निरीक्षण में खुली पोल: शिक्षक गायब, छात्र भी नहीं — 3 कर्मचारी सस्पेंड
नए शिक्षा सत्र की शुरुआत इस बार 1 अप्रैल से की गई थी। मकसद साफ था—सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाना। लेकिन ज़मीन पर तस्वीर कुछ और ही दिखी। latest update यही है कि प्रवेशोत्सव अभियान को कई जगह गंभीरता से नहीं लिया गया।
मंगलवार को माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट जब औचक निरीक्षण पर पहुंचे, तो हालात देखकर हैरान रह गए। कई स्कूलों में व्यवस्था ढीली मिली। कहीं छात्र नहीं थे, तो कहीं शिक्षक बिना सूचना के गायब।
एक स्कूल में एक भी छात्र नहीं, दूसरे में शिक्षक नदारद
लूणकरणसर ब्लॉक के अलग-अलग सरकारी स्कूलों में जांच के दौरान बड़ी लापरवाही सामने आई। एक स्कूल में तो एक भी विद्यार्थी मौजूद नहीं था। सोचिए, नया सत्र शुरू हो चुका है और क्लासरूम खाली पड़े हैं।
दूसरी जगह हालात और भी खराब मिले। शिक्षक बिना बताए अनुपस्थित थे। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी, यह बड़ा सवाल है।
प्राचार्य समेत 3 पर कार्रवाई, सस्पेंशन के आदेश
मामले को गंभीर मानते हुए निदेशक ने तुरंत एक्शन लिया। एक प्रिंसिपल और दो अन्य कर्मचारियों को निलंबित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही एक प्राचार्य के खिलाफ नियम 16 के तहत कार्रवाई शुरू करने को कहा गया।
यह कदम साफ दिखाता है कि अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बामनवाली स्कूल: 5 एडमिशन, लेकिन छात्र नहीं पहुंचे
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बामनवाली की स्थिति सबसे खराब रही। यहां निरीक्षण के दौरान एक भी छात्र मौजूद नहीं मिला। जबकि स्कूल प्रशासन ने सिर्फ 5 नए एडमिशन होने की जानकारी दी।
सबसे हैरानी वाली बात यह रही कि आंगनबाड़ी से आने वाले बच्चों का प्रवेश भी नहीं कराया गया। प्रवेशोत्सव की कोई ठोस योजना भी नहीं दिखी। इसे देखते हुए प्राचार्य राजन सिंह को तुरंत सस्पेंड कर दिया गया।
हंसेरा स्कूल: आधे से कम स्टाफ मौजूद
राउमावि हंसेरा में भी हालात ठीक नहीं मिले। कुल 16 कर्मचारियों में से सिर्फ 9 ही मौजूद थे। बाकी बिना सूचना के गायब।
यहां न तो प्रवेशोत्सव की सही योजना बनाई गई और न ही नए एडमिशन की कोई प्रगति दिखी। 9 बच्चों को, जो आंगनबाड़ी से स्कूल आ सकते थे, अभी तक प्रवेश नहीं मिला।
इस लापरवाही पर दो कर्मचारियों को तुरंत निलंबित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही कार्यवाहक प्राचार्य के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू की गई।
धीरेरा स्कूल: यहां सब कुछ ठीक मिला
इसी बीच एक अच्छी खबर भी सामने आई। धीरेरा गांव के स्कूल में व्यवस्था संतोषजनक पाई गई। यहां प्रवेशोत्सव कार्यक्रम सही तरीके से चल रहा था।
निदेशक ने वहां मौजूद अभिभावकों और ग्रामीणों से बातचीत की और बच्चों का सरकारी स्कूलों में एडमिशन कराने की अपील भी की।