शिक्षामित्रों के मूल विद्यालय और ग्राम सभा के नजदीकी स्कूल में समायोजन व स्थानांतरण, लखनऊ बना पहला जिला
उत्तर प्रदेश के शिक्षामित्रों के लिए एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। प्रदेश में पहली बार लखनऊ जिले में शिक्षामित्रों के मूल विद्यालय और उनकी ग्राम सभा के नजदीकी विद्यालयों में समायोजन एवं स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस कदम को लंबे समय से अपनी तैनाती में बदलाव की मांग कर रहे शिक्षामित्रों के लिए राहत के रूप में देखा जा रहा है। इससे कई ऐसे शिक्षामित्रों को फायदा मिल सकता है, जो वर्षों से अपने घर से काफी दूर स्थित विद्यालयों में कार्य कर रहे हैं।
मिली जानकारी के अनुसार लखनऊ जिला इस पहल को लागू करने वाला प्रदेश का पहला जिला बन गया है। समायोजन और स्थानांतरण की प्रक्रिया स्थानीय आवश्यकताओं और उपलब्ध रिक्तियों को ध्यान में रखते हुए की जा रही है। यदि यह व्यवस्था सफल रहती है, तो आने वाले समय में अन्य जिलों में भी इसी प्रकार की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। हालांकि अभी तक पूरे प्रदेश में इस संबंध में कोई समान आदेश लागू नहीं हुआ है।

शिक्षामित्र संगठनों का कहना है कि लंबे समय से मूल विद्यालय अथवा ग्राम सभा के निकट तैनाती की मांग की जा रही थी। उनका मानना है कि घर के पास विद्यालय मिलने से आने-जाने में समय की बचत होगी और शिक्षक विद्यालय में अधिक प्रभावी ढंग से अपनी जिम्मेदारियां निभा सकेंगे। साथ ही पारिवारिक जिम्मेदारियों और कार्य के बीच बेहतर संतुलन भी बन सकेगा।
फिलहाल यह प्रक्रिया लखनऊ जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है। अन्य जिलों के शिक्षामित्र भी इस पर नजर बनाए हुए हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही उनके जिले में भी ऐसी व्यवस्था लागू होगी। यदि शासन स्तर पर व्यापक निर्णय लिया जाता है, तो प्रदेश के हजारों शिक्षामित्रों को इसका लाभ मिल सकता है।