दुखद खबर:- CTET परीक्षा के दौरान बेसिक शिक्षक की तबीयत बिगड़ी, उपचार के बीच निधन
मुजफ्फरनगर से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) देने मेरठ गए एक सहायक अध्यापक की तबीयत अचानक परीक्षा केंद्र पर ही बिगड़ गई। बाद में अस्पताल में भर्ती कराने के बावजूद उनकी जान नहीं बच सकी। इस घटना के बाद शिक्षकों में गहरा शोक है और कई सवाल भी उठ रहे हैं।
परीक्षा केंद्र पर बिगड़ी तबीयत
कस्बा पुरकाजी निवासी 48 वर्षीय वैभव सिंघल, जो वर्तमान में मुजफ्फरनगर के शांतिनगर में अपने परिवार के साथ रहते थे, 8 फरवरी को मेरठ में CTET परीक्षा देने गए थे। वे पुरकाजी क्षेत्र के गांव बढ़ीवाला स्थित कंपोजिट विद्यालय में सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत थे।
बताया गया कि परीक्षा के दौरान ही उनकी तबीयत अचानक खराब हो गई और वे अचेत हो गए। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत उन्हें मेरठ के सुभारती मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उन्हें ICU में रखा गया। कई दिनों तक उपचार चला, लेकिन शुक्रवार सुबह उनका निधन हो गया।
परिवार भी शिक्षा सेवा से जुड़ा
वैभव सिंघल का पूरा परिवार शिक्षा क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। उनकी पत्नी दीपा भोपा रोड स्थित जट मुंझेड़ा गांव के प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक हैं। उनकी बहन भी पुरकाजी क्षेत्र के एक विद्यालय में अध्यापन कार्य कर रही हैं। ऐसे में यह घटना सिर्फ एक परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे शिक्षक समाज के लिए गहरा आघात है।
ब्रेन हेमरेज की आशंका, आधिकारिक पुष्टि बाकी
शिक्षक संगठनों के पदाधिकारियों के अनुसार, वैभव सिंघल को ब्रेन हेमरेज हुआ था। हालांकि प्रशासन की ओर से अभी तक मेडिकल रिपोर्ट की official details सार्वजनिक नहीं की गई हैं। एडीएम (वित्त एवं राजस्व) गजेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि शिक्षकों द्वारा ब्रेन हेमरेज की बात कही गई है, लेकिन उन्होंने स्वयं मेडिकल रिपोर्ट नहीं देखी है।
यह latest update सामने आने के बाद जिले में शोक की लहर है। उनका अंतिम संस्कार मुजफ्फरनगर के भोपा रोड स्थित श्मशान घाट पर किया गया, जहां प्रशासनिक अधिकारियों और शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों ने अंतिम विदाई दी।
TET की अनिवार्यता पर उठे सवाल
भाकियू शिक्षक प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष रामरतन वर्मा सहित कई शिक्षक नेताओं का कहना है कि टीईटी की अनिवार्यता को लेकर वैभव मानसिक दबाव में थे। उनका तर्क है कि पहले से कार्यरत शिक्षकों के लिए eligibility से जुड़े नियमों और परीक्षा की अनिवार्यता पर सरकार को पुनर्विचार करना चाहिए।
शिक्षकों का कहना है कि जब कोई शिक्षक वर्षों से सेवा दे रहा हो, तब बार-बार परीक्षा और certification का दबाव कई बार मानसिक तनाव बढ़ा देता है। यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था से जुड़ा प्रश्न है। शिक्षक संगठनों ने सरकार से official announcement जारी कर स्पष्ट important guidelines तय करने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाएं न हों।
मानसिक दबाव और कार्य प्रणाली पर चर्चा जरूरी
आज के समय में सरकारी सेवाओं में नियम, online process, दस्तावेजी formalities और eligibility शर्तें लगातार बदलती रहती हैं। कई बार जानकारी की कमी या अस्पष्टता भी चिंता का कारण बन जाती है। ऐसे मामलों में स्पष्ट communication और practical समाधान बेहद जरूरी हो जाता है।
शिक्षक समाज की मांग है कि कार्यरत शिक्षकों को government benefits और नियमों के संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए जाएं। यदि कोई नया नियम लागू होता है तो उसके लिए पर्याप्त समय और सरल प्रक्रिया उपलब्ध कराई जाए।
निष्कर्ष
वैभव सिंघल की मृत्यु एक बेहद पीड़ादायक घटना है। एक शिक्षक, जो बच्चों का भविष्य संवारने में जुटा था, परीक्षा के तनाव और अचानक स्वास्थ्य संकट के बीच जिंदगी हार गया। यह घटना सिर्फ शोक का विषय नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में नीतिगत स्पष्टता और मानवीय संवेदनशीलता की जरूरत का संकेत भी है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार और संबंधित विभाग इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और क्या भविष्य में ऐसे शिक्षकों के लिए कोई व्यावहारिक समाधान सामने आता है।