latest update: , 1 करोड़ से ज्यादा लाभार्थियों की बढ़ने जा रही पेंशन, विधानसभा में सीएम योगी का ऐलान
उत्तर प्रदेश की राजनीति और बजट चर्चा के बीच एक अहम latest update सामने आया है। विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि राज्य में सामाजिक पेंशन की राशि बढ़ाई जाएगी। भले ही औपचारिक घोषणा अभी बाकी है, लेकिन सदन में दिए गए बयान के बाद साफ हो गया है कि 1.06 करोड़ लाभार्थियों के लिए यह एक बड़ा बदलाव हो सकता है।
करीब दो घंटे से अधिक चले अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने सरकार की योजनाओं, बजट प्रावधानों और विपक्ष के आरोपों पर विस्तार से जवाब दिया। इसी दौरान उन्होंने सामाजिक पेंशन को लेकर अहम टिप्पणी की, जिसे अब एक संभावित official announcement के रूप में देखा जा रहा है।
1.06 करोड़ लाभार्थियों के लिए राहत की उम्मीद
वर्तमान में उत्तर प्रदेश में निराश्रित महिलाओं, दिव्यांगजनों और वृद्धजनों को 1000 रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जाती है। यानी सालाना 12,000 रुपये की सहायता सीधे उनके खाते में ट्रांसफर की जाती है। यह राशि कई परिवारों के लिए छोटी लग सकती है, लेकिन गांव और कस्बों में रहने वाले बुजुर्गों व महिलाओं के लिए यही रकम दवा, राशन और दैनिक जरूरतों का सहारा बनती है।
सदन में यह स्पष्ट किया गया कि बजट में पेंशन बढ़ाने के लिए धन का प्रावधान किया जा चुका है। हालांकि राशि कितनी बढ़ेगी, इस पर अंतिम official details की घोषणा अलग से की जाएगी। माना जा रहा है कि सोमवार तक इस पर स्पष्ट जानकारी सामने आ सकती है।
यदि यह बढ़ोतरी लागू होती है तो लगभग 1.06 करोड़ लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। यह संख्या अपने आप में कई राज्यों की कुल आबादी से भी अधिक है। इसलिए इसे राज्य की बड़ी government benefits योजनाओं में से एक माना जा रहा है।
सामाजिक पेंशन योजना: कौन हैं पात्र (Eligibility)
राज्य की सामाजिक पेंशन योजनाओं के तहत तीन प्रमुख वर्गों को लाभ दिया जाता है:
निराश्रित एवं विधवा महिलाएं
दिव्यांगजन
वृद्धजन
इन योजनाओं की eligibility आय सीमा, उम्र और सामाजिक स्थिति के आधार पर तय की जाती है। आवेदन करने वाले व्यक्ति का नाम निर्धारित श्रेणी में होना चाहिए और उसकी आय तय सीमा से कम होनी चाहिए।
अधिकांश मामलों में आवेदन का online process भी उपलब्ध है, जिससे लाभार्थी या उनके परिजन घर बैठे आवेदन कर सकते हैं। ग्राम पंचायत, नगर निकाय या सामाजिक कल्याण विभाग के माध्यम से भी आवेदन स्वीकार किए जाते हैं।
सरकार समय-समय पर लाभार्थियों की सूची का सत्यापन भी कराती है, ताकि केवल पात्र लोगों को ही पेंशन का लाभ मिले। यह एक महत्वपूर्ण guideline है, जिससे योजना की पारदर्शिता बनी रहती है।
विधानसभा में तीखी राजनीतिक बहस
पेंशन के मुद्दे के अलावा मुख्यमंत्री ने विपक्ष, विशेषकर समाजवादी पार्टी, पर भी तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार कानून और मर्यादाओं का पालन करना जानती है और किसी भी प्रकार की अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
माघ मेला और मौनी अमावस्या जैसे बड़े आयोजनों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होती है। कानून सबके लिए बराबर है और किसी को भी व्यवस्था बाधित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
शंकराचार्य पद को लेकर भी उन्होंने टिप्पणी की कि यह सनातन परंपरा का सर्वोच्च धार्मिक पद है, जिसे परंपरागत प्रक्रिया और विद्वत परिषद की मान्यता के आधार पर ही स्वीकार किया जाता है। हर व्यक्ति स्वयं को इस पद से नहीं जोड़ सकता।
इस बयान के बाद सदन में कुछ देर तक माहौल गर्म भी रहा, लेकिन सरकार ने अपना पक्ष स्पष्ट रूप से रखा।
वंदेमातरम पर भी सख्त रुख
विधानसभा में मुख्यमंत्री ने वंदेमातरम के मुद्दे पर भी स्पष्ट रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय भावना से जुड़े विषयों पर किसी प्रकार का विरोध स्वीकार्य नहीं है। उनके बयान के बाद इस मुद्दे पर भी राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि कुछ लोग देशहित से जुड़े विषयों पर अनावश्यक विवाद खड़ा करते हैं। सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय प्रतीकों और परंपराओं का सम्मान सभी को करना चाहिए।
पेंशन बढ़ोतरी का संभावित असर
अगर पेंशन की राशि बढ़ती है तो इसका सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। छोटे गांवों में जब बुजुर्गों या महिलाओं के खाते में अतिरिक्त राशि आती है, तो वह स्थानीय बाजार में ही खर्च होती है। इससे किराना दुकानदार, दवा विक्रेता और छोटे व्यापारी भी लाभान्वित होते हैं।
एक उदाहरण के तौर पर, कई गांवों में बुजुर्ग अपनी पेंशन से दवाइयां खरीदते हैं या घर के राशन में सहयोग करते हैं। अगर राशि 1000 से बढ़कर 1500 या उससे अधिक होती है, तो उनके जीवन स्तर में कुछ सुधार दिख सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय सरकार की घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।
आगे क्या देखें?
अब सभी की नजर सरकार की औपचारिक घोषणा पर है। राशि कितनी बढ़ेगी, यह कब से लागू होगी और किन शर्तों के साथ मिलेगी—इन सभी बातों पर जल्द important guidelines जारी होने की संभावना है।
जो लोग पहले से पेंशन पा रहे हैं, उन्हें अलग से आवेदन करने की जरूरत पड़ेगी या नहीं, यह भी official details में साफ होगा। आमतौर पर ऐसी बढ़ोतरी सीधे मौजूदा लाभार्थियों के खाते में लागू कर दी जाती है।
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश में सामाजिक पेंशन बढ़ाने का संकेत लाखों परिवारों के लिए उम्मीद की खबर है। बजट में प्रावधान होने के बाद अब केवल औपचारिक घोषणा बाकी है। यदि प्रस्ताव लागू होता है, तो 1.06 करोड़ से अधिक निराश्रित महिलाओं, दिव्यांगजनों और वृद्धजनों को सीधा आर्थिक सहारा मिलेगा।
राजनीतिक बयानबाजी और बहस अपनी जगह है, लेकिन जमीनी स्तर पर सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि जरूरतमंद लोगों तक सहायता समय पर और पारदर्शी तरीके से पहुंचे। आने वाले दिनों में सरकार की आधिकारिक घोषणा इस पूरे मामले को स्पष्ट कर देगी।