यूपी में TET अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों का आंदोलन, 18 जून को प्रदेशभर में प्रदर्शन की तैयारी

यूपी में TET अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों का आंदोलन, 18 जून को प्रदेशभर में प्रदर्शन की तैयारी

उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET की अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। वर्षों पहले नियुक्त किए गए शिक्षकों पर बाद में लागू किए गए पात्रता नियमों को लेकर अब विरोध तेज हो गया है। इसी मुद्दे को लेकर अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने प्रदेशभर में आंदोलन करने का फैसला लिया है। महासंघ का कहना है कि पहले से नियुक्त शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए।

शिक्षकों की मांगों को लेकर 18 जून को उत्तर प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया जाएगा। इस दौरान शिक्षक जिलाधिकारियों के माध्यम से प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री को ज्ञापन भेजेंगे। इस आंदोलन का उद्देश्य उन शिक्षकों के लिए नीतिगत और विधायी संरक्षण की मांग करना है, जिनकी नियुक्ति TET लागू होने से पहले हुई थी।

TET अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों में विरोध क्यों?

अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रोफेसर संजय मेधावी ने बताया कि 23 अगस्त 2010 को एनसीटीई की अधिसूचना और 29 मई 2026 को आए सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद यह विषय शिक्षकों के बीच चिंता का कारण बना है। महासंघ का कहना है कि वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों और उत्तर प्रदेश में 27 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों की स्थिति को ध्यान में रखते हुए अलग व्यवस्था की जानी चाहिए।

शिक्षक संगठनों का तर्क है कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति उस समय के नियमों के अनुसार हुई थी, उनकी नियुक्तियां पूरी तरह वैध थीं। ऐसे में बाद में लागू किए गए शिक्षक पात्रता परीक्षा जैसे मानकों को पुराने शिक्षकों पर लागू करना उचित नहीं माना जा सकता। इसी मांग को लेकर शिक्षक संगठन अब अपनी आवाज मजबूत तरीके से उठाने की तैयारी कर रहे हैं।

कानून में संशोधन या विशेष प्रावधान की मांग

महासंघ के प्रदेश महामंत्री जोगेंद्र पाल सिंह ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर संसद के मानसून सत्र से पहले सभी लोकसभा और राज्यसभा सांसदों को ज्ञापन दिया जाएगा। संगठन की ओर से कानून में संशोधन या विशेष प्रावधान करने की मांग रखी जाएगी, जिससे पुराने शिक्षकों के भविष्य पर कोई संकट न आए।

शिक्षक नेताओं का कहना है कि लंबे समय से सेवाएं दे रहे शिक्षकों ने शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे में उनके अनुभव और सेवाओं को ध्यान में रखते हुए कोई समाधान निकाला जाना चाहिए। शिक्षकों का मानना है कि अचानक किसी नए नियम को लागू करने से हजारों शिक्षकों के सामने परेशानी खड़ी हो सकती है।

75 जिलों तक आंदोलन को पहुंचाने की तैयारी

प्राथमिक संवर्ग के प्रदेश अध्यक्ष शिव शंकर सिंह और महामंत्री प्रदीप कुमार तिवारी ने कहा कि आंदोलन को प्रदेश के सभी 75 जिलों तक पहुंचाया जाएगा। इसके लिए ब्लॉक और न्याय पंचायत स्तर तक शिक्षकों को जोड़ने की योजना बनाई जा रही है।

शिक्षक संगठन इस मुद्दे पर लगातार बैठकें कर रहे हैं और अधिक से अधिक शिक्षकों को आंदोलन से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। संगठन से जुड़े कई पदाधिकारियों ने कहा कि उनकी कोशिश है कि शिक्षकों की समस्या को सरकार और नीति बनाने वाले लोगों तक प्रभावी तरीके से पहुंचाया जाए।

TET अनिवार्यता को लेकर चल रहा यह विवाद आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है। शिक्षक संगठन जहां पुराने नियुक्त शिक्षकों के हितों की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं, वहीं इस मामले में आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है। अब 18 जून का प्रदर्शन शिक्षकों की मांगों को लेकर एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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