UP News: आठवें वेतन आयोग को लेकर शिक्षक और बिजली कर्मियों में नाराजगी, जानें क्यों उठ रहे सवाल

UP News: आठवें वेतन आयोग को लेकर शिक्षक और बिजली कर्मियों में नाराजगी, जानें क्यों उठ रहे सवाल

उत्तर प्रदेश में आठवें वेतन आयोग को लेकर राज्य कर्मचारियों, शिक्षकों और बिजली कर्मियों के संगठनों में नाराजगी बढ़ गई है। आयोग के दल के उत्तर प्रदेश दौरे के दौरान बातचीत के लिए इन संगठनों को आमंत्रित नहीं किए जाने पर विरोध जताया गया है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वेतन आयोग की सिफारिशों का सीधा असर राज्य के लाखों कर्मचारियों पर पड़ेगा, इसलिए उनका पक्ष भी सुना जाना जरूरी है।

ऑल इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन के अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे ने इसे भेदभावपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि आयोग अलग-अलग वर्गों के कर्मचारियों से चर्चा कर रहा है, लेकिन राज्य कर्मचारियों को अपनी बात रखने का मौका नहीं मिल रहा है। उनका कहना है कि वेतन आयोग की सिफारिशों का आर्थिक असर राज्यों पर भी पड़ता है, इसलिए राज्य कर्मियों की समस्याओं और मांगों को समझे बिना सही रिपोर्ट तैयार करना मुश्किल होगा।

संगठनों का कहना है कि उत्तर प्रदेश में पिछले कई वर्षों से वेतन पुनरीक्षण केंद्र के वेतन आयोगों की सिफारिशों के आधार पर होता रहा है। ऐसे में आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों से प्रदेश के शिक्षक, बिजली कर्मचारी और अन्य राज्य कर्मचारी भी प्रभावित होंगे। कर्मचारियों का मानना है कि उनकी मांगों, वेतन विसंगतियों और सेवा संबंधी मुद्दों को आयोग के सामने रखने का अवसर मिलना चाहिए।

 

दिल्ली जाकर आयोग के सामने रखेंगे पक्ष

कर्मचारी संगठनों ने फैसला लिया है कि वे आठवें वेतन आयोग के अध्यक्ष को संयुक्त ज्ञापन भेजेंगे। इसके साथ ही प्रतिनिधिमंडल दिल्ली जाकर अपनी मांगों और समस्याओं को आयोग के सामने रखने की तैयारी कर रहा है।

 

संगठनों ने आउटसोर्स और संविदा कर्मचारियों की स्थिति पर भी ध्यान देने की मांग की है। उनका कहना है कि वेतन व्यवस्था में सुधार करते समय सभी वर्गों के कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

फिलहाल आठवें वेतन आयोग को लेकर कर्मचारियों की नजर आगे होने वाली बैठकों और बातचीत पर है। संगठनों का कहना है कि यदि उन्हें अपनी बात रखने का मौका मिलता है तो वेतन से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे आयोग के सामने रखे जा सकेंगे।

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