नए नामांकन में लापरवाही, 56 प्रधानाध्यापकों का वेतन रुका, शिक्षा विभाग की बड़ी कार्रवाई
स्कूल चलो अभियान के तहत नए नामांकन को लेकर अपेक्षित प्रगति नहीं मिलने पर शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। जिले में ऐसे 56 विद्यालय चिन्हित किए गए हैं जहां नए छात्रों के नामांकन की संख्या बेहद कम रही। इसके बाद संबंधित प्रधानाध्यापकों और प्रभारी प्रधानाध्यापकों का जुलाई 2026 का वेतन अगले आदेश तक रोकने का निर्णय लिया गया है। यह कार्रवाई जिलाधिकारी के निर्देश पर की गई है।
बुधवार को प्रेरणा पोर्टल पर स्कूलों के नए नामांकन की समीक्षा की गई। समीक्षा में सामने आया कि 56 विद्यालय ऐसे हैं जहां केवल 1 से 5 नए छात्र-छात्राओं का ही नामांकन हुआ है। विभाग ने इसे स्कूल चलो अभियान के लक्ष्य के अनुरूप बेहद कमजोर प्रदर्शन माना। अधिकारियों का कहना है कि प्रत्येक पात्र बच्चे को स्कूल तक पहुंचाना अभियान का मुख्य उद्देश्य है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने बताया कि शासन की प्राथमिकता के अनुसार सभी प्रधानाध्यापकों की जिम्मेदारी है कि वे अपने विद्यालय क्षेत्र के अधिक से अधिक बच्चों का नामांकन सुनिश्चित करें। यदि किसी विद्यालय में लक्ष्य के अनुरूप नामांकन नहीं होता है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
लक्ष्य पूरा होने पर ही मिलेगा वेतन
जारी आदेश के अनुसार जिन 56 विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और प्रभारी प्रधानाध्यापकों का वेतन रोका गया है, उनका जुलाई 2026 का वेतन तब तक जारी नहीं होगा जब तक विद्यालय निर्धारित लक्ष्य के अनुसार नए नामांकन नहीं कर लेते। वेतन बहाली से पहले संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी की रिपोर्ट ली जाएगी। इसके बाद प्रेरणा पोर्टल पर दोबारा नामांकन की समीक्षा होगी। यदि प्रगति संतोषजनक पाई जाती है तो वेतन जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
विषय जानकारी
कार्रवाई 56 प्रधानाध्यापकों/प्रभारी प्रधानाध्यापकों का वेतन रोका गया
कारण नए नामांकन में बेहद कम प्रगति
समीक्षा प्रेरणा पोर्टल पर नामांकन की जांच
वेतन बहाली लक्ष्य पूरा होने और बीईओ की रिपोर्ट के बाद
अभियान स्कूल चलो अभियान
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि स्कूल चलो अभियान को सफल बनाने के लिए नियमित निगरानी जारी रहेगी। जिन विद्यालयों में नामांकन की स्थिति कमजोर मिलेगी, वहां आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। वहीं, बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यालयों के कार्यों की भी लगातार समीक्षा की जाएगी ताकि जिले में कोई भी पात्र बच्चा स्कूल से बाहर न रहे।