फर्जी दस्तावेजों से नौकरी करने वाले 7 शिक्षक बर्खास्त, 12 साल बाद हुई कार्रवाई
बेसिक शिक्षा विभाग में लंबे समय से चल रहा एक मामला आखिरकार नतीजे तक पहुंच गया। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी कर रहे 7 शिक्षकों की सेवा समाप्त कर दी गई है। यह पूरा मामला करीब 12 साल तक जांच में उलझा रहा, जिसके बाद अब जाकर final action लिया गया है।
कैसे शुरू हुई जांच
इस मामले की शुरुआत साल 2017 में हुई थी। उस समय जांच में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई थीं। कुल 31 ऐसे शिक्षक मिले थे, जिनके दस्तावेज पूरी तरह फर्जी थे, लेकिन फिर भी वे नियमित रूप से वेतन ले रहे थे। उस दौरान कुछ लोगों पर तुरंत कार्रवाई हुई, लेकिन कई मामलों में प्रक्रिया लंबी खिंचती चली गई।
बीच में क्यों लटका मामला
जांच आगे बढ़ने के बावजूद कार्रवाई समय पर नहीं हो पाई। विभागीय स्तर पर ढिलाई और फाइलों का अटकना इसकी बड़ी वजह रही। यहां तक कि एक लिपिक की भूमिका भी सवालों में रही, जिस पर कार्रवाई टालने के आरोप लगे।
बाद में अप्रैल 2025 में फिर से जांच के आदेश दिए गए। इसके बाद नए सिरे से पूरी फाइल खंगाली गई।
दोबारा जांच में फिर वही सच
जब दोबारा जांच हुई, तो फिर से यही सामने आया कि कुछ शिक्षक फर्जी अभिलेखों के सहारे नौकरी कर रहे थे। जांच पूरी होने के बाद फाइल सितंबर 2025 में डीएम की अध्यक्षता वाली समिति को भेजी गई।
बीच में स्वास्थ्य कारणों और अन्य देरी की वजह से फाइल पर अंतिम हस्ताक्षर भी समय पर नहीं हो पाए। लेकिन आखिरकार सभी साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई तय हो गई।
किन-किन विद्यालयों में थे ये शिक्षक
अब जिन 7 शिक्षकों की सेवा समाप्त की गई है, वे अलग-अलग प्राथमिक विद्यालयों में तैनात थे:
प्राथमिक विद्यालय नगरिया चितायन, किशनी – हरवेंद्र कुमार
प्राथमिक विद्यालय नगला मूंझ, बरनाहल – शीला देवी
प्राथमिक विद्यालय शाहजहांपुर, घिरोर – ऊषा देवी
प्राथमिक विद्यालय मनिगांव, किशनी – चंद्रकांत
प्राथमिक विद्यालय रंपुरा, किशनी – वीरपाल सिंह
प्राथमिक विद्यालय प्रहलादपुर, बरनाहल – विकासचंद्र
प्राथमिक विद्यालय बरनाहल – सुरेखा
क्या संदेश देता है यह मामला
यह मामला एक साफ संकेत देता है कि गलत तरीके से मिली नौकरी लंबे समय तक नहीं टिकती। भले ही कार्रवाई में समय लगे, लेकिन जांच पूरी होने के बाद सख्त कदम उठाए ही जाते हैं।
शिक्षा विभाग जैसे संवेदनशील क्षेत्र में पारदर्शिता और सही चयन बेहद जरूरी है। ऐसे मामलों पर कार्रवाई से सिस्टम में भरोसा बना रहता है।