OPS के तहत 69 लाख केंद्रीय कर्मचारी पेंशनभोगी, NPS के तहत 50000 से भी कम, क्यों
सरकारी कर्मचारियों के बीच पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लेकर बहस नई नहीं है, लेकिन हाल के आंकड़ों ने इस चर्चा को फिर तेज कर दिया है। दिलचस्प बात यह है कि जहां OPS के तहत पेंशन पाने वालों की संख्या लाखों में है, वहीं NPS के तहत यह आंकड़ा अभी भी काफी कम है। आखिर इसकी वजह क्या है? आइए आसान भाषा में समझते हैं।
ताजा आंकड़े: किस योजना में कितने पेंशनभोगी?
सरकार द्वारा संसद में साझा किए गए details के मुताबिक:
केंद्र सरकार में कुल कर्मचारी: लगभग 50.14 लाख
OPS के तहत पेंशनभोगी: करीब 69 लाख
NPS के तहत पेंशनभोगी (31 जनवरी 2026 तक): लगभग 49,802
पहली नजर में यह अंतर चौंकाता है, लेकिन इसके पीछे एक सीधी-सी वजह छिपी है।
इतना बड़ा अंतर क्यों?
असल में, यह अंतर “eligibility” की तारीख से जुड़ा है।
1 जनवरी 2004 से पहले नौकरी में आने वाले कर्मचारियों पर OPS लागू है
इसके बाद भर्ती हुए कर्मचारी NPS के दायरे में आते हैं
यानि पुराने कर्मचारी अब रिटायर होकर बड़ी संख्या में OPS के तहत पेंशन ले रहे हैं, जबकि NPS अभी अपेक्षाकृत नया सिस्टम है। इसलिए उसमें पेंशनभोगियों की संख्या कम दिखती है।
OPS vs NPS: समझिए आसान उदाहरण से
अगर तुलना करें, तो OPS कुछ हद तक “फिक्स्ड सैलरी” जैसा भरोसा देता है—रिटायरमेंट के बाद आखिरी वेतन का लगभग 50% पेंशन, साथ में महंगाई भत्ता।
वहीं NPS “investment based” मॉडल है—जितना योगदान और जितना रिटर्न, उसी के आधार पर पेंशन तय होती है। इसमें थोड़ा बाजार जोखिम भी जुड़ा रहता है।
सरकार का क्या कहना है?
सरकार ने साफ किया है कि NPS के तहत पेंशन भुगतान में पिछले तीन साल में देरी का कोई मामला सामने नहीं आया। पेंशन से जुड़े online process को भी लगातार आसान बनाया जा रहा है, ताकि रिटायर कर्मचारियों को परेशानी न हो।
OPS बहाली पर स्थिति
OPS को लेकर फैसला पूरी तरह राज्यों के हाथ में है। कुछ राज्यों—जैसे राजस्थान, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, पंजाब और झारखंड—ने इसे फिर लागू भी किया है।
हालांकि, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने चेतावनी दी है कि OPS में वापसी से राज्यों पर भविष्य में भारी वित्तीय बोझ पड़ सकता है। यानी आज राहत, लेकिन कल दबाव बढ़ने का खतरा।
UPS क्या है और क्यों लाया गया?
सरकार ने NPS कर्मचारियों के लिए एक नया विकल्प UPS (Unified Pension Scheme) भी पेश किया है। इसका उद्देश्य है—योगदान आधारित सिस्टम को बनाए रखते हुए पेंशन को थोड़ा अधिक “predictable” बनाना।
डिजिटल पेंशन सेवाओं में बदलाव
पेंशन प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए सरकार ने कई डिजिटल कदम उठाए हैं:
‘भविष्य’ सॉफ्टवेयर के जरिए सरल आवेदन
डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट (DLC)
NPS निकासी का ऑनलाइन प्रोसेस
SMS और ईमेल अलर्ट
इन सुविधाओं से पेंशन सिस्टम अब पहले से ज्यादा पारदर्शी और यूजर-फ्रेंडली होता जा रहा है।
OPS और NPS की बहस सिर्फ आंकड़ों की नहीं, बल्कि भरोसे और भविष्य की योजना की भी है। जहां OPS स्थिरता देता है, वहीं NPS में संभावनाएं और जोखिम दोनों हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि कर्मचारी और सरकार इस संतुलन को कैसे संभालते हैं।