शिक्षामित्रों एवं अनुदेशकों का नाम हर नेता, मंत्री की जुबान पर आया! हो गए एक तो मिल सकती है एक और खुशखबरी
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उत्तर प्रदेश में शिक्षामित्रों और अनुदेशकों की समस्याओं को लेकर एक बार फिर आवाज तेज होती दिखाई दे रही है। एक विशेष कार्यक्रम के दौरान वक्ता ने कहा कि अब शिक्षामित्र और अनुदेशकों का मुद्दा हर नेता और मंत्री की जुबान पर है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में लाखों परिवार और करोड़ों वोट इस वर्ग से जुड़े हुए हैं, इसलिए सरकार भी अब इनकी समस्याओं को नजरअंदाज नहीं कर सकती।
कार्यक्रम में “समान काम, समान वेतन”, नियमितीकरण, 12 माह वेतन और 62 वर्ष सेवा अवधि जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। वक्ता ने कहा कि अगर शिक्षामित्र और अनुदेशक एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करें तो आने वाले समय में बड़ी सौगात मिल सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार जब चाहे तब बड़ा फैसला ले सकती है, लेकिन इसके लिए लगातार संघर्ष और एकता जरूरी है।
इस दौरान अमेठी के जितेंद्र कुमार गुप्ता नामक अनुदेशक की ओर से भेजे गए धन्यवाद पत्र का भी उल्लेख किया गया। पत्र में चैनल द्वारा अनुदेशकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाने और मानदेय बढ़ाने की मांग को मजबूत तरीके से रखने के लिए आभार जताया गया। पत्र में कहा गया कि लगातार आवाज उठाने का ही परिणाम है कि मानदेय में बढ़ोतरी हुई।
कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि शिक्षामित्र और अनुदेशक चुनावी प्रक्रिया से लेकर बूथ प्रबंधन तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए सरकार को उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाने चाहिए। वक्ता ने सर्वोच्च अदालत के आदेशों का जिक्र करते हुए टेट पास शिक्षामित्रों के नियमितीकरण की भी मांग उठाई।
अंत में शिक्षामित्रों और अनुदेशकों से अधिक संख्या में जुड़ने और एकजुट होकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने की अपील की गई। साथ ही अगले कार्यक्रम में “समान काम, समान वेतन” मुद्दे पर विस्तृत चर्चा करने की बात कही गई।