बड़ी खबर: अनुदेशकों के एरियर पर बड़ा संकट??? सरकार ने डाली तीन-तीन याचिकाएं
ये परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों के अंशकालिक अनुदेशकों* के बकाया मानदेय का मामला है 📄
मुख्य बातें 📰
1. मामला क्या है
– प्रदेश सरकार ने अंशकालिक अनुदेशकों का मानदेय 17 हजार रुपये कर दिया है
– लेकिन मार्च 2017 से लेकर अब तक का लाखों रुपये का बकाया देने को तैयार नहीं है
2. कोर्ट का आदेश ⚖️
– सुप्रीम कोर्ट ने 4 फरवरी को आदेश दिया था कि 1 अप्रैल 2017 से 2017-18 के बकाया का भुगतान 6 महीने में किया जाए
– कोर्ट ने साफ कहा: पहले राज्य सरकार भुगतान करे, बाद में केंद्र से अपना हिस्सा ले
– 24,717 अनुदेशकों को 9-9 लाख रुपये से अधिक का बकाया भुगतान होना है
3. सरकार की चाल❌
– भुगतान करने की बजाय सरकार ने *मार्च 2026 को पुनर्विचार याचिका दाखिल कर दी
– 7 मई को स्थगन प्रार्थना पत्र और 12 मई को संशोधन प्रार्थना पत्र भी दाखिल किया
– तर्क दिया कि बकाया में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी का मुद्दा है
4. अनुदेशकों का पक्ष 💪
याचिकाकर्ता भोलानाथ पांडेय: _”मार्च 2017 से 17 हजार रुपये के हिसाब से एरियर पाना हमारा हक है. राज्य सरकार से अनुरोध करेंगे, जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट भी जाएंगे”_
टाइमलाइन समझो ⏰
– *2013: 24,717 अनुदेशकों की नियुक्ति 7,000 रुपये पर
– *2016*: मानदेय बढ़ाकर 8,470 रुपये किया
– *2017*: 17 हजार रुपये मानदेय तय हुआ, लेकिन दिसंबर 2017 में फिर 8,470 ही मिलने लगा
– *2026 फरवरी: सुप्रीम कोर्ट ने अनुदेशकों के पक्ष में फैसला दिया
– 2026 मार्च-मई: सरकार ने भुगतान की बजाय 3 याचिकाएं दाखिल कर दीं
सीधी बात: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी 24 हजार से ज्यादा अनुदेशकों को उनका 9-9 लाख का बकाया नहीं मिल रहा. सरकार भुगतान टालने के लिए कोर्ट में याचिका पर याचिका डाल रही है
