टीईटी अनिवार्यता हटाने की मांग तेज, शिक्षकों ने शुरू किया पोस्टकार्ड अभियान

टीईटी अनिवार्यता हटाने की मांग तेज, शिक्षकों ने शुरू किया पोस्टकार्ड अभियान

उत्तर प्रदेश में टीईटी (Teacher Eligibility Test) की अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों के बीच असमंजस और चिंता लगातार बढ़ रही है। इसी मुद्दे को लेकर पथरदेवा ब्लॉक में शिक्षकों ने एक अनोखा और शांतिपूर्ण तरीका अपनाते हुए पोस्टकार्ड अभियान शुरू किया है। इस अभियान के जरिए शिक्षकों ने अपनी मांग देश के शीर्ष संवैधानिक पदों तक पहुंचाने की पहल की है।
शनिवार को भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश जूनियर हाई स्कूल पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ, पथरदेवा की एक अहम बैठक आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता ब्लॉक अध्यक्ष एवं प्रांतीय संयुक्त मंत्री नरेंद्र सिंह ने की, जिसमें संगठन के कई प्रमुख पदाधिकारी शामिल हुए।

बैठक में बनी आंदोलन की रणनीति
बैठक के दौरान मंडल महामंत्री अशरफ अली खान, कोषाध्यक्ष महिमा प्रसाद और संरक्षक ओमप्रकाश जायसवाल सहित ब्लॉक कार्यकारिणी के सदस्यों ने टीईटी से जुड़े मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की।
चर्चा के बाद यह तय किया गया कि टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग को लेकर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, भारत के मुख्य न्यायाधीश, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री तथा केंद्र और राज्य के नेता प्रतिपक्ष को ज्ञापन भेजा जाएगा।

इसके लिए शिक्षकों ने ईमेल और पोस्टकार्ड दोनों माध्यमों का सहारा लिया। सामूहिक प्रयास के तहत 500 से अधिक पोस्टकार्ड भेजे गए, जिनमें शिक्षकों ने अपनी समस्याओं और मांगों को विस्तार से लिखा।
2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों की बढ़ी चिंता
शिक्षकों का कहना है कि वर्ष 2011 से पहले उनकी नियुक्ति उस समय की लागू नियमावली के अनुसार हुई थी। उस दौर में न तो टीईटी अनिवार्य था और न ही शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम पूरी तरह लागू हुआ था।

हाल ही में टीईटी अनिवार्यता लागू होने की चर्चाओं के बाद कई पुराने शिक्षकों में असमंजस की स्थिति बन गई है। उनका कहना है कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर नई शर्तें लागू करना उचित नहीं होगा।
शिक्षकों की मुख्य मांग क्या है?
शिक्षक संगठनों का स्पष्ट कहना है कि 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से छूट दी जानी चाहिए। उनका तर्क है कि इससे उनके सेवा अधिकार, अनुभव और सम्मान सुरक्षित रहेंगे।
कई शिक्षकों का मानना है कि शिक्षा व्यवस्था में अनुभव भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि नई पात्रता परीक्षाएं। इसलिए पुराने नियमों के तहत नियुक्त शिक्षकों को अलग श्रेणी में रखा जाना चाहिए।
बड़ी संख्या में शिक्षक रहे मौजूद
बैठक और पोस्टकार्ड अभियान में बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल हुए। इस दौरान वीरेंद्र मिश्रा, अभिषेक पांडेय, उमाशंकर तिवारी, बृजलाल यादव, संजय कुशवाहा, राम आशीष प्रसाद, चंद्रिका राम, मुअज्जम अली, डॉ. जाकिर हुसैन, सुमन मिश्रा, प्रतिभा मिश्रा, श्वेता पांडेय, हेना वारसी, संजय सिंह, राजेंद्र प्रसाद, शुभम शर्मा, सैफुद्दीन अली अंसारी, सरवर आलम, आफताब आलम, रामाशीष प्रसाद भारती, रामानंद यादव, मोहम्मद मुस्लिम और विजय नासिर अली सहित कई शिक्षक मौजूद रहे।

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