बच्चे के जन्म पर पिता को भी मिले छुट्टी? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कानून बनाने के लिए निर्देश
परिवार में बच्चे का जन्म सिर्फ मां की जिम्मेदारी नहीं होता—यह बात अब न्यायपालिका भी खुलकर कह रही है। हाल ही में Supreme Court of India ने केंद्र सरकार से अपील की है कि देश में पितृत्व अवकाश (Paternity Leave) को कानूनी मान्यता देने के लिए ठोस कानून बनाया जाए। अदालत का मानना है कि पिता की भूमिका को नजरअंदाज करना अब व्यावहारिक नहीं है।
👨👩👧 पिता भी हैं बराबर के देखभालकर्ता
जस्टिस J.B. Pardiwala और जस्टिस R. Mahadevan की पीठ ने साफ कहा कि छोटे बच्चों की देखभाल में पिता भी उतने ही अहम होते हैं जितनी मां।
आज के समय में, जहां दोनों माता-पिता कामकाजी होते हैं, वहां बच्चे की जिम्मेदारी साझा करना एक जरूरत बन चुका है—सिर्फ विकल्प नहीं।
⚖️ किस मामले में आया यह फैसला? (Details)
यह टिप्पणी एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान आई, जिसमें गोद लेने वाली माताओं को मिलने वाले मातृत्व लाभ की eligibility को चुनौती दी गई थी।
अदालत ने माना कि:
गोद लिया गया बच्चा और जैविक बच्चा—दोनों की जरूरतें समान होती हैं
परिवार की परिभाषा सिर्फ जन्म से तय नहीं होती
इसलिए कानून में भी यह समानता दिखनी चाहिए
📜 मौजूदा नियम क्या कहते हैं?
भारत में महिलाओं को मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 के तहत 26 सप्ताह तक का सवेतन अवकाश मिलता है।
लेकिन:
पितृत्व अवकाश पर कोई स्पष्ट राष्ट्रीय कानून नहीं है
निजी क्षेत्र में यह सुविधा अक्सर नहीं मिलती
सरकारी कर्मचारियों को सीमित छुट्टी जरूर मिलती है
यही असमानता कोर्ट के सामने एक बड़ी चिंता के रूप में सामने आई।
👶 गोद लेने वाले माता-पिता पर बड़ा फैसला
अदालत ने सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020 के उस प्रावधान को असंवैधानिक बताया, जिसमें सिर्फ 3 महीने से कम उम्र के बच्चे को गोद लेने पर ही 12 हफ्ते का लाभ मिलता था।
कोर्ट ने आदेश दिया कि:
अब सभी गोद लेने वाली माताओं को बच्चे की उम्र की परवाह किए बिना 12 सप्ताह का मातृत्व अवकाश मिलेगा
यह फैसला न सिर्फ गोद लेने की प्रक्रिया को आसान बनाता है, बल्कि समाज में समानता का संदेश भी देता है।
📢 पितृत्व अवकाश पर कोर्ट का स्पष्ट रुख
सुनवाई के दौरान Supreme Court of India ने कहा कि:
पितृत्व अवकाश को सामाजिक सुरक्षा (Social Security) का हिस्सा माना जाना चाहिए
केंद्र सरकार को इस पर जल्द कानून लाने के लिए कदम उठाने चाहिए
हालांकि, छुट्टी की अवधि और अन्य शर्तें तय करना सरकार के अधिकार क्षेत्र में रहेगा।
🌍 दुनिया से क्या सीख सकता है भारत?
कई देशों में पितृत्व अवकाश पहले से लागू है, जहां:
पिता को बच्चे के जन्म के बाद समय दिया जाता है
परिवार में जिम्मेदारियां संतुलित रहती हैं
बच्चों के शुरुआती विकास पर सकारात्मक असर पड़ता है
भारत में भी अब इसी दिशा में कदम बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है।