फर्जी नियुक्ति 12शिक्षक) मामला: STF कार्रवाई के बाद हाईकोर्ट पहुंचे शिक्षक
देवरिया में फर्जी नियुक्तियों और करोड़ों रुपये के भुगतान से जुड़ा मामला एक बार फिर चर्चा में है। वर्ष 2021 में इस प्रकरण में STF की बड़ी कार्रवाई हुई थी, जिसके बाद कई शिक्षकों और अधिकारियों पर शिकंजा कसा गया। अब इस केस से जुड़े कुछ शिक्षक राहत की उम्मीद में हाईकोर्ट पहुंच चुके हैं।
क्या था पूरा मामला?
देवरिया के गौरीबाजार स्थित कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय, मदरसन और बाबू बभनी के सहदेव लघु माध्यमिक विद्यालय में फर्जी तरीके से शिक्षकों की नियुक्ति का मामला सामने आया था।
तत्कालीन बीएसए एएन मौर्य ने वर्ष 2021 में इस पूरे प्रकरण की शिकायत एसटीएफ से की थी। शिकायत में आरोप था कि अनुदानित विद्यालयों में नियमों को दरकिनार कर नियुक्तियां की गईं और बाद में करोड़ों रुपये का एरियर भुगतान भी कर दिया गया।
STF जांच में क्या सामने आया?
एसटीएफ की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
गौरीबाजार के विद्यालय में चार फर्जी नियुक्तियां पाई गईं।
बाबू बभनी के विद्यालय में आठ शिक्षकों की नियुक्ति संदिग्ध मिली।
हर शिक्षक को लगभग 40-40 लाख रुपये तक का एरियर भुगतान किया गया था।
यह खुलासा किसी official announcement से कम नहीं था, क्योंकि इसमें सरकारी फंड के बड़े दुरुपयोग की बात सामने आई।
किन लोगों पर दर्ज हुआ मुकदमा?
9 जुलाई 2021 को तत्कालीन एसटीएफ प्रभारी सत्यप्रकाश सिंह की ओर से सदर कोतवाली में केस दर्ज कराया गया।
मुकदमे में तत्कालीन वित्त एवं लेखाधिकारी जगदीश लाल श्रीवास्तव, बीएसए कार्यालय से जुड़े शिक्षक ओमप्रकाश मिश्र, सेवानिवृत्त लिपिक जर्नादन उपाध्याय, शिक्षक अजीत कुमार उपाध्याय, राजकुमार सहित कुल 12 शिक्षकों के नाम शामिल किए गए।
गिरफ्तारी और आगे की कार्रवाई
जांच आगे बढ़ने पर कई गिरफ्तारियां भी हुईं।
अजीत उपाध्याय
ओमप्रकाश मिश्र
मुन्ना यादव
राजकुमार
बीएसए कार्यालय के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संजय कुमार आर्य
अक्टूबर 2021 में वित्त एवं लेखाधिकारी जगदीश लाल श्रीवास्तव को भी जेल भेजा गया।
मामले में जिन 12 शिक्षकों के नाम सामने आए, उनमें दिलीप कुमार उपाध्याय, राघवेंद्र प्रसाद श्रीवास्तव, विमल कुमार शुक्ला, ब्रजेंद्र सिंह, विनय कुमार, कुमारी अंजना, सुरेंद्र यादव, जगदीश यादव, कुमारी विमला यादव, नीतू रस्तोगी, श्वेता मिश्रा और रंजना कुमारी शामिल हैं।
जांच में और नाम आए सामने
विवेचना के दौरान गौरीबाजार स्थित कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय के तीन अन्य शिक्षकों के नाम भी सामने आए। विभागीय सूत्रों के अनुसार, जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, केस की परतें खुलती गईं।
हाईकोर्ट की शरण क्यों?
मुकदमा दर्ज होने के बाद कई आरोपितों ने राहत के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में eligibility, नियुक्ति प्रक्रिया, official details और भुगतान से जुड़े दस्तावेज अदालत में अहम भूमिका निभाते हैं।
अब सभी की नजर अदालत की अगली सुनवाई और संभावित latest update पर टिकी है।
निष्कर्ष
देवरिया का यह मामला केवल फर्जी नियुक्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकारी फंड और शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता से भी जुड़ा है। जब करोड़ों रुपये का एरियर भुगतान सवालों के घेरे में हो, तो जांच और कानूनी प्रक्रिया स्वाभाविक है।
आने वाले दिनों में अदालत की कार्रवाई और प्रशासनिक कदम इस केस की दिशा तय करेंगे। फिलहाल, सभी संबंधित पक्ष important guidelines और कानूनी प्रक्रिया के तहत अपने-अपने दावे पेश कर रहे हैं।