क्या कोई पत्रकार बिना अनुमति स्कूल में घुसकर वीडियो बना सकता है?
आजकल खबर की होड़ में कई बार ऐसे सवाल खड़े हो जाते हैं, जो सीधे कानून और निजता से जुड़े होते हैं। खासकर जब मामला स्कूल, शिक्षक और बच्चों का हो। आइए, आसान भाषा में समझते हैं कि स्कूल में रिपोर्टिंग को लेकर कानून क्या कहता है और पत्रकार क्या कर सकता है, क्या नहीं।
क्या बिना अनुमति पत्रकार स्कूल में प्रवेश कर सकता है?
सीधा जवाब – नहीं।
स्कूल कोई सार्वजनिक स्थान नहीं है, बल्कि एक संवेदनशील और संरक्षित परिसर होता है।
बिना स्कूल प्रबंधन या शिक्षा विभाग की आधिकारिक अनुमति के:
स्कूल में प्रवेश करना
कैमरा ऑन करना
वीडियो या फोटो रिकॉर्ड करना
कानूनन गलत है।
ऐसा करना IPC की धारा 441 (आपराधिक अतिक्रमण) के दायरे में आ सकता है।
जैसे किसी के घर में बिना अनुमति घुसना गलत है, वैसे ही स्कूल में भी जबरन घुसना अपराध है।
क्या पत्रकार शिक्षक का वीडियो बना सकता है?
बिना सहमति – बिल्कुल नहीं।
किसी भी शिक्षक की:
वीडियो रिकॉर्डिंग
फोटो
कैमरे पर बयान
उनकी स्पष्ट सहमति के बिना नहीं ली जा सकती।
यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले Right to Privacy का उल्लंघन है।
क्या पत्रकार छात्र (बच्चे) का वीडियो बना सकता है?
यह सबसे संवेदनशील और गंभीर मामला है।
छात्र नाबालिग होते हैं।
अभिभावक की लिखित अनुमति के बिना:
बच्चे का वीडियो
फोटो
नाम, चेहरा, आवाज
स्कूल यूनिफॉर्म के साथ पहचान
दिखाना सीधा कानूनन अपराध है।
ऐसे मामलों में कार्रवाई हो सकती है:
Juvenile Justice Act
POCSO Act
Digital Personal Data Protection Act
बच्चे की पहचान उजागर करना, चाहे अनजाने में ही क्यों न हो, कानून तोड़ना है।
क्या पत्रकार बच्चों से सवाल पूछकर “जांच” कर सकता है?
बिल्कुल नहीं।
कैमरे पर बच्चों से सवाल पूछना
उनकी पढ़ाई या ज्ञान का टेस्ट लेना
उन्हें शर्मिंदा करना
यह न केवल गैरकानूनी है, बल्कि अनैतिक भी।
क्या पत्रकार शिक्षकों से सवाल पूछकर ज्ञान का परीक्षण कर सकता है?
बिना सहमति – यह भी गलत है।
कैमरे के सामने:
जबरन सवाल पूछना
“टेस्ट” लेना
प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाना
मानहानि (Defamation) की श्रेणी में आता है।
शिक्षक वर्षों की पढ़ाई, डिग्री, प्रतियोगी परीक्षाएं और इंटरव्यू पास करके नियुक्त होते हैं।
कोई भी व्यक्ति सिर्फ माइक लेकर उनकी योग्यता पर सवाल नहीं उठा सकता।
तो पत्रकार क्या कर सकता है? (Legal & Ethical Reporting)
पत्रकार को अधिकार है, लेकिन सीमाओं के साथ:
✔️ स्कूल प्रबंधन की अनुमति से
✔️ अभिभावकों की लिखित सहमति से
✔️ बच्चों की पहचान पूरी तरह छिपाकर
✔️ केवल जनहित में, तथ्यात्मक और संतुलित रिपोर्टिंग
दबाव, अपमान और मनमानी – स्वीकार्य नहीं।
अगर पत्रकार जबरन वीडियो बनाए तो क्या करें?
Official Process & Legal Options
✔️ स्कूल प्रशासन FIR दर्ज करा सकता है
✔️ अभिभावक पुलिस में शिकायत कर सकते हैं
✔️ मानहानि का केस दर्ज हो सकता है
✔️ कैमरा और रिकॉर्डिंग सामग्री जब्त की जा सकती है
निष्कर्ष
पत्रकारिता लोकतंत्र का मजबूत स्तंभ है, लेकिन कानून, मर्यादा और बच्चों की निजता से ऊपर कोई खबर नहीं।
स्कूल में रिपोर्टिंग अनुमति, सहमति और जिम्मेदारी के साथ ही होनी चाहिए।