Supreme Court के फैसले के बाद हड़कंप, टीईटी मुद्दे, नियमों पर असमंजस, शिक्षकों का बड़ा ऐलान

Supreme Court के फैसले के बाद हड़कंप, टीईटी मुद्दे, नियमों पर असमंजस, शिक्षकों का बड़ा ऐलान

टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) को लेकर हाल ही में आई latest update ने जनपद के शिक्षकों के बीच नई बहस छेड़ दी है। Supreme Court of India के फैसले के बाद सरकार की ओर से स्पष्ट official details सामने न आने से असमंजस की स्थिति बनी हुई है। यही वजह है कि शिक्षक संगठनों में नाराजगी अब खुलकर दिखाई देने लगी है।

शनिवार को संयुक्त शिक्षक संघ ने शामली स्थित वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय में बैठक कर अपनी रणनीति साफ कर दी। शिक्षकों का कहना है कि जब तक सरकार की ओर से स्पष्ट official announcement नहीं आता और नीति पारदर्शी तरीके से सामने नहीं रखी जाती, तब तक वे चुप नहीं बैठेंगे।

सरकार की नीति पर सवाल

बैठक में मौजूद विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों ने साफ कहा कि टीईटी अनिवार्यता को लेकर अभी तक न तो स्पष्ट eligibility मानदंड बताए गए हैं और न ही पुरानी नियुक्तियों के संबंध में ठोस दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

शिक्षकों का तर्क है कि अगर नियम बदलने हैं तो उनके लिए और एक स्पष्ट online process तय किया जाना चाहिए, ताकि भ्रम की स्थिति खत्म हो। कई शिक्षकों ने यह भी कहा कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर अचानक नए नियम लागू करना व्यावहारिक नहीं है।

एक शिक्षक ने बैठक में कहा, “नियमों में पारदर्शिता होनी चाहिए। अगर कोई बदलाव है तो उसका उद्देश्य और प्रक्रिया दोनों साफ होने चाहिए।”

चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा

शिक्षक संगठनों ने आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने का फैसला किया है, ताकि उनकी आवाज सरकार तक प्रभावी ढंग से पहुंच सके।

22 फरवरी: दोपहर 2 बजे से 4 बजे तक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर राष्ट्रव्यापी हैशटैग अभियान चलाया जाएगा।

23 से 25 फरवरी: सभी शिक्षक काली पट्टी बांधकर स्कूलों में शिक्षण कार्य करेंगे। यह विरोध का शांतिपूर्ण प्रतीक होगा।

26 फरवरी: दोपहर 3 बजे जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर धरना प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद जिलाधिकारी कार्यालय तक पैदल मार्च कर प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा जाएगा।

मार्च का तीसरा सप्ताह: दिल्ली के रामलीला मैदान में देशभर के शिक्षकों की महारैली आयोजित करने और केंद्र सरकार का घेराव करने की तैयारी है।

सम्मान और अधिकार की लड़ाई

शिक्षक संगठनों का कहना है कि यह आंदोलन केवल परीक्षा की अनिवार्यता का मुद्दा नहीं है, बल्कि शिक्षकों के सम्मान और भविष्य से जुड़ा प्रश्न है। उनका मानना है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार जरूरी है, लेकिन किसी भी बदलाव से पहले जमीनी हकीकत को समझना भी उतना ही आवश्यक है।

उन्होंने यह भी मांग की है कि अगर सरकार शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए कदम उठा रही है, तो उससे जुड़े government benefits, प्रशिक्षण व्यवस्था और स्पष्ट दिशा-निर्देश भी साथ में जारी किए जाएं। केवल आदेश जारी कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके क्रियान्वयन की पारदर्शी प्रक्रिया भी जरूरी है।

शिक्षकों से अपील

संघ के प्रतिनिधियों ने जनपद के सभी शिक्षकों से एकजुट होकर आंदोलन में भाग लेने की अपील की है। उनका कहना है कि जब तक नीति स्पष्ट नहीं होगी और सभी पक्षों को भरोसे में लेकर निर्णय नहीं लिया जाएगा, तब तक विरोध जारी रहेगा।

फिलहाल सभी की निगाहें सरकार की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। अगर जल्द ही स्पष्ट official details और व्यवहारिक दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए, तो यह आंदोलन व्यापक रूप ले सकता है।

निष्कर्ष

टीईटी अनिवार्यता का मुद्दा अब केवल नियमों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और संवाद की मांग बन गया है। शिक्षकों की अपेक्षा है कि सरकार जल्द ही स्पष्ट नीति जारी करे, ताकि असमंजस खत्म हो और शिक्षा का माहौल प्रभावित न हो। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार इस बढ़ते असंतोष पर क्या कदम उठाती है।

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