शिक्षा मित्रों के संविलियन पर बड़ा अपडेट बीटीसी शिक्षक संघ ने सरकार से की स्थायी समाधान
शिक्षा मित्रों के भविष्य को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। बीटीसी शिक्षक संघ ने छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के मॉडल का हवाला देते हुए शिक्षा मित्रों को बेसिक शिक्षा विभाग में स्थायी कर्मचारी के रूप में संविलियन करने की मांग उठाई है। संघ का कहना है कि वर्षों की सेवा और अनुभव के बाद भी शिक्षा मित्रों की स्थिति आज भी अस्थिर बनी हुई है, जिसे अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट आदेश के बीच व्यावहारिक रास्ता
संघ अध्यक्ष अनिल यादव के अनुसार, यदि शिक्षा मित्रों को दोबारा सहायक अध्यापक बनाने में सुप्रीम कोर्ट का आदेश बाधा बन रहा है, तो सरकार के पास व्यावहारिक विकल्प मौजूद है। उनका सुझाव है कि प्रदेश के लगभग 1.48 लाख शिक्षा मित्रों को बेसिक शिक्षा विभाग में स्थायी कर्मचारी की तरह समायोजित किया जाए, ताकि उनकी आजीविका सुरक्षित हो सके।
अन्य राज्यों का उदाहरण क्यों है अहम
छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में शिक्षा से जुड़े कर्मियों के लिए अपनाए गए संविलियन मॉडल को संघ एक सकारात्मक उदाहरण मानता है। वहां सरकारी दिशा-निर्देशों के तहत कर्मचारियों को स्थायित्व दिया गया, जिससे न केवल शिक्षा व्यवस्था मजबूत हुई बल्कि कर्मचारियों का मनोबल भी बढ़ा।
Official Details और Government Benefits
संघ का मानना है कि शिक्षा मित्रों का संविलियन होने से
विभाग को अनुभवी मानव संसाधन मिलेगा
शिक्षा मित्रों को सरकारी लाभ और सेवा सुरक्षा प्राप्त होगी
स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता पर सकारात्मक असर पड़ेगा
Important Guidelines पर सरकार से अपेक्षा
बीटीसी शिक्षक संघ ने सरकार से अपील की है कि इस मुद्दे पर आधिकारिक घोषणा (official announcement) करते हुए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। साथ ही संविलियन की eligibility और online process जैसी जानकारियां समय रहते सार्वजनिक की जाएं, ताकि किसी भी तरह का भ्रम न रहे।
निष्कर्ष
शिक्षा मित्रों का मामला अब केवल मांग नहीं, बल्कि स्थायी समाधान की जरूरत बन चुका है। अन्य राज्यों के अनुभव और संघ के सुझावों को देखते हुए सरकार यदि ठोस कदम उठाती है, तो यह फैसला लाखों परिवारों के लिए राहत भरा साबित हो सकता है। अब सभी की नजरें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।