यूपी परिषदीय स्कूल शिक्षकों के ट्रांसफर पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, प्रत्यावर्तन आदेशों पर लगी रोक

यूपी परिषदीय स्कूल शिक्षकों के ट्रांसफर पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, प्रत्यावर्तन आदेशों पर लगी रोक

उत्तर प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ से बड़ी खबर सामने आई है। शिक्षकों के तबादले के बाद उन्हें दोबारा पुराने विद्यालयों में भेजने यानी प्रत्यावर्तन के आदेशों पर कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। इस फैसले से उन प्राथमिक शिक्षकों को राहत मिली है, जो नई तैनाती वाले विद्यालयों में कई महीनों से काम कर रहे थे और अचानक उन्हें पुराने स्कूलों में वापस भेजने के आदेश जारी कर दिए गए थे।

 

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों के ट्रांसफर और तैनाती से जुड़े मामलों पर चर्चा तेज हो गई है। कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार और बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों से जवाब मांगा है। अब विभाग को तय समय के अंदर अपना पक्ष अदालत के सामने रखना होगा।

 

शिक्षकों के प्रत्यावर्तन आदेशों पर हाईकोर्ट की रोक

 

हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने गौतम बुद्ध नगर के अमित कुमार समेत 10 प्राथमिक शिक्षकों की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की अवकाशकालीन एकल पीठ ने शिक्षकों की याचिका पर सुनवाई की और प्रत्यावर्तन आदेशों पर अंतरिम रोक लगा दी।

 

याचिकाकर्ता शिक्षकों ने गौतम बुद्ध नगर के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी 25 अप्रैल और 16 मई के आदेशों को चुनौती दी थी। इन आदेशों के माध्यम से शिक्षकों को उनके पहले वाले विद्यालयों में वापस भेजने का निर्देश दिया गया था। शिक्षकों का कहना था कि तबादले की प्रक्रिया पूरी होने के बाद वे नई जगहों पर कार्य कर रहे हैं, ऐसे में उन्हें दोबारा पुराने स्कूलों में भेजना उचित नहीं है।

 

कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए राज्य सरकार और बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों को तीन सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद याचिकाकर्ता शिक्षकों को जवाब देने के लिए एक सप्ताह का समय दिया जाएगा।

 

तबादले के बाद नई जगह कर रहे थे शिक्षक काम

 

याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में बताया गया कि बेसिक शिक्षा विभाग ने 16 जून 2025 को सहायक शिक्षकों के अंतर्जनपदीय तबादले की नीति लागू की थी। इस नीति के तहत शिक्षकों को उनके पुराने विद्यालयों से कार्यमुक्त किया गया और नई तैनाती वाले स्कूलों में भेजा गया।

 

शिक्षकों का कहना है कि वे नई तैनाती वाली जगहों पर करीब दस महीने से अधिक समय से कार्य कर रहे हैं और उन्हें नियमित रूप से वेतन भी मिल रहा है। इसके बाद अचानक उन्हें पुराने विद्यालयों में वापस भेजने के आदेश जारी कर दिए गए, जिससे शिक्षकों के सामने असमंजस की स्थिति पैदा हो गई।

 

वहीं बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से अदालत में याचिका का विरोध किया गया। विभाग की ओर से अपने पक्ष में तर्क रखे गए, लेकिन कोर्ट ने फिलहाल प्रत्यावर्तन आदेशों पर रोक लगाते हुए मामले की आगे सुनवाई जारी रखने का फैसला किया है।

 

कोर्ट ने आदेशों की व्याख्या में गलती बताई

 

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा वर्ष 2025 के जुलाई और अगस्त में जारी किए गए दो आदेशों की व्याख्या करने में गलती दिखाई दे रही है। कोर्ट ने माना कि यह मामला विचार करने योग्य है, इसलिए इस पर विस्तार से सुनवाई जरूरी है।

 

अदालत ने इस याचिका को इसी तरह के एक अन्य मामले के साथ जोड़कर सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है। साथ ही अगले आदेश तक याचिकाकर्ता शिक्षकों के प्रत्यावर्तन आदेशों पर रोक जारी रहेगी।

 

इस फैसले के बाद उन शिक्षकों को राहत मिली है, जो ट्रांसफर के बाद नई जगह पर अपने कार्य को आगे बढ़ा रहे थे। हालांकि अंतिम फैसला आगे की सुनवाई और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर आएगा।

 

शिक्षकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला

 

उत्तर प्रदेश में शिक्षकों के तबादले और तैनाती से जुड़े मामले लंबे समय से चर्चा में रहते हैं। शिक्षकों के लिए विद्यालय बदलना केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं होती, बल्कि इससे उनकी दिनचर्या, परिवार और कार्य व्यवस्था भी प्रभावित होती है।

 

हाईकोर्ट के इस आदेश से फिलहाल प्रभावित शिक्षकों को राहत मिली है और उन्हें नई तैनाती वाले विद्यालयों में काम जारी रखने का अवसर मिलेगा। अब सभी की नजर आगे होने वाली सुनवाई पर है, जिसमें इस मामले पर अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।

 

कुल मिलाकर, यूपी परिषदीय स्कूल शिक्षकों के ट्रांसफर मामले में हाईकोर्ट का यह फैसला एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह आदेश शिक्षकों के अधिकार, विभागीय प्रक्रिया और तबादले के नियमों के बीच संतुलन को लेकर आने वाले समय में अहम भूमिका निभा सकता है।

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