यूपी के इन प्राइमरी स्कूलों में शिक्षकों की ऑनलाइन हाजिरी का आदेश, खरीदने की जिम्मेदारी
उत्तर प्रदेश में प्राथमिक विद्यालयों की व्यवस्था को डिजिटल बनाने की दिशा में एक नया कदम उठाया गया है। प्रयागराज जिले में समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित 413 प्राथमिक स्कूलों में अब शिक्षकों की उपस्थिति ऑनलाइन दर्ज करने की व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। इस फैसले के बाद स्कूल प्रबंधन और शिक्षकों के बीच नई चर्चा शुरू हो गई है, क्योंकि इसके लिए आवश्यक डिवाइस और मोबाइल फोन खरीदने की जिम्मेदारी प्रबंध समितियों पर डाली गई है।
समाज कल्याण विभाग की ओर से जारी latest update के अनुसार सभी स्कूलों में डिजिटल अटेंडेंस सिस्टम लागू किया जाएगा। विभाग का कहना है कि इससे शिक्षकों की उपस्थिति पारदर्शी होगी और स्कूलों में नियमितता बढ़ेगी। हालांकि कई स्कूल प्रबंधन इस फैसले को व्यावहारिक नहीं मान रहे हैं।
क्या हैं इस व्यवस्था से जुड़े official details
समाज कल्याण विभाग के निदेशक संजीव सिंह द्वारा जिला समाज कल्याण अधिकारियों को भेजे गए पत्र में इस नई व्यवस्था की जानकारी दी गई है। निर्देश के अनुसार स्कूलों में ऑनलाइन उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक डिवाइस और स्मार्टफोन प्रबंधन को खुद खरीदने होंगे।
हालांकि इसमें उपयोग होने वाले सॉफ्टवेयर और डिजिटल सिस्टम का खर्च विभाग खुद उठाएगा। यानी तकनीकी प्लेटफॉर्म सरकार उपलब्ध कराएगी, लेकिन उपकरण खरीदने की जिम्मेदारी विद्यालय प्रबंधन की होगी।
सरकार का मानना है कि डिजिटल उपस्थिति से शिक्षकों की समय पर मौजूदगी सुनिश्चित होगी और स्कूलों में पढ़ाई का माहौल बेहतर बनेगा।
आर्थिक तंगी वाले स्कूलों में बढ़ी चिंता
जमीनी स्तर पर स्थिति थोड़ी अलग दिखाई दे रही है। कई ऐसे विद्यालय हैं जहां बिजली बिल तक समय पर भरना मुश्किल हो जाता है। वहीं बच्चों की यूनिफॉर्म, जूते, मोजे और बैग जैसी जरूरी चीजों के लिए भी समय पर पर्याप्त सहायता नहीं मिल पाती।
ऐसे में स्कूल प्रबंध समितियों का कहना है कि नई डिजिटल व्यवस्था लागू करना उनके लिए आसान नहीं है। उनका तर्क है कि जब बुनियादी सुविधाओं के लिए ही संघर्ष करना पड़ रहा हो, तब अतिरिक्त डिवाइस खरीदना एक और आर्थिक बोझ बन सकता है।
यही वजह है कि आदेश जारी होने के कई सप्ताह बाद भी कई स्कूलों में अभी तक शिक्षक रजिस्टर में ही अपनी हाजिरी दर्ज कर रहे हैं।
31 जनवरी की डेडलाइन के बावजूद लागू नहीं हो सकी व्यवस्था
विभाग की ओर से निर्देश दिया गया था कि 31 जनवरी तक सभी स्कूलों में ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था शुरू कर दी जाए। साथ ही यह भी चेतावनी दी गई थी कि यदि निर्धारित समय तक व्यवस्था लागू नहीं हुई तो संबंधित शिक्षकों का वेतन रोका जा सकता है।
लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि कई स्कूलों में अब तक डिजिटल सिस्टम शुरू नहीं हो पाया है। प्रबंधन का कहना है कि बिना पर्याप्त संसाधन के इस व्यवस्था को तुरंत लागू करना संभव नहीं है।
स्कूल प्रबंधन ने आदेश को बताया अव्यवहारिक
प्रयागराज के मम्फोर्डगंज स्थित राष्ट्रीय शिशु विद्यालय एवं महिला कला प्रशिक्षण केंद्र की प्रबंध समिति के उपाध्यक्ष एलके अहेरवार का कहना है कि यह आदेश व्यावहारिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर नहीं बनाया गया है।
उनका मानना है कि सरकार को इस फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए। उनका कहना है कि पहले स्कूलों को जरूरी संसाधन और बजट उपलब्ध कराया जाए, उसके बाद डिजिटल व्यवस्था लागू करना ज्यादा आसान होगा।
बायोमीट्रिक उपस्थिति के लिए एक घंटे का समय
नई व्यवस्था के तहत शिक्षकों को विद्यालय शुरू होने के समय से एक घंटे का मार्जिन दिया जाएगा। इस अवधि के भीतर शिक्षक अपनी बायोमीट्रिक या डिजिटल उपस्थिति दर्ज कर सकेंगे।
यदि एक घंटे के भीतर उपस्थिति दर्ज नहीं होती है तो सिस्टम अपने आप लॉक हो जाएगा। इससे देर से आने वाले शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाएगी।
हालांकि नेटवर्क की समस्या को देखते हुए विभाग ने एक वैकल्पिक व्यवस्था भी रखी है। जिन स्कूलों में इंटरनेट उपलब्ध नहीं है वहां उपस्थिति ऑफलाइन मोड में दर्ज की जा सकेगी। बाद में नेटवर्क उपलब्ध होने पर यह डेटा स्वतः ऑनलाइन सिस्टम में सिंक हो जाएगा।

प्रधानाध्यापक को दी गई जिम्मेदारी
इस डिजिटल व्यवस्था में उपस्थिति दर्ज करने की मुख्य जिम्मेदारी विद्यालय के प्रधानाध्यापक को दी गई है। उन्हें सुनिश्चित करना होगा कि सभी शिक्षकों की उपस्थिति समय पर दर्ज हो।
यदि किसी कारण से प्रधानाध्यापक यह जिम्मेदारी निभाने में असमर्थता जताते हैं, तो उनसे चार्ज लेकर किसी अन्य शिक्षक को यह जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
eligibility और व्यवस्था से जुड़े व्यावहारिक सवाल
हालांकि सरकार का उद्देश्य स्कूलों में पारदर्शिता और अनुशासन लाना है, लेकिन कई स्कूलों का कहना है कि पहले बुनियादी ढांचा मजबूत होना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क, बिजली और उपकरणों की उपलब्धता अभी भी एक बड़ी चुनौती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस डिजिटल व्यवस्था को सही तरीके से लागू करना है तो सरकार को चरणबद्ध तरीके से काम करना होगा। पहले स्कूलों को आवश्यक संसाधन दिए जाएं और उसके बाद ऑनलाइन सिस्टम लागू किया जाए।
निष्कर्ष
प्रयागराज के 413 प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति लागू करने का फैसला शिक्षा व्यवस्था को डिजिटल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है। लेकिन जमीन पर मौजूद चुनौतियां यह भी दिखाती हैं कि किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले स्थानीय परिस्थितियों को समझना जरूरी होता है।
यदि सरकार और स्कूल प्रबंधन मिलकर समाधान निकालते हैं, तो आने वाले समय में यह डिजिटल सिस्टम शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बना सकता