बेसिक शिक्षा निदेशालय का बड़ा निर्देश: 2021 के बाद उच्चीकृत स्कूलों का पूरा विवरण
प्रदेश में बेसिक शिक्षा से जुड़े स्कूलों को लेकर एक अहम प्रशासनिक कदम सामने आया है। बेसिक शिक्षा निदेशालय उत्तर प्रदेश ने सभी जिलों के अधिकारियों से वर्ष 2021 के बाद उच्चीकृत हुए स्कूलों का पूरा ब्योरा मांगा है। यह कदम हाल ही में चल रही शिक्षक भर्ती प्रक्रिया और अदालत के आदेशों के बाद उठाया गया है, ताकि रिकॉर्ड को स्पष्ट किया जा सके और नियुक्ति प्रक्रिया में किसी प्रकार की गड़बड़ी न रहे।
दरअसल, कई अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूल ऐसे हैं जिन्हें पिछले कुछ वर्षों में हाईस्कूल या इंटरमीडिएट स्तर तक अपग्रेड किया गया है। अब सरकार इन सभी संस्थानों की सही स्थिति जानना चाहती है, ताकि आगे की भर्ती और प्रशासनिक निर्णय सही आधार पर लिए जा सकें।
भर्ती प्रक्रिया के बीच मांगी गई नई जानकारी
इस समय प्रदेश में प्रधानाध्यापक और सहायक अध्यापक भर्ती-2021 से जुड़े अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया चल रही है। संशोधित परीक्षा परिणाम 6 सितंबर 2022 को जारी किया गया था और उसी के आधार पर चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति आगे बढ़ाई जा रही है।
इसी बीच कामता राम पाल, अपर शिक्षा निदेशक (बेसिक), ने सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर जरूरी विवरण मांगा है। इस पत्र में स्पष्ट किया गया है कि जिन स्कूलों को भर्ती के समय जूनियर हाईस्कूल के रूप में विज्ञापित किया गया था, उनमें से कई बाद में उच्चीकृत हो चुके हैं। ऐसे में इन संस्थानों की वास्तविक स्थिति का रिकॉर्ड अपडेट करना जरूरी हो गया है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद बढ़ी प्रक्रिया की गति
इस मामले को लेकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका दाखिल की गई थी। यह याचिका राम कुमार भारद्वाज द्वारा दायर की गई थी, जिसमें राज्य सरकार सहित अन्य पक्षकार शामिल हैं।
इस याचिका (संख्या 1966/2026) पर 19 फरवरी 2026 को अदालत ने आदेश पारित किया। कोर्ट के निर्देशों के बाद अब उन सभी स्कूलों की पहचान की जा रही है जो भर्ती के दौरान सूची में थे लेकिन बाद में उनका स्तर बदल गया।
सरकारी सूत्रों के अनुसार यह कदम अदालत के आदेश के पालन और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए उठाया गया है। यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसी भी अभ्यर्थी के अधिकार प्रभावित न हों।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को दिए गए निर्देश
निदेशालय की ओर से जारी पत्र में सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने जिले के ऐसे सभी अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों की सूची तैयार करें, जिन्हें वर्ष 2021 के बाद हाईस्कूल या इंटरमीडिएट स्तर तक उच्चीकृत किया गया है।
यह जानकारी एक तय प्रारूप में भेजने के लिए कहा गया है, ताकि पूरे प्रदेश का डेटा एक समान तरीके से संकलित किया जा सके। अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे संबंधित विद्यालयों की पूरी जानकारी जैसे—
विद्यालय का नाम
स्थान और जिला
उच्चीकरण की तिथि
वर्तमान स्तर (हाईस्कूल या इंटरमीडिएट)
इन सभी विवरणों को स्पष्ट रूप से दर्ज करें।
ई-मेल के माध्यम से भेजनी होगी जानकारी
निदेशालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी जिलों से प्राप्त जानकारी सीधे आधिकारिक ई-मेल आईडी पर भेजी जाए। इससे रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखा जा सकेगा और जरूरत पड़ने पर उसे आसानी से देखा जा सकेगा।
पहले यह जानकारी तीन दिन के भीतर भेजने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि उस दौरान होली के त्योहार के कारण कई कार्यालयों में कार्य प्रभावित हुआ। इसी वजह से अब अधिकारियों को अतिरिक्त समय देते हुए सोमवार तक का नया समय निर्धारित किया गया है।
विज्ञापित विद्यालयों की सूची भी मांगी गई
सिर्फ उच्चीकृत विद्यालयों का ही नहीं, बल्कि उन स्कूलों की सूची भी मांगी गई है जिन्हें प्रधानाध्यापक और सहायक अध्यापक पदों के लिए विज्ञापित किया गया था।
सरकार इन दोनों सूचियों की तुलना करके यह देखना चाहती है कि भर्ती के समय जिन विद्यालयों को जूनियर हाईस्कूल के रूप में दिखाया गया था, उनमें से कितने बाद में हाईस्कूल या इंटरमीडिएट स्तर तक अपग्रेड हो गए।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह प्रक्रिया आगे की नियुक्तियों और प्रशासनिक निर्णयों के लिए बेहद जरूरी है।
क्यों जरूरी है यह डेटा
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश में कई स्कूलों का स्तर बढ़ाया गया है। ऐसे में अगर रिकॉर्ड समय पर अपडेट न हो तो भर्ती और पदों की गणना में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।
उदाहरण के तौर पर, अगर कोई स्कूल पहले जूनियर हाईस्कूल था और बाद में हाईस्कूल बन गया, तो वहां पदों की संरचना भी बदल सकती है। इसलिए सरकार पहले वास्तविक स्थिति का पूरा विवरण इकट्ठा करना चाहती है।
क्या असर पड़ेगा भर्ती प्रक्रिया पर
फिलहाल यह प्रक्रिया सिर्फ जानकारी जुटाने के लिए शुरू की गई है। अधिकारियों का कहना है कि इससे भर्ती प्रक्रिया को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी।
अगर कहीं रिकॉर्ड में अंतर पाया जाता है, तो उसे ठीक करने के लिए जरूरी कदम उठाए जा सकते हैं। इससे चयनित अभ्यर्थियों को भी स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी कि उनकी नियुक्ति किस प्रकार आगे बढ़ेगी।
निष्कर्ष
प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए बेसिक शिक्षा निदेशालय द्वारा उठाया गया यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वर्ष 2021 के बाद उच्चीकृत हुए स्कूलों का पूरा डेटा जुटाने से न केवल रिकॉर्ड अपडेट होगा, बल्कि चल रही भर्ती प्रक्रिया भी अधिक स्पष्ट और व्यवस्थित हो सकेगी।
अब सभी जिलों के अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे निर्धारित समय के भीतर सही और पूरी जानकारी निदेशालय को भेजें। इससे आगे की प्रशासनिक कार्रवाई और नियुक्ति प्रक्रिया बिना किसी भ्रम के आगे बढ़ सकेगी।