शिक्षक भरवा रहे SIR फार्म, बच्चे गेम खेलकर बिता रहे समय… पढ़ाई का बंटाधार; 10 दिसंबर से परीक्षाएं

शिक्षक भरवा रहे SIR फार्म, बच्चे गेम खेलकर बिता रहे समय… पढ़ाई का बंटाधार; 10 दिसंबर से परीक्षाएं

लखनऊ के परिषदीय स्कूलों में 10 दिसंबर से कक्षा 1 से 8 तक की परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं। लेकिन ठीक परीक्षा से पहले स्कूलों में पढ़ाई का माहौल बिल्कुल बिगड़ गया है। वजह है—शिक्षकों को SIR फार्म भरवाने के लिए बीएलओ की ड्यूटी पर भेज देना।

इस अतिरिक्त ड्यूटी ने बच्चों की पढ़ाई पर गंभीर असर डाला है।

शनिवार को राजधानी के तीन अलग-अलग स्कूलों का हाल जानने के दौरान साफ दिखा कि पढ़ाई लगभग ठप हो चुकी है। बच्चे अपनी कक्षाओं में जैसे-तैसे समय काट रहे हैं। कहीं बच्चे खुद एक-दूसरे को पढ़ा रहे थे, तो कहीं हाल और भी खराब मिला—बच्चे गेम खेलते दिखे।

1. चपरुआ खेड़ा प्राथमिक विद्यालय — दो शिक्षक ड्यूटी पर, पढ़ा रहा था सिर्फ एक

कृष्णा नगर क्षेत्र के चपरुआ खेड़ा के प्राथमिक विद्यालय में कुल तीन शिक्षक तैनात हैं।

• इनमें से दो शिक्षकों की बीएलओ के रूप में ड्यूटी लगी हुई थी।

• स्कूल में सिर्फ एक शिक्षक मिले, जो केवल आठवीं कक्षा को पढ़ा रहे थे।

• बाकी कक्षाओं में बच्चे अपने आप ही समूह बनाकर एक-दूसरे को समझाने की कोशिश कर रहे थे।

परीक्षा से पहले यह स्थिति छात्रों के भविष्य के लिए ठीक नहीं मानी जा रही।

2. पंडित खेड़ा प्राथमिक विद्यालय — वही स्थिति, वही परेशानी

कृष्णा नगर के पंडित खेड़ा स्थित प्राथमिक विद्यालय में भी कुल तीन शिक्षक तैनात हैं।

• यहां भी दो शिक्षक बीएलओ की जिम्मेदारी में व्यस्त मिले।

• स्कूल में एक ही अध्यापक मौजूद था, जो आठवीं कक्षा को पढ़ा रहा था।

• अन्य कक्षाओं में बच्चे बिना शिक्षक के खुद ही पढ़ाई करने की कोशिश कर रहे थे।

लगातार शिक्षकों की अनुपस्थिति से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और परीक्षा नजदीक होने के बावजूद किसी तरह की तैयारी नहीं हो पा रही।

3. केसरी खेड़ा प्राथमिक विद्यालय — सबसे खराब हाल, एक भी शिक्षक मौजूद नहीं

कृष्णा नगर क्षेत्र के केसरी खेड़ा स्थित स्कूल का हाल सबसे चिंताजनक मिला।

• यहां भी तीन शिक्षक तैनात हैं, लेकिन दो को बीएलओ की ड्यूटी पर भेज दिया गया है।

• जो एक शिक्षक बचा था, उसकी ड्यूटी किसी दूसरे स्कूल में लगा दी गई।

• नतीजा—पूरे स्कूल में एक भी शिक्षक मौजूद नहीं था।

शिक्षक न होने की वजह से छोटे-छोटे बच्चे स्कूल में गेम खेलकर समय बिता रहे थे। परीक्षा की तैयारी का दूर-दूर तक कोई माहौल नहीं दिखा।

निष्कर्ष

परीक्षाओं से ठीक पहले शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कामों में लगाना बच्चों की पढ़ाई पर बड़ा असर डाल रहा है। यह स्थिति न केवल शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित करती है, बल्कि बच्चों के भविष्य पर भी सीधा असर डालती है।

अभिभावक भी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि आखिर स्कूल में शिक्षक न होने पर बच्चे परीक्षा की तैयारी कैसे कर पाएंगे।

Leave a Comment