प्रधानाध्यापिका से मारपीट का वीडियो वायरल, स्कूल में हंगामे से मचा बवाल
प्रखंड क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय मंडल टोल, कमलदह से जुड़ा एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में विद्यालय की प्रधानाध्यापिका ज्योति कुमारी के साथ कथित रूप से दुर्व्यवहार होते हुए देखा जा सकता है। वायरल फुटेज में एक महिला उन्हें बाल पकड़ते और गला दबाते नजर आ रही है। हालांकि, इस वीडियो की आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हो सकी है।
स्कूल की अनियमितताओं को लेकर बढ़ा विवाद
मिली जानकारी के अनुसार, सोमवार को विद्यालय में कथित अनियमितताओं को लेकर दर्जनों ग्रामीण स्कूल परिसर पहुंचे थे। ग्रामीणों का आरोप है कि विद्यालय में पढ़ाई की स्थिति ठीक नहीं है और मध्याह्न भोजन योजना में भी लगातार गड़बड़ी हो रही है।
इसी दौरान जब प्रधानाध्यापिका द्वारा वहां मौजूद लोगों का वीडियो बनाया जाने लगा, तो कुछ लोगों ने इसका विरोध किया। बताया जा रहा है कि इसी बात को लेकर पहले कहासुनी हुई, जो बाद में हाथापाई में बदल गई।
मध्याह्न भोजन को लेकर गंभीर आरोप
वायरल वीडियो में ग्रामीण विद्यालय की शिक्षा व्यवस्था और मिड-डे मील योजना को लेकर नाराजगी जताते दिख रहे हैं। विद्यालय की रसोईया ममता देवी ने आरोप लगाया है कि मध्याह्न भोजन तैयार करने के लिए प्रधानाध्यापिका द्वारा तय मात्रा से कम सामग्री उपलब्ध कराई जाती थी।
इन आरोपों के बाद शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
अधिकारियों ने किया स्कूल का निरीक्षण
मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्चाधिकारियों के निर्देश पर प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी मनोज कुमार और मध्याह्न भोजन योजना के सुपरवाइजर इंद्रेश कुमार ने विद्यालय का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने बताया कि निरीक्षण के बाद तैयार की गई रिपोर्ट जल्द ही उच्च स्तर पर भेजी जाएगी, ताकि आगे की कार्रवाई तय की जा सके।
शिक्षक संगठन ने जताई कड़ी नाराजगी
इस घटना को लेकर अराजपत्रित कर्मचारी शिक्षक संघ के अध्यक्ष विनोद बिहारी मंडल ने प्रधानाध्यापिका के साथ हुए कथित अमानवीय व्यवहार की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में विद्यालय परिसर में इस तरह की घटना स्वीकार्य नहीं है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
निष्कर्ष
वायरल वीडियो ने शिक्षा व्यवस्था, स्कूल प्रबंधन और विभागीय निगरानी पर कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजरें आधिकारिक जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं, जिससे सच्चाई सामने आ सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।