मुख्यमंत्री जी छुट्टी बढ़ा दीजिए! 1 जुलाई से खोले जाएं परिषदीय विद्यालय, गर्मी और जनगणना बनी वजह

मुख्यमंत्री जी छुट्टी बढ़ा दीजिए! 1 जुलाई से खोले जाएं परिषदीय विद्यालय, गर्मी और जनगणना बनी वजह

उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में ग्रीष्मावकाश खत्म होने से पहले ही शिक्षकों ने छुट्टियां बढ़ाने की मांग उठाई है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि इस बार गर्मी की छुट्टियों में भी बड़ी संख्या में शिक्षक जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में व्यस्त रहे, जिसके कारण उन्हें सही मायने में अवकाश नहीं मिल पाया। इसी को देखते हुए स्कूलों को 16 जून की जगह 1 जुलाई से खोलने की मांग की गई है।

शिक्षक संगठनों का कहना है कि भीषण गर्मी और लू के चलते छोटे बच्चों के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। तेज धूप में बच्चों को स्कूल आने-जाने में परेशानी हो सकती है और डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विद्यालय खोलने की तारीख आगे बढ़ाई जानी चाहिए।

इस राज्य में बढ़ती गर्मी के कारण ग्रीष्मकालीन अवकाश 30 जून तक बढ़ा

जनगणना कार्य में लगे रहे शिक्षक

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कुमार पांडे ने बताया कि इस बार कई शिक्षक जनगणना कार्य में लगातार लगे रहे। जनगणना का काम 22 मई से 20 जून तक चलने की वजह से शिक्षकों को ग्रीष्मावकाश का पूरा लाभ नहीं मिल सका। उन्होंने कहा कि अगर 16 जून से स्कूल खोल दिए जाते हैं तो कई जगह शिक्षकों की कमी भी देखने को मिल सकती है।

शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान, बोर्ड परीक्षाओं और अन्य विभागीय कार्यों में भी लगातार सहयोग किया है। ऐसे में या तो उन्हें 15 दिन का उपार्जित अवकाश दिया जाए या फिर विद्यालयों का संचालन 1 जुलाई से शुरू किया जाए।

मुख्यमंत्री से की गई छुट्टी बढ़ाने की मांग

विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन ने भी मुख्यमंत्री से ग्रीष्मावकाश को 30 जून तक बढ़ाने की मांग की है। संगठन के प्रदेश महासचिव दिलीप चौहान ने कहा कि वर्तमान समय में गर्मी काफी अधिक है, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर अभिभावक भी चिंतित हैं।

वहीं प्रदेश अध्यक्ष संतोष तिवारी ने कहा कि शिक्षकों की परिस्थितियों और बच्चों के स्वास्थ्य को देखते हुए सरकार को इस विषय पर विचार करना चाहिए। शिक्षक संगठनों का कहना है कि छुट्टी बढ़ने से बच्चों को गर्मी से राहत मिलेगी और शिक्षक भी जनगणना कार्य पूरा करने के बाद बेहतर तरीके से विद्यालयों में अपनी जिम्मेदारी निभा सकेंगे।

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