Latest Update: बीएसए देवरिया के निलंबन की संस्तुति, जांच में सामने आए गंभीर तथ्य
देवरिया जिले से आई यह खबर पूरे शिक्षा विभाग के लिए झकझोरने वाली है। गौरीबाजार क्षेत्र के एक सहायक अध्यापक की आत्महत्या के मामले में प्रशासनिक स्तर पर बड़ी कार्रवाई की संस्तुति की गई है। Latest Update के अनुसार, जिला प्रशासन ने बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) के निलंबन और विभागीय कार्रवाई की रिपोर्ट शासन को भेज दी है।
यह मामला केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा गंभीर प्रश्न बन चुका है।
क्या है पूरा मामला? (Official Details)
कुशीनगर जिले के कुबेरस्थान थाना क्षेत्र स्थित हरैया बुजुर्ग निवासी कृष्ण मोहन सिंह देवरिया जिले के गौरीबाजार विकास खंड के कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय, मदरसन में सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत थे। वह गोरखपुर के गुलरिहा क्षेत्र में अपने भाई के साथ रह रहे थे।
बीती 20 फरवरी की रात उन्होंने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। इस घटना से पहले उन्होंने एक सुसाइड नोट और वीडियो जारी किया, जिसमें बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, एक लिपिक सहित कुछ अन्य लोगों पर प्रताड़ना के आरोप लगाए गए थे।
घटना के बाद गोरखपुर के गुलरिहा थाने में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। मामला सामने आते ही शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन सक्रिय हो गया।
दो स्तर पर बनी जांच कमेटियां
इस संवेदनशील प्रकरण की जांच के लिए दो अलग-अलग स्तरों पर कमेटियां गठित की गईं—एक जिला स्तर पर और दूसरी लखनऊ स्तर से।
जिला मजिस्ट्रेट दिव्या मित्तल के निर्देश पर सीडीओ राजेश कुमार सिंह की अध्यक्षता में एक टीम बनाई गई। इस टीम में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट श्रुति शर्मा और एडीआईओएस नीलेश पांडेय शामिल थे।
वहीं, स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा गठित टीम में संयुक्त शिक्षा निदेशक डॉ. पवन सचान, उप शिक्षा निदेशक (प्राइमरी) संजय कुमार उपाध्याय और मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) संगीता सिंह शामिल रहीं।
दोनों टीमों ने बीएसए कार्यालय पहुंचकर दस्तावेजों की बारीकी से जांच की। देर रात तक एक-एक बिंदु पर सवाल-जवाब और रिकॉर्ड की समीक्षा की गई। जांच के दौरान प्रशासनिक स्तर पर कई अहम पहलुओं की पड़ताल हुई।
जांच में क्या सामने आया?
जिला स्तरीय कमेटी की रिपोर्ट में यह तथ्य प्रमुख रूप से सामने आया कि उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद लगभग एक वर्ष तक प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि आदेश के अनुपालन में विलंब और उदासीनता से परिस्थितियां प्रतिकूल बनीं। प्रशासनिक ढिलाई अक्सर कागजों में छोटी लगती है, लेकिन कई बार उसका असर ज़मीनी स्तर पर गंभीर हो जाता है—इस मामले ने यही सवाल खड़ा किया है।
जांच कमेटी की रिपोर्ट मिलने के बाद डीएम ने बीएसए के निलंबन और विभागीय कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेज दी है। यह कदम प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया
डीएम दिव्या मित्तल ने स्पष्ट किया कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए टीम गठित की गई थी। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।
यह एक official announcement के रूप में सामने आया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले रहा है।
क्यों अहम है यह मामला?
शिक्षा विभाग में कार्यरत कर्मचारियों के लिए यह घटना कई सवाल छोड़ गई है। कार्यस्थल पर तनाव, शिकायतों के निस्तारण में देरी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की पारदर्शिता—ये सभी मुद्दे अब चर्चा में हैं।
किसी भी सरकारी व्यवस्था में important guidelines और न्यायालय के आदेशों का समय पर पालन अत्यंत जरूरी होता है। जब आदेशों के क्रियान्वयन में देरी होती है, तो उसका प्रभाव सीधे संबंधित व्यक्ति पर पड़ता है।
आगे क्या?
अब नजर शासन स्तर के फैसले पर टिकी है। यदि निलंबन की संस्तुति को मंजूरी मिलती है, तो विभागीय जांच की औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
इस बीच पुलिस जांच भी जारी है, जिससे पूरे मामले की कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी। प्रशासन का कहना है कि सभी पहलुओं की निष्पक्ष पड़ताल की जा रही है।
निष्कर्ष
देवरिया शिक्षक आत्महत्या प्रकरण केवल एक दुखद घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और संवेदनशीलता की परीक्षा भी है। जांच रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के आधार पर बीएसए के निलंबन की संस्तुति यह दर्शाती है कि मामले को हल्के में नहीं लिया गया।
अब उम्मीद यही है कि जांच प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से पूरी हो, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। शिक्षा व्यवस्था की मजबूती केवल नियमों से नहीं, बल्कि समय पर और संवेदनशील निर्णयों से तय होती है।