क्या दिन आ गए! BSA और बाबू पर 10-10 हजार का इनाम पुलिस की कई टीमें तलाश में

क्या दिन आ गए! BSA और बाबू पर 10-10 हजार का इनाम पुलिस की कई टीमें तलाश में

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर–देवरिया क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। शिक्षक सुसाइड केस में फरार चल रही देवरिया की निलंबित बीएसए और एक कार्यालय बाबू की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने 10–10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। यह मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग और प्रशासन दोनों पर कई सवाल उठने लगे हैं। पुलिस का कहना है कि आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई है और जल्द ही गिरफ्तारी की उम्मीद है।

यह घटना लगातार चर्चा में है क्योंकि इसमें शिक्षक से कथित रूप से लाखों रुपये की डील और उत्पीड़न के आरोप लगे हैं। मामले को लेकर पुलिस ने इसे गंभीरता से लेते हुए कई टीमें गठित की हैं और संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।

शिक्षक सुसाइड केस में क्या है latest update

गोरखपुर पुलिस के अनुसार, शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या के मामले में देवरिया की निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और बीएसए कार्यालय के लिपिक संजीव सिंह काफी समय से फरार चल रहे हैं।

एफआईआर दर्ज होने के बाद दोनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था, लेकिन उसके बाद से ही वे पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। इसी कारण पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी के लिए 10–10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है।

गोरखपुर के एसएसपी डॉ. कौस्तुभ के मुताबिक, आरोपियों की तलाश के लिए चार पुलिस टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं। देवरिया और आसपास के जिलों में भी संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।

पहले ही हो चुकी है एक आरोपी की गिरफ्तारी

इस मामले में पुलिस ने एक महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए पूर्व हेडमास्टर अनिरुद्ध सिंह को पहले ही गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस जांच के अनुसार, अनिरुद्ध सिंह ही वह व्यक्ति था जिसने शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह का परिचय बीएसए कार्यालय के लिपिक संजीव सिंह से कराया था। आरोप है कि उसी ने कथित रूप से 16 लाख रुपये की डील तय कराई थी।

गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। पुलिस अब इस मामले में आगे की जांच कर रही है।

पुलिस जांच में सामने आए अहम official details

जांच के दौरान पुलिस को कुछ ऐसे साक्ष्य मिले हैं जो इस मामले को और गंभीर बनाते हैं। लेनदेन से जुड़े कुछ प्रमाण मिलने के बाद पुलिस ने केस में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी जोड़ दी हैं।

अब इस पूरे मामले की विवेचना सीओ गोरखनाथ रवि कुमार सिंह को सौंपी गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं की बारीकी से जांच की जा रही है ताकि दोषियों के खिलाफ मजबूत कार्रवाई की जा सके।

क्या है पूरा मामला

मृतक शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह (37) मूल रूप से कुशीनगर जिले के हरैया बुजुर्ग के रहने वाले थे। वह देवरिया जिले के गौरीबाजार स्थित कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत थे।

वह गोरखपुर के गुलरिहा थाना क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज इलाके में अपने परिवार के साथ रह रहे थे।

21 फरवरी की रात उन्होंने अपने घर में फंदे से लटककर आत्महत्या कर ली। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी थी।

सुसाइड नोट में लगाए गए गंभीर आरोप

मृतक शिक्षक ने आत्महत्या से पहले चार पेज का सुसाइड नोट लिखा था।

इस नोट में उन्होंने बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह और पूर्व प्रधानाचार्य अनिरुद्ध सिंह पर 16 लाख रुपये लेने और मानसिक उत्पीड़न करने के गंभीर आरोप लगाए थे।

परिजनों के मुताबिक, शिक्षक काफी समय से मानसिक दबाव में थे। कई बार उन्होंने अपने परिचितों से भी इस समस्या का जिक्र किया था।

पत्नी की तहरीर पर दर्ज हुआ मुकदमा

घटना के बाद 22 फरवरी को शिक्षक की पत्नी गुड़िया ने गुलरिहा थाने में तहरीर दी।

उनकी शिकायत के आधार पर पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया और जांच शुरू की। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि पूर्व हेडमास्टर अनिरुद्ध सिंह ने ही कृष्ण मोहन सिंह सहित अन्य शिक्षकों का परिचय बीएसए कार्यालय के लिपिक से कराया था।

तीन शिक्षकों से 16–16 लाख रुपये लेने का आरोप

जांच में यह भी आरोप सामने आया कि सिर्फ एक नहीं बल्कि तीन शिक्षकों से 16–16 लाख रुपये की डील तय कराई गई थी।

सुसाइड नोट में कृष्ण मोहन सिंह ने लिखा था कि उन्हें बीएसए कार्यालय ले जाकर संजीव सिंह से मिलवाया गया और पैसे के लेनदेन की पूरी बातचीत वहीं हुई।

पुलिस अब इस एंगल से भी जांच कर रही है कि क्या इस तरह की डील अन्य शिक्षकों से भी की गई थी।

पुलिस की कार्रवाई और important guidelines

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच पूरी पारदर्शिता से की जा रही है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए देवरिया और बलिया समेत कई जिलों में छापेमारी जारी है।

प्रशासन की ओर से यह भी संकेत दिए गए हैं कि अगर आरोप सिद्ध होते हैं तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

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