महंगाई का नया झटका: रोजमर्रा की चीजें हुईं महंगी, चुपचाप बढ़ती महंगाई ने बढ़ाई चिंता
देशभर में लाखों परिवार इन दिनों बढ़ते घरेलू खर्च से परेशान हैं। पिछले कुछ महीनों में रसोई से लेकर दैनिक उपयोग की वस्तुओं तक के दाम लगातार बढ़े हैं। खास बात यह है कि यह बढ़ोतरी अचानक नहीं बल्कि धीरे-धीरे हुई, जिसके कारण अब लोगों को अपने मासिक बजट पर इसका बड़ा असर दिखाई देने लगा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ा है। तेल महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ी, जिसका प्रभाव खाने-पीने की वस्तुओं और अन्य उपभोक्ता उत्पादों की कीमतों पर भी देखने को मिल रहा है।
कंपनियों ने बढ़ाए दाम, कहीं पैकिंग हुई छोटी
मार्च के बाद से कई बड़ी कंपनियों ने अपने उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी की है। कुछ कंपनियों ने सीधे दाम बढ़ाए हैं, जबकि कुछ ने पैकेट का आकार छोटा कर दिया है। इससे ग्राहकों को कम मात्रा के लिए लगभग वही कीमत चुकानी पड़ रही है।
उदाहरण के तौर पर, पहले एक लीटर सरसों का तेल लगभग 180 रुपये में मिलता था। अब कई ब्रांड 825 ग्राम की पैकिंग बेच रहे हैं, जिसकी कीमत 166 से 175 रुपये तक है। वहीं पीली सरसों के तेल की कीमत भी करीब 170 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 220 रुपये तक पहुंच गई है।
कंपनियां कच्चे माल की बढ़ती लागत, महंगे परिवहन खर्च और सप्लाई चेन पर बढ़ते दबाव को इसकी प्रमुख वजह बता रही हैं।
ईंधन और गैस की कीमतों का भी असर
मार्च के बाद ऊर्जा क्षेत्र में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में लगभग 10 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई है। वहीं कमर्शियल सिलेंडर के दामों में काफी तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है।
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। जब ईंधन महंगा होता है तो माल ढुलाई का खर्च बढ़ जाता है, जिसका सीधा असर बाजार में बिकने वाले लगभग हर उत्पाद पर पड़ता है।
रसोई का मासिक खर्च हजारों रुपये बढ़ा
महंगाई का सबसे ज्यादा असर मध्यम वर्गीय परिवारों पर दिखाई दे रहा है। यदि किसी परिवार का मासिक रसोई खर्च पहले करीब 15 हजार रुपये था, तो कीमतों में हुई लगातार बढ़ोतरी के कारण अब यह खर्च काफी बढ़ चुका है।
सिर्फ पांच प्रतिशत की अतिरिक्त वृद्धि भी परिवार के मासिक खर्च में लगभग 750 रुपये का बोझ डाल देती है। मार्च से अब तक के कुल प्रभाव को देखें तो कई घरों में रसोई का खर्च करीब 2 हजार से 2,250 रुपये तक बढ़ गया है।
किन वस्तुओं के दाम सबसे ज्यादा बढ़े?
पिछले कुछ महीनों में खाद्य तेलों की कीमतों में सबसे अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा साबुन, डिटर्जेंट, कॉफी, हैंडवॉश, नमकीन, शैंपू और दालों जैसी रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुएं भी महंगी हुई हैं।
खाद्य तेलों में औसतन 20 से 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी गई है। वहीं डिटर्जेंट, नमकीन और अन्य उपभोक्ता उत्पादों के दाम भी लगातार ऊपर जा रहे हैं। इसका असर सीधे हर घर के मासिक बजट पर पड़ रहा है।
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