केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को झटका! कोविड काल के DA-DR एरियर पर सरकार ने कहा – ‘NO’
लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स को अपने महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) के उस एरियर का लंबे समय से इंतजार है, जो कोविड काल में रोका गया था। कोविड-19 के दौरान 18 महीने तक डीए-डीआर नहीं दिया गया था। अब इस मामले पर वित्त मंत्रालय की तरफ से एक नया बयान दिया गया है। केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए महंगाई भत्ता (DA/DR) के रुके हुए एरियर को लेकर वित्त मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि फिलहाल इनका भुगतान संभव नहीं है।
फिर हाथ लगी निराशा
वित्त मंत्रालय ने COVID-19 के वित्तीय प्रभाव का हवाला देते हुए, एक बार फिर से रोके गए DA/DR के बकाया को जारी करने से इनकार कर दिया है। कर्मचारियों के यूनियनों द्वारा लगातार 6 वर्षों तक संघर्ष करने के बावजूद, सरकार ने हर बार इसे नामंजूर कर दिया है, जिससे लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को निराशा हुई है।
क्यों रोकी गई थीं DA-DR की किस्तें?
वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग की ओर से 15 अप्रैल 2026 को जारी पत्र में कहा गया है कि कोविड-19 महामारी के दौरान सरकार ने आर्थिक दबाव को कम करने के लिए DA/DR की तीन किस्तों को फ्रीज करने का फैसला लिया था। ये किस्तें 1 जनवरी 2020, 1 जुलाई 2020 और 1 जनवरी 2021 से लागू होनी थीं।
मंत्रालय ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि उस समय महामारी के कारण देश की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ा था। सरकार को स्वास्थ्य और कल्याण से जुड़ी योजनाओं पर बड़े पैमाने पर खर्च करना पड़ा, जिससे वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ गया। इसी वजह से DA/DR की इन किस्तों को रोका गया था।
SC के फैसले का हवाला देते हुए एरियर की मांग
पत्र में यह भी कहा गया है कि महामारी का आर्थिक असर केवल एक साल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका प्रभाव वित्त वर्ष 2020-21 के बाद भी जारी रहा। ऐसे में सरकार के लिए इन रुकी हुई किस्तों के एरियर का भुगतान करना व्यावहारिक नहीं माना गया।
यह जवाब डिफेंस रिकॉग्नाइज्ड एसोसिएशन की ओर से दिए गए एक आवेदन के संदर्भ में दिया गया है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए एरियर जारी करने की मांग उठाई गई थी।
फिलहाल राहत मिलने की संभावना नहीं
सरकार के इस रुख से साफ है कि फिलहाल केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स को DA/DR एरियर को लेकर कोई राहत मिलने की संभावना नहीं है। हालांकि, यह मुद्दा लंबे समय से चर्चा में है और कर्मचारी संगठनों की ओर से लगातार इसकी मांग की जा रही है।
इस फैसले का सीधा असर लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स पर पड़ेगा, जो इन एरियर के भुगतान का इंतजार कर रहे थे। फिलहाल सरकार ने वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए इस मांग को खारिज कर दिया है।