शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य होने पर विरोध तेज, शिक्षक महासंघ ने उठाई आवाज, पीएम को ज्ञापन 

शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य होने पर विरोध तेज, शिक्षक महासंघ ने उठाई आवाज, पीएम को ज्ञापन 

सुप्रीम कोर्ट के शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET (Teacher Eligibility Test) से जुड़े फैसले के बाद देशभर के शिक्षकों के बीच चर्चा तेज हो गई है। अदालत के फैसले में सेवारत शिक्षकों के लिए भी TET पास करने की अनिवार्यता को लेकर दिशा-निर्देश दिए गए हैं। इस फैसले के बाद कई शिक्षक संगठनों ने अपनी चिंता जाहिर की है। शिक्षकों का कहना है कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति वर्षों पहले तत्कालीन नियमों के अनुसार हुई थी, उनके लिए अब इस उम्र में दोबारा परीक्षा की बाध्यता चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

शिक्षकों का तर्क है कि जब वे सरकारी सेवा में आए थे, उस समय TET जैसी कोई अनिवार्य शर्त लागू नहीं थी। उन्होंने अपनी योग्यता, चयन प्रक्रिया और उस समय के नियमों के आधार पर नौकरी प्राप्त की थी। ऐसे में लंबे समय तक बच्चों को पढ़ाने के बाद अब नई पात्रता शर्त लागू होने से कई अनुभवी शिक्षकों में असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।

प्रमोशन के लिए TET जरूरी होने का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के उद्देश्य से सभी सेवारत शिक्षकों के लिए TET को महत्वपूर्ण बताया है। अदालत के अनुसार जिन शिक्षकों की सेवा में पांच साल से अधिक समय बचा है, उन्हें TET पास करना आवश्यक होगा। वहीं जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में पांच साल से कम समय बचा है, उन्हें नौकरी से हटाने की कार्रवाई नहीं होगी, लेकिन पदोन्नति के लिए TET पास करना जरूरी रहेगा।

इस फैसले के तहत शिक्षकों को तैयारी के लिए समय भी दिया गया है। TET पास करने की समयसीमा 31 अगस्त 2028 तक बढ़ाई गई है। हालांकि, शिक्षक संगठनों का कहना है कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के अनुभव को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

शिक्षक महासंघ ने जताई नाराजगी, प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन

हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की है। महासंघ की ओर से इस मामले में प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री को ज्ञापन भेजकर शिक्षकों की समस्याओं पर विचार करने की मांग की गई है।

 

महासंघ के प्रांत अध्यक्ष विनोद सूद ने कहा कि 2010 से पहले नियुक्त हुए शिक्षकों की नियुक्तियां उस समय के नियमों और योग्यता मानकों के आधार पर हुई थीं। ऐसे में बाद में लागू हुई पात्रता शर्तों को पुराने शिक्षकों पर लागू करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि शिक्षक कई वर्षों से शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में योगदान दे रहे हैं और उनके अनुभव को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

 

विनोद सूद ने कहा कि कई शिक्षक 20 से 25 वर्षों से लगातार बच्चों को पढ़ा रहे हैं। ऐसे में सेवा के अंतिम वर्षों में दोबारा परीक्षा की बाध्यता उनके लिए कठिन परिस्थिति पैदा कर सकती है। शिक्षक महासंघ का कहना है कि इस विषय पर नीतिगत स्तर पर समाधान निकाला जाना चाहिए, जिससे शिक्षकों के सेवा अधिकार और भविष्य सुरक्षित रह सकें।

बैक डेट से नियम लागू करने पर सवाल

शिक्षक महासंघ का मुख्य तर्क यह है कि नई पात्रता शर्तों को पुराने नियुक्त शिक्षकों पर पीछे की तारीख से लागू करना उचित नहीं है। संगठन का कहना है कि इससे उन शिक्षकों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है, जिन्होंने अपने पूरे सेवाकाल में शिक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

 

शिक्षकों का कहना है कि शिक्षा की गुणवत्ता जरूरी है, लेकिन इसके लिए अनुभवी शिक्षकों की सेवाओं और योगदान को भी सम्मान मिलना चाहिए। महासंघ ने केंद्र सरकार से मांग की है कि इस विषय पर संवेदनशीलता के साथ विचार किया जाए और ऐसा रास्ता निकाला जाए जिससे शिक्षकों को राहत मिल सके।

 

TET को लेकर जारी यह बहस केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पुराने शिक्षकों के सेवा अधिकार, अनुभव और भविष्य से जुड़ा विषय बन गया है। आने वाले समय में इस मामले पर सरकार और शिक्षक संगठनों के बीच बातचीत के जरिए समाधान निकलने की उम्मीद है, ताकि शिक्षा व्यवस्था की मजबूती के साथ शिक्षकों के हितों का भी संतुलन बना रहे।

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