बिना OTP नहीं मिलेगा रसोई गैस सिलेंडर, बिना बुकिंग वालों की बढ़ी दिक्कत,  नया नियम लागू

बिना OTP नहीं मिलेगा रसोई गैस सिलेंडर, बिना बुकिंग वालों की बढ़ी दिक्कत, नया नियम लागू

रसोई गैस लेने वाले उपभोक्ताओं के लिए एक अहम latest update सामने आया है। अब गैस सिलेंडर की डिलिवरी के समय मोबाइल पर आए OTP (वन टाइम पासवर्ड) बताना जरूरी होगा। पेट्रोलियम मंत्रालय के निर्देश के बाद तेल कंपनियों ने एजेंसी संचालकों को साफ कहा है कि Delivery Authentication Code (DAC) व्यवस्था को बड़े स्तर पर लागू किया जाए।

इस नई व्यवस्था के तहत अब अधिकतर उपभोक्ताओं को सिलेंडर लेते समय OTP बताना होगा। कंपनियों का मानना है कि इससे गैस वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी और फर्जी डिलिवरी की समस्या भी कम होगी।

क्या है नया नियम और official details

पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से जारी official details के मुताबिक अब कम से कम 80 प्रतिशत गैस सिलेंडर की डिलिवरी OTP के जरिए सत्यापित होना जरूरी है। इसका मतलब यह है कि यदि किसी एजेंसी में 80 प्रतिशत सिलेंडर OTP के आधार पर वितरित नहीं हुए, तो तेल कंपनियों के रिकॉर्ड में वह डिलिवरी पूरी नहीं मानी जाएगी।

ऐसी स्थिति में संबंधित गैस एजेंसी की आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है। यानी एजेंसी को नए सिलेंडर मिलने में दिक्कत आ सकती है।

कैसे काम करता है DAC और online process

यह व्यवस्था कोई नई नहीं है। तेल कंपनियों ने करीब पांच साल पहले DAC सिस्टम शुरू किया था। इसकी प्रक्रिया काफी सरल है।

जब भी उपभोक्ता गैस सिलेंडर की बुकिंग करता है, तो उसके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर चार अंकों का एक कोड भेजा जाता है। यही कोड डिलिवरी के समय हाकर या डिलिवरी बॉय को बताना होता है।

डिलिवरी करने वाला व्यक्ति इस कोड को अपने सिस्टम में दर्ज करता है। इसके बाद ही गैस सिलेंडर की डिलिवरी पूरी मानी जाती है। इस तरह पूरी प्रक्रिया एक तरह का online process बन जाती है जिससे वितरण का रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है।

पहले क्यों नहीं था सख्त नियम

शुरुआत में DAC सिस्टम को पूरी तरह अनिवार्य नहीं बनाया गया था। इसकी वजह यह थी कि कई जगहों पर उपभोक्ताओं को OTP मिलने में दिक्कत होती थी।

खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क कमजोर होने के कारण कई बार OTP देर से पहुंचता था या आता ही नहीं था। इसलिए पहले कंपनियां इस व्यवस्था में थोड़ी ढील दे रही थीं, ताकि लोगों को सिलेंडर लेने में परेशानी न हो।

लेकिन अब कंपनियों ने इसे सख्ती से लागू करने का फैसला किया है।

DAC नहीं हुआ तो एजेंसी संचालकों की बढ़ेगी मुश्किल

नए नियम का असर सीधे गैस एजेंसी संचालकों पर भी पड़ने वाला है। यदि बिना DAC के ज्यादा सिलेंडर वितरित किए गए, तो कंपनियों के सिस्टम में यह सिलेंडर एजेंसी के गोदाम में ही दिखते रहेंगे।

ऐसी स्थिति में एजेंसी को तब तक नए सिलेंडर नहीं मिलेंगे जब तक उनका स्टॉक 20 प्रतिशत से नीचे नहीं आ जाता। यही कारण है कि अब एजेंसी संचालक भी उपभोक्ताओं से OTP बताने के लिए कह रहे हैं।

बुकिंग नियम से भी परेशान हैं उपभोक्ता

गैस उपभोक्ताओं की परेशानी सिर्फ OTP तक सीमित नहीं है। तेल कंपनियों ने पहले ही यह नियम बना दिया है कि एक सिलेंडर लेने के बाद अगली बुकिंग कम से कम 25 दिन बाद ही की जा सकती है।

कई उपभोक्ता ऐसे हैं जिन्होंने हाल ही में सिलेंडर लिया है, इसलिए उनकी नई बुकिंग नहीं हो पा रही। ऐसे लोग गैस एजेंसियों के शोरूम पर पहुंचकर बुकिंग कराने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे विवाद की स्थिति भी बन रही है।

बिना बुकिंग सिलेंडर लेने वालों की बढ़ी दिक्कत

पहले कुछ जगहों पर बिना बुकिंग भी लोगों को गैस सिलेंडर मिल जाता था। खासकर ऐसे लोग जिनके परिचित एजेंसी में होते थे या जिनका कनेक्शन ग्रामीण इलाके का था लेकिन वे शहर में रह रहे थे।

अब नई व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसे उपभोक्ताओं को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। एजेंसी संचालक अब बिना बुकिंग और OTP के सिलेंडर देने से बच रहे हैं, जिससे कई लोगों की नाराजगी भी बढ़ रही है।

सिलेंडर की कमी के बीच प्लांट बंद होने से बढ़ी चिंता

गोरखपुर में गैस सिलेंडर की कमी के बीच एक और समस्या सामने आई। इंडियन ऑयल का गीडा स्थित बॉटलिंग प्लांट रविवार को बंद रहा।

पहले कहा गया था कि रविवार को भी प्लांट में सिलेंडर की रीफिलिंग होगी ताकि ज्यादा से ज्यादा एजेंसियों को सप्लाई दी जा सके। लेकिन रविवार को प्लांट बंद रहने से सिलेंडर की आपूर्ति पर असर पड़ा। इससे पहले होली के दौरान भी प्लांट बंद रखा गया था।

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