यूपी में इन शिक्षकों के प्रमोशन का कोटा फिर से होगा बहाल, योगी सरकार की ये तैयारी
यूपी के माध्यमिक स्कूलों के शिक्षकों की पदोन्नति का कोटा फिर से बहाल किया जाएगा। योगी सरकार एलटी एवं प्रवक्ता ग्रेड के 50 प्रतिशत पदों को पदोन्नति से भरे जाने के नियम को पुन: लागू करने की तैयारी में है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के गठन के बाद से दोनों संवर्गों में पदोन्नति कोटे से भरे जाने वाले पदों पर पदोन्नतियां रुकी हुई है। दोनो संवर्गों में 50 फ़ीसदी पदों को पदोन्नति कोटे से भरने के नियम हैं। दोनों संवर्गो में पदोन्नति से भरे जाने वाले 12 हजार से अधिक पद खाली पड़े हैं
प्रमोशन कोटे से भरे जाने वाले एलटी एवं प्रवक्ता ग्रेड के रिक्त पदों को शीघ्र भरने के लिए सरकार सहमत हो गई है। जल्द ही दोनो संवर्गों के पदोन्नति वाले शिक्षकों की सूची तैयार कर उसे अन्तिम रूप दिया जाएगा। शासन स्तर से मिले निर्देशों के बाद माध्यमिक शिक्षा विभाग में पदोन्नति के लिए अर्ह शिक्षकों की सूची तैयार करने की कवायद शुरू कर दी गई है। दरअसल, माध्यमिक शिक्षा सेवा अधिनियम में रिक्त पदों का पचास प्रतिशत सीधी भर्ती से तथा पचास प्रतिशत प्रमोशन कोटे से भरे जाने का स्पष्ट प्रावधान है। माध्यमिक शिक्षा सेवा आयोग के अध्याय तीन की धारा 12 में संयुक्त शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय समिति द्वारा शिक्षकों को प्रमोशन के लिए चयन किए जाने का प्रावधान है।
इसी अधिनियम की धारा 18–1 के अंतर्गत कार्यवाहक संस्था प्रधानो का दो महीने से रिक्त पदों पर वरिष्ठ शिक्षक की तदर्थ आधार पर पदोंनति कर अनुमोदन एवं नियमित प्रधानों के समान ही वेतन तक प्रदान करने का प्रावधान रहा। शिक्षा सेवा आयोग के गठन के बाद से लगभग चार वर्षो से न तो एल टी ग्रेड में और न ही प्रवक्ता ग्रेड में पचास प्रतिशत पदोंन्नति कोटे में पदोन्तियां की गई है और न ही कार्यवाहक संस्था प्रधानो का अनुमोदन एवं वेतन भुगतान संभव हो पा रहा है। इसे शिक्षकों के साथ अन्याय मानते हुए विधान मंडल के दोनो सदनों में कई बार उठाया भी जा चुका है लेकिन सरकार की तरफ से हर बार संबंधित मामले में शीघ्र निर्णय लिए जाने का आश्वासन दिया जाता रहा है।
अधिकारियों की मनमानी को माना जा रहा बड़ा कारण
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश प्रवक्ता ओंम प्रकाश त्रिपाठी की माने तो इस गंभीर मामले में शासन में उच्च पदो पर बैठे अधिकारियों की मनमानी सबसे बड़ा कारण रहा है। बकौल श्री त्रिपाठी, शिक्षा सेवा चयन आयोग अधिनियम 2023 में विभिन्न प्रावधानों का समावेश करते समय शिक्षकों की समस्याओं को ध्यान में ही नहीं रखा गया। ऐसे में पूर्व के अधिनियमित व्यवस्थाओ को बहाल कर हो रहे शिक्षको के साथ इस नाइंसाफी को दूर करने की दिशा में सरकार का यह कदम शिक्षकों के पदोन्नति में देरी के जख्म पर मरहम का काम कर सकता है। क्योंकि नियमानुसार, 50% प्रमोशन कोटे में शिक्षको की पदोन्नतियां नहीं हो पा रही हैं। इसके कारण रिक्त पदों पर कार्य करने वाले शिक्षक बिना अनुमोदन व वेतन मिले काम करने पर मजबूर हैं।