3,00,000 की FD करवाने पर SBI से 2 साल बाद कितने रुपये मिलेंगे? समझिए कैलकुलेशन
अगर आप (FD) में निवेश करने की योजना Yojna बना रहे हैं तो ये जानकारी आपके काम की साबित हो सकती है। देश का सबसे बड़ा पब्लिक सेक्टर (सार्वजनिक क्षेत्र) बैंक SBI अपने ग्राहकों को अलग-अलग अवधि की एफडी FD पर आकर्षक ब्याज दरें दे रहा है।कितनी है FD पर ब्याज दर State Bank of India (SBI) की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) स्कीम Scheme निवेशकों के लिए आकर्षक विकल्प बन सकती है। बैंक 2 वर्ष Year से अधिक लेकिन 3 वर्ष Year से कम अवधि वाली एफडी FD FD पर सामान्य नागरिकों को 6.40 प्रतिशत की दर से ब्याज दे रहा है। वहीं, सीनियर सिटिजन के लिए यही ब्याज दर 6.90 प्रतिशत रखी गई है, जिससे उन्हें अतिरिक्त फायदा मिलेगा।
मैच्योरिटी पर कितने रुपये मिलेंगे
उदाहरण के लिए मान लीजिए अगर कोई सामान्य नागरिक करीब 2 साल Year से कुछ अधिक अवधि के लिए 3 लाख lakh रुपये rupye का निवेश करता है, तो मैच्योरिटी पर उसे करीब 3,40,621 रुपये मिलेंगे। इसका मतलब है कि निवेशक को कुल 40,621 रुपये rupye का ब्याज मिल सकता है। वहीं, सीनियर सिटिज़न्स के लिए इसी अवधि और निवेश पर मैच्योरिटी राशि बढ़कर 3,43,988 रुपये rupye हो जाती है, यानी उन्हें सामान्य निवेशकों की तुलना में 3,367 रुपये rupye का अधिक रिटर्न return मिलेगा।
FD में क्यों करें निवेश
फिक्स्ड डिपॉजिट fixed deposit लंबे समय से सुरक्षित निवेश का एक भरोसेमंद साधन माना जाता है। इसमें बाजार के उतार-चढ़ाव का असर नहीं पड़ता और निवेशक को पहले से तय ब्याज दर के अनुसार निश्चित रिटर्न return मिलता है। यही वजह है कि जोखिम से बचने वाले निवेशक, खासकर रिटायर्ड लोग, एफडी FD को प्राथमिकता देते हैं।
SBI की यह स्कीम किसके लिए फायदेमंद
SBI की यह योजना Yojnaon उन लोगों के लिए खासतौर पर फायदेमंद हो सकती है, जो कम जोखिम के साथ स्थिर और सुनिश्चित आय चाहते हैं। सीनियर सिटिजन के लिए अतिरिक्त ब्याज दर इसे और भी आकर्षक बनाती है, जिससे वे अपनी बचत पर बेहतर रिटर्न Return पा सकते हैं।
निवेश से पहले कौन-सी बातें जरूरी
हालांकि, निवेश करने से पहले कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। एफडी FD पर मिलने वाला ब्याज टैक्स Tax के दायरे में आता है, इसलिए निवेशकों को अपनी कुल आय के अनुसार टैक्स Tax प्लानिंग plaining करनी चाहिए। इसके अलावा, अलग-अलग बैंकों bank’s की ब्याज दरों की तुलना करना भी जरूरी है, ताकि बेहतर विकल्प चुना जा सके।