टीईटी मुद्दे पर केंद्र के संकेतों से यूपी के दो लाख शिक्षकों में जगी नई उम्मीद टीईटी अनिवार्यता को लेकर सुप्रीम कोर्ट

टीईटी मुद्दे पर केंद्र के संकेतों से यूपी के दो लाख शिक्षकों में जगी नई उम्मीद टीईटी अनिवार्यता को लेकर सुप्रीम कोर्ट

लंबे समय से अनिश्चितता झेल रहे उत्तर प्रदेश के करीब दो लाख शिक्षकों के लिए राहत की खबर सामने आई है। टीईटी अनिवार्यता को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जिन शिक्षकों का भविष्य अधर में लटक गया था, अब उनमें फिर से उम्मीद जागी है।
केंद्र सरकार की पहल से बदला माहौल
केंद्र सरकार ने सभी राज्यों से वर्ष 2011 से पहले नियुक्त पहली से आठवीं कक्षा के शिक्षकों का आधिकारिक विवरण मांगा है।
इस कदम को टीईटी से संभावित राहत की दिशा में बड़ा संकेत माना जा रहा है।
यूपी में ऐसे शिक्षकों की संख्या लगभग 1.86 लाख बताई जा रही है।
चार महीने का संघर्ष, अब दिख रही रोशनी
पिछले चार महीनों से ये शिक्षक अपने कैरियर की सुरक्षा के लिए लगातार आंदोलन कर रहे थे।
लखनऊ से लेकर दिल्ली तक आवाज उठाई गई।
कभी विधायकों से मुलाकात हुई, तो कभी सांसदों को ज्ञापन सौंपे गए।
शिक्षकों ने प्रदेश के शिक्षा राज्यमंत्री, मुख्यमंत्री और यहां तक कि केंद्रीय शिक्षामंत्री तक से मिलकर अपनी बात रखी।
दलील एक ही थी—
बढ़ती उम्र में रोज़गार न छीना जाए, वर्षों की सेवा का सम्मान किया जाए।
जंतर-मंतर तक गूंजा विरोध
दिल्ली के जंतर-मंतर पर देशभर के शिक्षक संगठनों ने एकजुट होकर शक्ति प्रदर्शन किया।
हालांकि, तब तक कोई ठोस समाधान नजर नहीं आया।
अब केंद्र सरकार की यह लेटेस्ट अपडेट शिक्षकों के संघर्ष को नई दिशा देती दिख रही है।
परीक्षा की तैयारी, पर असमंजस बरकरार
टीईटी अनिवार्यता के आदेश के बाद हजारों शिक्षक सीटीईटी / सीईटीटी की तैयारी में जुट गए।
प्रदेश में टीईटी परीक्षा को लेकर फिलहाल कोई ऑफिशियल अनाउंसमेंट नहीं है,
लेकिन सीईटीटी परीक्षा 8 फरवरी को प्रस्तावित है।
इसके लिए बड़ी संख्या में शिक्षकों ने ऑनलाइन आवेदन कर रखा है।
शिक्षक संगठनों की प्रतिक्रिया
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कुमार पांडे का कहना है कि
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शिक्षक मानसिक तनाव में थे।
लेकिन केंद्र सरकार के इस कदम से उनमें फिर से भरोसा लौटा है।
उन्होंने इसे शिक्षकों के लंबे संघर्ष की जीत बताया।
वहीं, अखिल भारतीय शिक्षक संघर्ष मोर्चा के राष्ट्रीय सह-संयोजक अनिल यादव के अनुसार,
यह केंद्र सरकार के सकारात्मक रुख का प्रमाण है।
उनका मानना है कि यूपी के साथ-साथ देशभर के करीब 18 लाख शिक्षकों को इससे राहत मिल सकती है।

निष्कर्ष
टीईटी अनिवार्यता को लेकर बना संकट अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है,
लेकिन केंद्र सरकार की यह पहल एक मजबूत संकेत जरूर है।
अब सभी की निगाहें आने वाले आधिकारिक दिशानिर्देश और अंतिम फैसले पर टिकी हैं।
शिक्षकों को उम्मीद है कि वर्षों की सेवा और अनुभव को देखते हुए सरकार उन्हें न्याय जरूर देगी।

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