एक साल बाद भी अटकी शिक्षामित्रों की मूल विद्यालय वापसी, जिले में बढ़ रही नाराज़गी

एक साल बाद भी अटकी शिक्षामित्रों की मूल विद्यालय वापसी, जिले में बढ़ रही नाराज़गी

अम्बेडकरनगर: शिक्षामित्रों की मूल विद्यालय वापसी को लेकर जारी शासनादेश को एक वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन ज़मीन पर अब तक कोई ठोस प्रगति दिखाई नहीं दे रही। जिले के कई शिक्षामित्र आज भी अपने पुराने विद्यालयों में वापसी का इंतज़ार कर रहे हैं। लगातार देरी की वजह से अब उनके बीच नाराज़गी भी साफ दिखाई देने लगी है।

दरअसल, सरकार की ओर से पहले ही यह व्यवस्था तय की जा चुकी थी कि जिन शिक्षामित्रों का स्थानांतरण हुआ है, उन्हें परिस्थितियों के अनुसार उनके मूल विद्यालयों में वापस भेजने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। लेकिन इतने समय बाद भी यह प्रक्रिया पूरी न होने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। शिक्षामित्रों का कहना है कि latest update की उम्मीद हर कुछ महीनों में जगती है, लेकिन फिलहाल स्थिति जस की तस बनी हुई है।

लंबी दूरी और बढ़ता खर्च बना बड़ी समस्या

जिले के कई शिक्षामित्र इस समय अपने घर से काफी दूर स्थित विद्यालयों में पढ़ाने के लिए मजबूर हैं। रोज़ाना लंबी दूरी तय कर स्कूल पहुंचना उनके लिए आसान नहीं है। खासतौर पर वे शिक्षामित्र जो ग्रामीण इलाकों में तैनात हैं, उन्हें आने-जाने में काफी समय और पैसा दोनों खर्च करना पड़ता है।

मानदेय पर काम करने वाले इन शिक्षामित्रों का कहना है कि यात्रा का खर्च कभी-कभी उनकी मासिक आय का बड़ा हिस्सा खा जाता है। ऐसे में परिवार की जरूरतों को पूरा करना भी मुश्किल हो जाता है। कई शिक्षामित्रों का कहना है कि अगर उन्हें उनके मूल विद्यालय में ही तैनाती मिल जाए, तो उनकी आर्थिक और मानसिक परेशानी काफी हद तक कम हो सकती है।

संघ ने उठाई आवाज, जल्द कार्रवाई की मांग

इस मुद्दे को लेकर शिक्षामित्र शिक्षक संघ, अम्बेडकरनगर भी सक्रिय हो गया है। संघ के जिलाध्यक्ष और शिक्षामित्र केयर समिति के जिला संयोजक राम चन्दर मौर्य ने शासन और प्रशासन से जल्द कार्रवाई करने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि जब शासनादेश पहले ही जारी हो चुका है, तो फिर स्थानांतरण की प्रक्रिया को इतने लंबे समय तक लंबित रखना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, शिक्षामित्र लंबे समय से इस फैसले के लागू होने का इंतज़ार कर रहे हैं और बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद अभी तक कोई स्पष्ट official details सामने नहीं आई हैं।

राम चन्दर मौर्य का कहना है कि यदि समय रहते इस विषय पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो शिक्षामित्रों की नाराज़गी और बढ़ सकती है। इसलिए प्रशासन को चाहिए कि वह सभी जरूरी eligibility और प्रक्रिया को जल्द पूरा कराते हुए स्थानांतरण की फाइलों का निस्तारण करे।

समाधान की उम्मीद अब भी बाकी

शिक्षामित्रों का कहना है कि उन्हें अब भी उम्मीद है कि सरकार जल्द इस मामले पर ध्यान देगी और मूल विद्यालय वापसी की प्रक्रिया पूरी होगी। यदि प्रशासन इस दिशा में तेजी दिखाता है, तो जिले के सैकड़ों शिक्षामित्रों को बड़ी राहत मिल सकती है।

फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शासन स्तर से इस विषय में अगला कदम कब उठाया जाता है और क्या आने वाले समय में शिक्षामित्रों को उनके मूल विद्यालयों में लौटने का मौका मिल पाएगा।

Leave a Comment