पेट्रोल 18 और डीजल 35 रुपये तक महंगा होना तय!
यूक्रेन-रूस युद्ध और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर अब सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, पेट्रोल करीब 18 रुपये प्रति लीटर और डीजल करीब 35 रुपये प्रति लीटर तक महंगा हो सकता है।
तेल कंपनियों को भारी नुकसान
तेल कंपनियों को रोजाना लगभग 1600 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। पिछले महीने तक यह नुकसान करीब 2400 करोड़ रुपये प्रतिदिन था, जिसमें अब कुछ कमी आई है।
अप्रैल 2022 से नहीं बढ़े दाम
दिलचस्प बात यह है कि अप्रैल 2022 से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इस दौरान कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, हालांकि 2026 की शुरुआत में यह घटकर लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल तक आ गई थीं।
उत्पादन शुल्क में कटौती का असर
सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पादन शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) में कटौती की थी, जिससे कंपनियों का नुकसान कुछ कम हुआ। कटौती के बाद भी पेट्रोल पर करीब 11.9 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 7.8 रुपये प्रति लीटर का घाटा बना हुआ है।
भारत की तेल निर्भरता
भारत अपनी जरूरत का लगभग 88% कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में थोड़ी भी तेजी का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब पर पड़ता है।
36 अरब डॉलर तक का असर
अगर मौजूदा हालात बने रहते हैं, तो 2025-26 में कुल नुकसान 36 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। इससे सरकारी खजाने और चालू खाते के घाटे पर भी दबाव बढ़ेगा।
क्यों बढ़ सकते हैं दाम?
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी
कंपनियों का लगातार घाटा
टैक्स में पहले ही कटौती हो चुकी है
सरकार पर वित्तीय दबाव
आम लोगों पर असर
अगर कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर सिर्फ पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रहेगा। ट्रांसपोर्ट महंगा होगा, जिससे खाने-पीने और रोजमर्रा की चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं।