शिक्षकों के समायोजन पर राहत बरकरार, 17 फरवरी तक बढ़ी रोक
प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए एक बार फिर राहत की खबर सामने आई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने शिक्षकों के समायोजन (Adjustment) से जुड़े मामलों में लगी अंतरिम रोक को अगली सुनवाई तक बढ़ा दिया है। अब इस मामले पर 17 फरवरी को अंतिम सुनवाई होने की संभावना है।
हाईकोर्ट का ताजा आदेश क्या कहता है?
हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने इससे पहले 13 जनवरी को शिक्षकों के समायोजन की प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाई थी। अब न्यायालय ने साफ कर दिया है कि अगली सुनवाई तक यह रोक जारी रहेगी। यानी फिलहाल किसी भी शिक्षक का समायोजन नहीं किया जाएगा।
यह आदेश न्यायमूर्ति श्री प्रकाश सिंह की एकल पीठ ने दिया है, जहां कुल 130 अलग-अलग याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की गई।
सुनवाई के दौरान क्या हुआ?
सोमवार को याचिकाकर्ता शिक्षकों और संबंधित पक्षों की ओर से जवाबी शपथ पत्र और प्रत्युत्तर शपथ पत्र दाखिल किए गए। सभी दस्तावेजों पर विचार करते हुए कोर्ट ने माना कि मामले की गहराई से सुनवाई जरूरी है। इसी कारण अंतिम निर्णय से पहले अंतरिम रोक को आगे बढ़ा दिया गया।
शिक्षकों के लिए इसका क्या मतलब है?
इस फैसले से उन शिक्षकों को अस्थायी राहत मिली है, जिन्होंने समायोजन प्रक्रिया को लेकर आपत्ति दर्ज कराई थी। फिलहाल किसी भी तरह की प्रशासनिक जल्दबाजी पर ब्रेक लग गया है। शिक्षक संगठनों का मानना है कि इससे पात्रता (Eligibility) और नियमों (Important Guidelines) की सही जांच का मौका मिलेगा।
आगे क्या उम्मीद करें?
अब सभी की नजरें 17 फरवरी की सुनवाई पर टिकी हैं। उसी दिन कोर्ट इस पूरे मामले में अंतिम रुख साफ कर सकता है। अगर कोई नया official announcement होता है, तो उसका सीधा असर शिक्षकों के भविष्य और सरकार की नीति पर पड़ेगा।
निष्कर्ष
शिक्षकों के समायोजन को लेकर चल रहा यह मामला फिलहाल यथास्थिति में बना हुआ है। हाईकोर्ट का यह फैसला सरकार और शिक्षकों—दोनों के लिए अहम है। अंतिम निर्णय आने तक सभी संबंधित पक्षों को इंतजार करना होगा, क्योंकि यही फैसला आगे की दिशा तय करेगा