Teacher Eligibility Test: शिक्षकों को सीएम योगी से बड़ी राहत, सेवा सुरक्षा को लेकर सरकार ने दिए सकारात्मक संकेत
उत्तर प्रदेश के लाखों शिक्षकों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे समय से टीईटी (Teacher Eligibility Test) अनिवार्यता से प्रभावित शिक्षकों के भविष्य को लेकर बनी चिंता के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महत्वपूर्ण आश्वासन दिया है। शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई मुलाकात में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संकेत दिए कि सरकार शिक्षकों के अनुभव और योगदान का सम्मान करती है तथा उनकी सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने को लेकर गंभीर है। इस बयान के बाद प्रदेश के हजारों शिक्षकों में नई उम्मीद जगी है।
पिछले कुछ समय से टीईटी प्रभावित शिक्षकों का मुद्दा लगातार चर्चा में बना हुआ है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद कई ऐसे शिक्षक, जो वर्षों से परिषदीय विद्यालयों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, अपने भविष्य को लेकर चिंतित थे। शिक्षकों का कहना था कि उन्होंने लंबे समय तक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में योगदान दिया है और उनके अनुभव को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। इसी मांग को लेकर शिक्षक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की और अपनी बात विस्तार से रखी।
विधान परिषद सदस्य देवेंद्र प्रताप सिंह और राज बहादुर सिंह चंदेल के नेतृत्व में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विनय तिवारी तथा संयुक्त महामंत्री अमित सिंह ने मुख्यमंत्री आवास पर पहुंचकर विभिन्न शिक्षक हितों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। प्रतिनिधिमंडल ने सबसे पहले शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और मध्याह्न भोजन योजना से जुड़े रसोइयों को कैशलेस चिकित्सा योजना का लाभ देने के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। इसके बाद टीईटी प्रभावित शिक्षकों के मामले को प्रमुखता से उठाया गया।
शिक्षक नेताओं ने मुख्यमंत्री को बताया कि कई शिक्षक वर्षों से विद्यालयों में कार्यरत हैं और उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे में उनकी सेवाओं को सुरक्षित रखने के लिए विशेष व्यवस्था की आवश्यकता है। प्रतिनिधिमंडल ने सुझाव दिया कि इन शिक्षकों को उनकी सेवा अवधि और अनुभव के आधार पर वेटेज दिया जाए। साथ ही उनके लिए विशेष विभागीय टीईटी परीक्षा आयोजित की जाए, ताकि उनकी नौकरी पर कोई संकट न आए और वे सम्मानपूर्वक अपनी सेवाएं जारी रख सकें।
प्रतिनिधिमंडल के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस विषय को गंभीरता से सुना और सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी बताया कि शिक्षकों के लंबे अनुभव और योगदान को ध्यान में रखते हुए ही सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के एक सितंबर 2025 के आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी। इससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि सरकार इस मुद्दे को केवल कानूनी दृष्टिकोण से नहीं बल्कि मानवीय और व्यावहारिक दृष्टि से भी देख रही है।
बैठक में वर्ष 2000 के बाद अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों में नियुक्त तदर्थ शिक्षकों का विषय भी उठाया गया। शिक्षक प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने अपने एक अंतरिम आदेश में स्पष्ट किया था कि इन शिक्षकों को व्यवस्था से बाहर करने की मंशा नहीं है। इसके साथ ही 9 नवंबर 2023 के शासनादेश में आवश्यक संशोधन करने या उसे निरस्त कर राजकोष से वेतन प्राप्त कर रहे तदर्थ शिक्षकों को उनके वर्तमान पदों पर समायोजित करने का सुझाव भी दिया गया।
इस पूरे घटनाक्रम ने शिक्षा जगत में नई चर्चा शुरू कर दी है। शिक्षक संगठनों का मानना है कि यदि सरकार सकारात्मक पहल करती है तो हजारों शिक्षकों को बड़ी राहत मिल सकती है। लंबे समय से अनिश्चितता का सामना कर रहे शिक्षकों के लिए यह आश्वासन मनोबल बढ़ाने वाला साबित हो सकता है। शिक्षा व्यवस्था की मजबूती के लिए अनुभवी शिक्षकों का योगदान हमेशा महत्वपूर्ण माना जाता रहा है और सरकार के हालिया रुख से यही संदेश सामने आता है।
एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने भी मुख्यमंत्री के साथ हुई वार्ता को बेहद सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को किसी भी प्रकार के भ्रम में पड़ने की आवश्यकता नहीं है। सरकार पूरे मामले पर गंभीरता से विचार कर रही है और ऐसा समाधान निकालने का प्रयास कर रही है जिससे शिक्षकों के अनुभव, सम्मान और भविष्य तीनों की रक्षा हो सके।
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