फर्जी दस्तावेज़ों पर नौकरी करने वाले 24 शिक्षक बर्खास्त होंगे, हाईकोर्ट का सख्त आदेश
जाली शैक्षिक प्रमाणपत्रों के सहारे सरकारी शिक्षक की नौकरी हासिल करने वाले 24 शिक्षकों पर अब कड़ी कार्रवाई तय मानी जा रही है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि ऐसे सभी मामलों में छह माह के भीतर बर्खास्तगी सुनिश्चित की जाए। यह आदेश जिले में चल रही सत्यापन प्रक्रिया के बाद सामने आए फर्जीवाड़े पर आधारित है।
दस्तावेज़ सत्यापन में खुला फर्जीवाड़ा
पिछले वर्ष जनपद में शिक्षकों के शैक्षिक अभिलेखों का आधिकारिक सत्यापन कराया गया था। इसी प्रक्रिया में कुल 24 शिक्षक ऐसे पाए गए, जिनके प्रमाणपत्र मान्य नहीं थे। जांच में कहीं शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) तो कहीं डीएलएड (D.El.Ed.) से जुड़े दस्तावेज़ जाली निकले।
सत्यापन के बाद संबंधित शिक्षकों को नोटिस, फिर निलंबन और एफआईआर की कार्रवाई का सामना करना पड़ा। अब हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार, बर्खास्तगी की प्रक्रिया को तय समय-सीमा में पूरा किया जाएगा।
12460 शिक्षक भर्ती: दो चरणों में जांच
वर्ष 2024 में 12460 शिक्षक भर्ती के तहत सीतापुर में लगभग 1100 सहायक अध्यापक तैनात किए गए थे। इनके अभिलेखों की जांच दो चरणों में हुई:
पहला चरण:
करीब 500 शिक्षकों के दस्तावेज़ जांचे गए, जिनमें 16 के प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए। इन्हें नोटिस, निलंबन और मुकदमे के बाद अप्रैल 2025 में बर्खास्त कर दिया गया।
दूसरा चरण:
शेष 600 शिक्षकों की जांच में 24 शिक्षक फर्जी दस्तावेज़ों के साथ पाए गए। इन पर भी निलंबन और एफआईआर दर्ज कर बर्खास्तगी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
एसटीएफ जांच में पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
यह पहला मौका नहीं है। करीब नौ वर्ष पहले भी स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की जांच में जिले के 28 सहायक अध्यापक फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी करते पाए गए थे। प्रदेश स्तर पर हुई उस जांच के बाद सभी को सेवा से बर्खास्त किया गया था।
अधिकारी का बयान: तय प्रक्रिया के तहत होगी कार्रवाई
अखिलेश प्रताप सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी (BEO) ने बताया कि
“जाली प्रपत्रों के मामलों में निलंबन और एफआईआर की कार्रवाई पहले ही हो चुकी है। अब महत्वपूर्ण दिशानिर्देशों और सरकारी नियमों के अनुसार बर्खास्तगी की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।”