यूपी के स्कूलों में गर्मी की छुट्टियां कब से? जानिए पूरी स्थिति
अप्रैल महीने की शुरुआत के साथ ही उत्तर प्रदेश में गर्मी ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। सुबह के समय भले ही मौसम थोड़ा सामान्य लगे, लेकिन दोपहर होते-होते तेज धूप लोगों को परेशान करने लगती है। ऐसे में सबसे ज्यादा असर स्कूल जाने वाले बच्चों पर पड़ता है। अब जैसे-जैसे तापमान बढ़ रहा है, वैसे-वैसे छात्रों और अभिभावकों के बीच एक ही सवाल बार-बार उठ रहा है—आखिर गर्मी की छुट्टियां कब से शुरू होंगी।
प्रदेश में हर साल मई-जून के बीच स्कूलों में लंबी छुट्टियां दी जाती हैं, ताकि बच्चों को तेज गर्मी और लू से बचाया जा सके। इस बार भी हालात कुछ ऐसे ही बनते नजर आ रहे हैं।
10 अप्रैल के बाद बढ़ेगी गर्मी
मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार, 10 अप्रैल के बाद उत्तर प्रदेश में गर्मी का असर और तेज हो सकता है। तापमान धीरे-धीरे बढ़ते हुए कई जिलों में ऊंचे स्तर तक पहुंच सकता है। दोपहर के समय बाहर निकलना मुश्किल होने लगता है और यही स्थिति स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए भी चुनौती बन जाती है।
ग्रामीण इलाकों में जहां कई स्कूलों में पंखे और ठंडक की व्यवस्था सीमित होती है, वहां बच्चों को ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ती है। वहीं शहरों में भी तेज धूप और गर्म हवाएं बच्चों की दिनचर्या को प्रभावित करती हैं।
हर साल मई में क्यों पड़ती हैं छुट्टियां
अगर पिछले कुछ सालों के पैटर्न को देखा जाए, तो उत्तर प्रदेश में आमतौर पर मई के तीसरे या चौथे हफ्ते से गर्मी की छुट्टियां शुरू होती हैं। इसका सीधा कारण है उस समय पड़ने वाली तेज गर्मी।
अप्रैल के आखिर तक तापमान काफी बढ़ जाता है और मई में हालात और ज्यादा कठिन हो जाते हैं। ऐसे में स्कूलों को बंद करना जरूरी हो जाता है ताकि बच्चों की सेहत पर असर न पड़े।
इसी वजह से हर साल लगभग एक जैसे समय पर छुट्टियां घोषित की जाती हैं।
इस बार कब से शुरू हो सकती हैं छुट्टियां
मौजूदा जानकारी और पिछले साल के आधार पर माना जा रहा है कि इस बार भी उत्तर प्रदेश के स्कूलों में 20 मई से 15 जून तक गर्मी की छुट्टियां हो सकती हैं।
हालांकि अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन शिक्षा विभाग हर साल इसी समय के आसपास अवकाश घोषित करता है। इसलिए संभावना यही है कि तारीखों में बहुत ज्यादा बदलाव नहीं होगा।
अंतिम फैसला शासन के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगा।
अभी छात्रों को करना होगा इंतजार
फिलहाल छात्रों को करीब डेढ़ महीने और स्कूल जाना होगा। अप्रैल और मई के पहले हिस्से में नियमित कक्षाएं चलती रहेंगी।
इस दौरान कई बार स्कूल अपने स्तर पर समय में बदलाव भी करते हैं, जैसे सुबह की शिफ्ट कर देना या जल्दी छुट्टी करना, ताकि बच्चों को दोपहर की तेज गर्मी से बचाया जा सके।
गर्मी में स्कूल जाना क्यों हो जाता है मुश्किल
जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती है, स्कूल जाना बच्चों के लिए आसान नहीं रहता। सुबह घर से निकलते समय ही धूप तेज लगने लगती है और छुट्टी के समय तो गर्मी और ज्यादा हो जाती है।
कई जगहों पर बच्चे पैदल या साइकिल से स्कूल जाते हैं। ऐसे में लू लगने का खतरा भी बढ़ जाता है। छोटे बच्चों के लिए यह स्थिति और भी कठिन हो जाती है।
इसी को ध्यान में रखते हुए हर साल गर्मी की छुट्टियां तय की जाती हैं।
छुट्टियों का इंतजार क्यों करते हैं बच्चे
गर्मी की छुट्टियां बच्चों के लिए साल का सबसे पसंदीदा समय होती हैं। इस दौरान उन्हें रोज स्कूल जाने से छुटकारा मिल जाता है और खेलने-कूदने का पूरा मौका मिलता है।
कई बच्चे अपने गांव या रिश्तेदारों के यहां जाते हैं, जहां वे खुलकर समय बिताते हैं। वहीं कुछ बच्चे घर पर ही दोस्तों के साथ खेलते हैं और अपनी पसंद की गतिविधियों में समय लगाते हैं।
समर कैंप का भी होता है आयोजन
गर्मी की छुट्टियों के दौरान कई स्कूलों में समर कैंप भी आयोजित किए जाते हैं। इन कैंप का मकसद बच्चों को खाली समय में कुछ नया सिखाना होता है।
इनमें बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ ड्राइंग, म्यूजिक, डांस, खेलकूद और अन्य गतिविधियों में हिस्सा लेने का मौका मिलता है। इससे बच्चों का आत्मविश्वास भी बढ़ता है और वे नई चीजें सीखते हैं।
इस बार भी लग सकते हैं समर कैंप
माना जा रहा है कि इस बार भी 20 मई से 15 जून के बीच कुछ स्कूलों में समर कैंप लगाए जा सकते हैं। हालांकि यह सभी स्कूलों में अनिवार्य नहीं होता, लेकिन कई संस्थान इसे आयोजित करते हैं।
इन कैंप में बच्चे सुबह के समय आते हैं और कुछ घंटों तक अलग-अलग गतिविधियों में भाग लेते हैं। इससे उनका समय भी अच्छा गुजरता है और वे गर्मी के बीच भी सक्रिय बने रहते हैं।
अभिभावकों की भी बढ़ती चिंता
गर्मी बढ़ने के साथ-साथ अभिभावकों की चिंता भी बढ़ जाती है। छोटे बच्चों को तेज धूप में स्कूल भेजना कई बार मुश्किल फैसला होता है।
इसलिए कई अभिभावक चाहते हैं कि छुट्टियां समय से पहले शुरू हो जाएं या स्कूल का समय कम कर दिया जाए। हालांकि इस पर अंतिम निर्णय प्रशासन द्वारा ही लिया जाता है।