फर्जी दस्तावेज पर प्रदेश में कार्यरत सहायक शिक्षकों की नियुक्तियों की 06 महीने में करें जांच, नियुक्ति तत्काल रद्द

फर्जी दस्तावेज पर प्रदेश में कार्यरत सहायक शिक्षकों की नियुक्तियों की 06 महीने में करें जांच, नियुक्ति तत्काल रद्द

फर्जी दस्तावेज पर नौकरी मामले में नाराज हाईकोर्ट ने कहा-छात्रों के भविष्य के साथ अन्याय है, फर्जी पाए जाने वालों की नियुक्ति तत्काल रद्द की जाए

 

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जी दस्तावेज के आधार पर नौकरी मामले में नाराजगी जताई है। साथ ही पूरे प्रदेश में सहायक अध्यापकों की नियुक्तियों की छह माह में जांच करने के निर्देश दिए हैं।कोर्ट ने कहा कि धोखाधड़ी से प्राप्त नियुक्तियां न केवल अवैध हैं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के भविष्य के साथ अन्याय है। यह तल्ख टिप्पणी न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने गरिमा सिंह की याचिका पर की। इसी के साथ उनकी याचिका भी खारिज कर दी।

 

देवरिया में गरिमा सिंह वर्ष 2010 से एक उच्चतर प्राथमिक

 

विद्यालय में कार्यरत थीं। विभागीय जांच में पाया गया कि याची किसी अन्य अभ्यर्थी के शैक्षिक-निवास प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी कर रही हैं। इस पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने छह अगस्त 2025 को उनकी नियुक्ति निरस्त कर दी। याची ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी।

 

कोर्ट ने कहा कि गलत प्रमाण पत्रों के आधार पर कई शिक्षक वर्षों या दशकों तक सेवा में बने रहते हैं, जो अधिकारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है। ऐसी अवैध नियुक्तियां शिक्षा व्यवस्था की जड़ों को कमजोर करती हैं और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करती हैं। जब नियुक्ति धोखाधड़ी या जालसाजी से प्राप्त हो तो ऐसे मामलों में विस्तृत सुनवाई या सहानुभूति की गुंजाइश नहीं होती।

 

हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव (बेसिक शिक्षा) को निर्देश दिया कि पूरे प्रदेश में शिक्षकों की नियुक्तियों की गहन जांच कराई जाए। फर्जी पाए जाने वाले शिक्षकों की नियुक्ति तत्काल रद्द की जाए और उनसे अब तक लिया गया वेतन भी वसूला जाए। साथ ही ऐसे मामलों में लापरवाही या मिलीभगत करने वाले अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

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