टीईटी अनिवार्यता के विरोध में ‘शिक्षक की पाती’ अभियान बढ़ा, शिक्षकों की बढ़ती भागीदारी के बाद फैसला

टीईटी अनिवार्यता के विरोध में ‘शिक्षक की पाती’ अभियान बढ़ा, शिक्षकों की बढ़ती भागीदारी के बाद फैसला

लखनऊ: शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर चल रहे विरोध के बीच शिक्षकों का समर्थन लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। इसी उत्साह को देखते हुए अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ ने ‘शिक्षक की पाती’ अभियान की अवधि बढ़ाने का निर्णय लिया है। पहले यह अभियान एक तय समय तक चलना था, लेकिन शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी के कारण इसे एक सप्ताह और आगे बढ़ा दिया गया।

टीईटी अनिवार्यता को लेकर उठ रही आवाज

महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक सुशील कुमार पांडेय के अनुसार, यह अभियान उन शिक्षकों के लिए चलाया जा रहा है जो आरटीई एक्ट 2009 और एनसीटीई की 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना से पहले नियुक्त हुए थे। शिक्षक संगठनों की मांग है कि ऐसे शिक्षकों पर TET अनिवार्यता लागू न की जाए।

इस मांग को लेकर राज्य के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में शिक्षक अपनी बात देश के शीर्ष पदों तक पहुंचा रहे हैं। कई शिक्षक पोस्टकार्ड, ई-मेल और अन्य ऑनलाइन माध्यमों के जरिए अपनी मांगें राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, भारत के मुख्य न्यायाधीश, नेता प्रतिपक्ष और मुख्यमंत्री तक भेज रहे हैं।

शिक्षकों से अभियान में जुड़ने की अपील

अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने शिक्षकों से अपील की है कि वे इस अभियान में अधिक से अधिक भाग लें। उनका कहना है कि यह मुद्दा केवल एक नियम या प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शिक्षकों के सम्मान, सेवा सुरक्षा और अधिकारों से भी जुड़ा हुआ विषय है।

उनके अनुसार, अगर अधिक शिक्षक अपनी आवाज दर्ज कराते हैं तो इस मांग को सरकार और नीति-निर्माताओं तक मजबूती से पहुंचाया जा सकेगा।

अभियान की नई समय-सीमा

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के मीडिया प्रभारी हरिशंकर राठौर ने जानकारी दी कि ‘शिक्षक की पाती’ अभियान पहले 9 मार्च से 15 मार्च तक निर्धारित था। लेकिन शिक्षकों के उत्साह और सहभागिता को देखते हुए इसे 16 मार्च से अगले एक सप्ताह तक जारी रखने का फैसला किया गया है।

इस आंदोलन में अब तक 23 शिक्षक संगठन एक साथ जुड़कर अपनी मांगों को लेकर प्रयास कर रहे हैं।

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