छात्र पिटाई का मामला: स्कूल में जांच शुरू, विद्यालय पर भी उठे सवाल
गोंडा
गोंडा जिले के करनैलगंज क्षेत्र में एक निजी विद्यालय में कक्षा दो के छात्र के साथ हुई मारपीट का मामला अब प्रशासनिक जांच के दायरे में आ गया है। घटना सामने आने के बाद शिक्षा विभाग और पुलिस दोनों स्तरों पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
बीईओ ने स्कूल पहुंचकर दर्ज किए बयान
करनैलगंज के ग्राम चतुरूपुर नकार स्थित एक निजी विद्यालय में छात्र की कथित बेरहमी से पिटाई के मामले में शनिवार को खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) सुशील कुमार सिंह ने मौके पर पहुंचकर जांच की।
उन्होंने पीड़ित छात्र, उसके परिजनों और विद्यालय के अन्य बच्चों के बयान दर्ज किए।
कक्षा पांच की मान्यता, पढ़ाई आठ तक
जांच के दौरान एक गंभीर तथ्य सामने आया। प्रारंभिक जांच में यह पाया गया कि संबंधित एमआरजी पब्लिक स्कूल को केवल कक्षा पांच तक ही मान्यता प्राप्त है, जबकि विद्यालय में कक्षा आठ तक पढ़ाई कराई जा रही थी।
यह मामला शिक्षा विभाग की मान्यता और दिशा-निर्देशों के उल्लंघन की ओर इशारा करता है।
डर के कारण चुप रहे बच्चे
विद्यालय में पढ़ने वाले अन्य छात्रों ने बयान में बताया कि जब शिक्षक द्वारा छात्र की पिटाई की जा रही थी, तब कक्षा में मौजूद सभी बच्चे डर के कारण चुप बैठे रहे।
किसी भी छात्र की हिम्मत विरोध करने की नहीं हुई, जिससे स्कूल के अंदर के माहौल और अनुशासन पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
जांच रिपोर्ट के बाद होगी आगे की कार्रवाई
बीईओ सुशील कुमार सिंह ने बताया कि पूरे मामले की जांच रिपोर्ट तैयार कर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) को सौंपी जाएगी।
रिपोर्ट के आधार पर नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी, जिसमें स्कूल की मान्यता और प्रबंधन की भूमिका की भी समीक्षा हो सकती है।
एबीवीपी ने पीड़ित परिवार से की मुलाकात
इस मामले में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की टीम भी पीड़ित छात्र के घर पहुंची।
प्रांत सह मंत्री मुकेश सोनी, जिला संगठन मंत्री हरिओम और अमरेश प्रजापति ने परिजनों से मुलाकात कर पूरी घटना की जानकारी ली और बच्चे का हालचाल जाना।
पदाधिकारियों ने कहा कि इस प्रकरण से जिलाधिकारी को अवगत कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की जाएगी।
पुलिस कार्रवाई जारी, एफआईआर दर्ज
सहायक पुलिस अधीक्षक अभिषेक दावाच्या ने बताया कि पीड़ित पक्ष की तहरीर के आधार पर करनैलगंज थाने में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।
मामले में विधिक कार्रवाई प्रचलित है और प्रभारी निरीक्षक को आवश्यक दिशा-निर्देश दे दिए गए हैं।
निष्कर्ष
यह मामला सिर्फ एक छात्र की पिटाई तक सीमित नहीं है, बल्कि स्कूलों की मान्यता, बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही से भी जुड़ा है।
अब निगाहें प्रशासन और शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं कि दोषियों पर कितनी सख्ती होती है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।