जनगणना पूरी होने तक आठ पुनर्गठन फिलहाल टला, जनगणना पूरी होने के बाद ही लागू होगी नई व्यवस्था
शहरों में प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए समय-समय पर बदलाव किए जाते हैं। इसी कड़ी में Prayagraj में नगर निगम की जोन व्यवस्था में बदलाव की योजना बनाई गई थी। लेकिन latest update के अनुसार यह बदलाव फिलहाल टाल दिया गया है।
अब तक आठ जोन में काम कर रहे Prayagraj Nagar Nigam को चार जोन में बदलने की योजना थी, मगर यह व्यवस्था अब जनगणना पूरी होने के बाद ही लागू की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार नई व्यवस्था लागू होने की संभावना 2027 के आसपास जताई जा रही है।
अभी आठ जोन में ही चलता रहेगा काम
नगर निगम में पहले से चल रही आठ जोन की व्यवस्था फिलहाल जारी रहेगी। शासन की योजना के मुताबिक शहर को औसतन पांच लाख आबादी के आधार पर चार जोन में पुनर्गठित किया जाना है।
इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य प्रशासन को अधिक व्यवस्थित बनाना और नागरिकों को स्थानीय स्तर पर बेहतर सुविधाएं देना है। हालांकि जनगणना की प्रक्रिया को देखते हुए इस फैसले को फिलहाल एक साल के लिए आगे बढ़ा दिया गया है।
जनगणना के कारण टला निर्णय
अधिकारियों के मुताबिक नगर निगम में इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए बैठक भी हो चुकी थी और पहले इसे लागू करने के लिए करीब छह महीने का समय तय किया गया था।
लेकिन अब जनगणना से जुड़े काम को प्राथमिकता दी जा रही है। जानकारी के अनुसार 22 मई 2026 से मकानों के सूचीकरण का कार्य शुरू होगा, जबकि मुख्य जनगणना प्रक्रिया मार्च 2027 से शुरू होने की संभावना है।
इसी वजह से प्रशासनिक बदलाव को फिलहाल रोक दिया गया है, ताकि दोनों काम एक साथ प्रभावित न हों।
चार जोन बनने से क्या होंगे फायदे
शहर को चार जोन में बांटने की योजना का मकसद सिर्फ प्रशासनिक बदलाव नहीं बल्कि नागरिक सेवाओं को आसान बनाना भी है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद कई पुराने जोन जैसे मुट्ठीगंज, झुंसी, फाफामऊ और ट्रांसपोर्ट नगर को समायोजित किया जाएगा। इसके बाद हर जोन कार्यालय में ही कई जरूरी सेवाएं उपलब्ध होंगी।
उदाहरण के तौर पर नागरिकों को जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, जलकर और गृहकर भुगतान जैसी सुविधाओं के लिए मुख्यालय जाने की जरूरत कम पड़ेगी। इससे स्थानीय स्तर पर ही काम जल्दी निपट सकेगा और लोगों का समय भी बचेगा।
अधिकारियों की पोस्टिंग भी एक बड़ी चुनौती
नई जोन व्यवस्था लागू करने के लिए सिर्फ सीमाएं तय करना ही काफी नहीं है। इसके साथ-साथ कई प्रशासनिक कदम भी जरूरी होते हैं, जैसे अधिकारियों की नई पोस्टिंग, कार्यालय व्यवस्था और संसाधनों का पुनर्वितरण।
नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि इन सभी प्रक्रियाओं को व्यवस्थित तरीके से लागू करने के लिए समय चाहिए। इसलिए जनगणना पूरी होने के बाद ही इस योजना को आगे बढ़ाया जाएगा।