कल का मौसम 1 जुलाई: कई राज्यों में झमाझम बारिश के आसार, तेज हवाओं और भारी वर्षा को लेकर अलर्ट
जुलाई की शुरुआत के साथ ही देश के कई हिस्सों में मॉनसून ने अपनी रफ्तार तेज कर दी है। बुधवार 1 जुलाई को देश के ज्यादातर राज्यों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मॉनसून कई क्षेत्रों में सक्रिय रहेगा, जिसके कारण कई राज्यों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ जगहों पर भारी वर्षा भी देखने को मिल सकती है। बारिश के इस दौर से जहां किसानों और आम लोगों को राहत मिलेगी, वहीं कुछ इलाकों में जलभराव और तेज हवाओं की परेशानी भी बढ़ सकती है।
मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक उत्तर-पश्चिम भारत में 1 जुलाई को बारिश का असर ज्यादा देखने को मिलेगा। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। पहाड़ी इलाकों में कुछ जगहों पर भारी बारिश भी हो सकती है। वहीं पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और पूर्वी उत्तर प्रदेश में गरज-चमक के साथ बारिश होने के आसार हैं। इन इलाकों में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं और बिजली गिरने की संभावना को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
बिहार, झारखंड और पूर्वी भारत में भारी बारिश की संभावना
पूर्वी और मध्य भारत में भी मॉनसून पूरी तरह सक्रिय बना हुआ है। बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में कई जगहों पर अच्छी बारिश होने का अनुमान है। बिहार और ओडिशा के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इसके अलावा उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम के कुछ इलाकों में भी तेज बारिश हो सकती है।
मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ में भी मौसम में बदलाव देखने को मिलेगा। यहां कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज-चमक की स्थिति बन सकती है। बारिश के दौरान बिजली गिरने और तेज हवाओं को लेकर लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। खासकर खुले स्थानों पर रहने वाले लोगों को मौसम खराब होने पर सुरक्षित जगहों पर जाने की सलाह दी गई है।
गुजरात, महाराष्ट्र और पश्चिमी राज्यों में भी बरसेंगे बादल
गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा और आसपास के क्षेत्रों में भी मॉनसून की गतिविधियां तेज रहने की संभावना है। गोवा और मध्य महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है। वहीं सौराष्ट्र-कच्छ और मराठवाड़ा क्षेत्रों में भी कई जगहों पर बारिश होने के आसार हैं। लगातार बारिश के कारण कुछ निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है, जिससे यातायात प्रभावित होने की संभावना रहती है।
पूर्वोत्तर भारत में भी बारिश का दौर जारी रहेगा। अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में मॉनसून सक्रिय रहेगा। असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में भारी बारिश की संभावना है। पहाड़ी और नदी किनारे रहने वाले लोगों को मौसम की जानकारी पर नजर रखने की सलाह दी गई है।
दक्षिण भारत में भी बारिश का असर जारी
दक्षिण भारत के राज्यों में भी मॉनसून अच्छी तरह सक्रिय है। केरल, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पुडुचेरी और लक्षद्वीप में कई जगहों पर बारिश होने का अनुमान है। तटीय कर्नाटक, केरल, तेलंगाना और तटीय आंध्र प्रदेश के कुछ इलाकों में भारी बारिश हो सकती है।
मौसम विभाग ने समुद्री इलाकों में रहने वाले लोगों और मछुआरों को सतर्क रहने की सलाह दी है। तेज हवाओं और खराब मौसम के दौरान समुद्र में जाने से बचने की अपील की गई है। इसके अलावा पहाड़ी क्षेत्रों और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को भी सावधानी बरतने की जरूरत है।
उत्तर प्रदेश में बढ़ी बारिश की गतिविधियां
उत्तर प्रदेश में भी दक्षिण-पश्चिम मॉनसून अब सक्रिय हो गया है। पिछले कुछ दिनों से प्रदेश के कई जिलों में बारिश का दौर जारी है। बरेली में सबसे अधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि अयोध्या, गोंडा, टांडा, पलियाकलां, मोहम्मदी, निगहासन और अन्य क्षेत्रों में भी अच्छी बारिश हुई है।
मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दो से तीन दिनों में उत्तर प्रदेश के बाकी हिस्सों में भी मॉनसून और मजबूत हो सकता है। इसके चलते कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश और कुछ स्थानों पर भारी वर्षा होने की संभावना है। किसानों के लिए यह बारिश खेती के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि धान समेत खरीफ फसलों के लिए पर्याप्त बारिश जरूरी होती है।
हालांकि जुलाई महीने के लिए देशभर में कुल बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान भी जताया गया है। लेकिन उत्तर-पश्चिम भारत, पूर्वी भारत और कुछ अन्य क्षेत्रों में सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना बनी हुई है।
अरुणाचल प्रदेश में बारिश और भूस्खलन से नुकसान
लगातार बारिश के कारण अरुणाचल प्रदेश के लोअर सियांग जिले में अचानक बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति पैदा हो गई। कई गांव प्रभावित हुए हैं और हजारों लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा है। नारी-कोयू क्षेत्र में कृषि भूमि, धान के खेत, निजी संपत्ति और सड़क संपर्क को नुकसान पहुंचा है।
कई गांवों का संपर्क टूटने के कारण लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बिजली, पानी और संचार सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। राहत और बचाव कार्य के लिए प्रशासन के साथ सेना, आईटीबीपी, बीआरओ और स्थानीय टीमें लगातार काम कर रही हैं। प्रभावित परिवारों को सहायता पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।