाए। इसके बाद आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
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विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सभी शिक्षक और कर्मचारी अपने मूल विद्यालयों में नियमित रूप से कार्य करेंगे तो इसका सबसे बड़ा लाभ विद्यार्थियों को मिलेगा। ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ेगी, पढ़ाई नियमित होगी और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार देखने को मिलेगा। लंबे समय से खाली पड़े पदों जैसी स्थिति भी काफी हद तक कम हो सकेगी। इससे सरकारी विद्यालयों पर लोगों का भरोसा भी मजबूत होगा।
शिक्षा विभाग की यह पहल केवल प्रशासनिक व्यवस्था सुधारने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य पूरे शिक्षा तंत्र को अधिक पारदर्शी और जिम्मेदार बनाना भी है। जब प्रत्येक कर्मचारी अपनी निर्धारित जिम्मेदारी वाले स्थान पर कार्य करेगा, तभी विभाग की योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू हो सकेंगी। साथ ही सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग भी सुनिश्चित होगा।
अंततः कहा जा सकता है कि मुख्यालय में वर्षों से चल रही अटैचमेंट व्यवस्था को समाप्त करने का यह फैसला शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि सभी शिक्षक और कर्मचारी समय पर अपने मूल तैनाती स्थल पर पहुंचकर जिम्मेदारी निभाते हैं तो इसका सीधा लाभ विद्यार्थियों, विद्यालयों और पूरे शिक्षा तंत्र को मिलेगा। वहीं जो कर्मचारी आदेशों की अनदेखी करेंगे, उनके खिलाफ विभाग द्वारा तय नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। आने वाले दिनों में 25 जुलाई की समीक्षा बैठक यह स्पष्ट कर देगी कि इस अभियान का कितना प्रभाव पड़ा और विभाग अपने उद्देश्य को किस हद तक पूरा कर पाया।